नेपाल के 'नए नक्शे' पर सूत्रों ने कहा, 'चर्चा के लिए माहौल बनाने का दायित्व अब पूरी तरह नेपाली PM पर'

आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि ओली सरकार द्वारा नया नक्शा जारी करना भारत के साथ सीमा विवाद का राजनीतिकरण करने का प्रयास था और यह दर्शाता है कि नेपाली प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी ने एक लोकलुभावन कदम उठाया जो इसका चुनाव पूर्व वादा भी था.

नेपाल के 'नए नक्शे' पर सूत्रों ने कहा, 'चर्चा के लिए माहौल बनाने का दायित्व अब पूरी तरह नेपाली PM पर'

नेपाल की संसद ने शनिवार को 'विवादित नक्‍शे' को मंजूरी दी

नई दिल्ली:

नेपाल की ओर से नया राजनीतिक नक्‍शा (Nepal's New map) जारी करना और भारत (India) के कुछ हिस्‍सों को इसमें शामिल करने का मुद्दा जोर पकड़ गया है. आधिकार‍िक सूत्रों नेे  साफ कहा, यह मसला नेपाली प्रधानमंत्री के घरेलू एजेंडे को दर्शाता है. इन सूत्रों ने एनडीटीवी से कहा,' भारत और नेपाल के बीच अब बातचीत के लिये अनुकूल माहौल तैयार करने का दायित्व पूरी तरह से नेपाली प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली (KP Sharma Oli) और उनकी सरकार का है क्योंकि नया नक्शा जारी करना राजनीतिक फायदा हासिल करने का उसका “अदूरदर्शी” एजेंडा था.' नेपाल ने उस जमीन पर दावा किया है जो चीन के साथ सीमा को छूती है. ब्रिटिश शासन के दौरान इसके लिए ईस्‍ट इंडिया कंपनी के साथ करार हुआ था.

आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि ओली सरकार द्वारा नया नक्शा जारी करना भारत के साथ सीमा विवाद का राजनीतिकरण करने का प्रयास था और यह दर्शाता है कि नेपाली प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी ने एक लोकलुभावन कदम उठाया जो इसका चुनाव पूर्व वादा भी था. यही नहीं, विपक्षी पार्टी नेपाली कांग्रेस को संविधान संशोधन बिल का समर्थन करने के लिए मजबूर किया गया है जिसे पारित होने के लिए दो-तिहाई बहुमत की जरूरत थी. नेपाल की संसद ने शनिवार को नक्शे को अपडेट करने के लिए संवैधानिक संशोधन बिल पर मतदान किया, जिसमें कालापानी, लिंपियाधुरा और लिपुलेख शामिल हैं. भारत इनहें अपना इलाका बताता रहा है. ओली के नेतृत्व वाली कम्युनिस्ट सरकार ने शनिवार को इस नए नक्शे को संसद के निचले सदन से सर्वसम्मति से पारित करा लिया था जबकि भारत ने कड़े शब्दों में स्पष्ट कर दिया था कि “कृत्रिम रूप से बढ़ा-चढ़ाकर” पेश किये गए यह क्षेत्रीय दावे स्वीकार करने योग्य नहीं हैं. 

स्थिति पर भारत के रुख को स्‍पष्‍ट करते हुए एक सूत्र ने कहा, “यह कार्रवाई अदूरदर्शी और एक सीमित राजनीतिक एजेंडे को साधने वाली है.” सूत्रों ने कहा कि अब यह दायित्व प्रधानमंत्री ओली का है कि वह संवाद का अनुकूल माहौल तैयार करने के लिये सकारात्मक और ठोस कदम उठाएं. उन्होंने कहा कि नया नक्शा जारी करना और उसे कानूनी समर्थन दिलवाना यह स्पष्ट रूप से पर्याप्त संकेत है कि नया नक्शा “राजनीतिक फायदे का एक औजार” है क्योंकि यह न तथ्यों और न ही साक्ष्यों से प्रेरित है. सूत्रों ने कहा कि भारत ने नेपाल के साथ बातचीत के प्रस्ताव पर हमेशा सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है और वहां की संसद के निचले सदन में नक्शे के मुद्दे को चर्चा के लिये उठाए जाने से ठीक पहले भी भारत ने इस विषय पर नेपाल से संपर्क किया था. 

सूत्रों ने ओली के उस दावे को भी खारिज कर दिया कि नेपाल में कोविड-19 के मामले उन लोगों की वजह से बढ़ रहे हैं जो भारत से वापस लौटे हैंसूत्रों ने एनडीटीवी को बताया कि नेपाल के नक्शे को भारतीय क्षेत्र में ले जाने का लालच उसके प्रधानमंत्री के घरेलू एजेंडे को दर्शाता है और इस पर बातचीत शुरू करने के लिए अब उन पर हमला हो रहा है। नेपाल ने ब्रिटिश काल के दौरान ईस्ट इंडिया कंपनी के साथ हुई एक संधि के तहत, चीन के साथ सीमा को छूने वाली भूमि पर दावा किया हैसूत्रों ने एनडीटीवी को बताया कि नेपाल के नक्शे को भारतीय क्षेत्र में ले जाने का लालच उसके प्रधानमंत्री के घरेलू एजेंडे को दर्शाता है और इस पर बातचीत शुरू करने के लिए अब उन पर हमला हो रहा है। नेपाल ने ब्रिटिश काल के दौरान ईस्ट इंडिया कंपनी के साथ हुई एक संधि के तहत, चीन के साथ सीमा को छूने वाली भूमि पर दावा किया है. 
उन्होंने कहा कि यह दावा एकदम गलत है. (भाषा से भी इनपुट )

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