NDTV Khabar

गंगा की स्थिति से NGT नाराज, कहा - 'सिगरेट के पैकेट की तरह क्यों नहीं दी जा सकती हानिकारक होने की चेतावनी'

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने गंगा नदी की स्थिति पर नाराजगी जताते हुए कहा कि हरिद्वार से उत्तर प्रदेश के उन्नाव शहर के बीच गंगा का जल पीने और नहाने योग्य नहीं है.

 Share
ईमेल करें
टिप्पणियां
गंगा की स्थिति से NGT नाराज, कहा - 'सिगरेट के पैकेट की तरह क्यों नहीं दी जा सकती हानिकारक होने की चेतावनी'

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने गंगा नदी की स्थिति पर नाराजगी जताई. (फाइल फोटो)

खास बातें

  1. गंगा की स्थिति पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने जताई नाराजगी
  2. हरिद्वार से उन्नाव के बीच गंगा का जल पीने और नहाने योग्य नहीं
  3. लोगों को नदी के जल के प्रभावों के बारे में जानकारी क्यों नहीं दी जाए?
नई दिल्ली: राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने गंगा नदी की स्थिति पर नाराजगी जताते हुए कहा कि हरिद्वार से उत्तर प्रदेश के उन्नाव शहर के बीच गंगा का जल पीने और नहाने योग्य नहीं है. NGT ने कहा कि मासूम लोग श्रद्धापूर्वक नदी का जल पीते हैं और इसमें नहाते हैं, लेकिन उन्हें नहीं पता कि इसका उनके स्वास्थ्य पर बुरा असर हो सकता है. एनजीटी ने कहा, 'मासूम लोग श्रद्धा और सम्मान से गंगा का जल पीते हैं और इसमें नहाते हैं. उन्हें नहीं पता कि यह उनके स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है. अगर सिगरेट के पैकेटों पर यह चेतावनी लिखी हो सकती है कि यह 'स्वास्थ्य के लिए घातक' है, तो लोगों को (नदी के जल के) प्रतिकूल प्रभावों के बारे में जानकारी क्यों नहीं दी जाए'?

यह भी पढ़ें : एनजीटी ने कहा, 100 करोड़ भारतीयों के लिए सम्मानीय गंगा नदी की हालत खराब

एनजीटी प्रमुख एके गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, 'हमारा नजरिया है कि महान गंगा के प्रति अपार श्रद्धा को देखते हुए, मासूस लोग यह जाने बिना इसका जल पीते हैं और इसमें नहाते हैं कि जल इस्तेमाल के योग्य नहीं है. गंगाजल का इस्तेमाल करने वाले लोगों के जीवन जीने के अधिकार को स्वीकार करना बहुत जरूरी है और उन्हें जल के बारे में जानकारी दी जानी चाहिए.'

VIDEO: गंगा के लिए अनशन पर स्वामी सानंद


टिप्पणियां
एनजीटी ने राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन को सौ किलोमीटर के अंतराल पर डिस्प्ले बोर्ड लगाने का निर्देश दिया ताकि यह जानकारी दी जाए कि जल पीने या नहाने लायक है या नहीं. एनजीटी ने गंगा मिशन और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को दो सप्ताह के भीतर अपनी वेबसाइट पर एक मानचित्र लगाने का निर्देश दिया, जिसमें बताया जा सके कि किन स्थानों पर गंगा का जल नहाने और पीने लायक है. 

(इनपुट : भाषा)


Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे...

Advertisement