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उत्तराखंड में गंगा किनारे राफ्टिंग कैंप साइट को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने दी इजाजत

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उत्तराखंड में गंगा किनारे राफ्टिंग कैंप साइट को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने दी इजाजत

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने दी राफ्टिंग कैंप साइट के लिए इजाजत

खास बातें

  1. कोर्ट ने नदी से 100 मीटर की दूरी की शर्त जारी रखी है
  2. शिवपुरी-ऋषिकेश के बीच 33 साइट के लिए मांगी थी इजाजत
  3. पहले बन गए थे अंधाधुंध कैंप
नई दिल्ली: नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल यानी एनजीटी ने गुरुवार को उत्तराखंड में गंगा के किनारे बीच राफ्टिंग कैंप साइट (जहां कैंप लगाये जाते हैं) को इजाज़त दे दी है, लेकिन कोर्ट ने नदी से 100 मीटर की दूरी की शर्त जारी रखी है. उत्तराखंड सरकार और वाइल्ड लाइफ इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया यानी डब्लू आईआई ने शिवपुरी और ऋषिकेश के बीच 33 साइट के लिए इजाज़त मांगी थी जिसमें से 25 को ग्रीन ट्रिब्यूनल की इजाज़त मिल गई है, हालांकि कोर्ट ने उन आठ कैंप साइट्स को इजाज़त नहीं दी है, जो 100 मीटर के दायरे में थे.

कोर्ट ने 2015 के दिसंबर में कैंप बीच साइट्स पर एक याचिका के बाद रोक लगाई थी. याचिकाकर्ता विक्रांत तोंगड ने कहा कि "पिछले कई सालों में ऋषिकेश और शिवपुरी के बीच 200 से अधिक राफ्टिंग बीच कैंप बन गए थे, जिससे पर्यावरण को बहुत नुकसान हो रहा था क्योंकि किसी गाइडलाइन का पालन नहीं हो रहा था. यह इलाका राजाजी नेशनल पार्क से लगा है और अनियंत्रित कैंपों से वन्य जीवों खासतौर से हाथियों के बसेरे मनें काफी दखलंदाज़ी हो रही थी."

कोर्ट से अपील की गई थी कि नदी किनारे अंधाधुंध कैंप होने से कूड़ा-कचरा इकट्ठा हो रहा है और नदी को डंपिंग यार्ड बना दिया गया है. इस के बाद अब कोर्ट ने नदी किनारे प्लास्टिक के इस्तेमाल पर भी पूरी रोक लगा दी है.

कोर्ट के सामने मामला पहुंचने पर एक्सपर्ट राय लेने को कहा गया था जिसके बाद वाइल्ड लाइफ इंट्टिट्यूट ऑफ इंडिया और उत्तराखंड सरकार ने इन 33 जगहों की पहचान की जिसमें से 25 को एनजीटी ने इजाज़त दी.


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