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आतंकवाद की जांच करने वाली एजेंसी NIA संशोधन बिल में ऐसा क्या है जिस पर अमित शाह और ओवैसी में हुई तीखी नोंकझोंक, 10 बातें

सोमवार को लोकसभा में एनआईए (NIA)यानी राष्ट्रीय जांच एजेंसी संशोधन बिल पास हो गया है. इस विधेयक में दिए गए प्रावधानों के मुताबिक अब आतंकवाद मामलों की जांच करने वाली देश की सबसे बड़ी एजेंसी एनआईए भारत के बाहर किसी भी गंभीर अपराध के मामले में केस रजिस्टर और जांच का निर्देश दे सकती है.

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आतंकवाद की जांच करने वाली एजेंसी  NIA संशोधन बिल में ऐसा क्या है जिस पर अमित शाह और ओवैसी में हुई तीखी नोंकझोंक, 10 बातें

गृह मंत्री अमित शाह और ओवैसी में जमकर नोंकझोंक हुई

नई दिल्ली: सोमवार को लोकसभा में एनआईए (NIA)यानी राष्ट्रीय जांच एजेंसी संशोधन बिल पास हो गया है. इस विधेयक में दिए गए प्रावधानों के मुताबिक अब आतंकवाद मामलों की जांच करने वाली देश की सबसे बड़ी एजेंसी एनआईए भारत के बाहर किसी भी गंभीर अपराध के मामले में केस रजिस्टर और जांच का निर्देश दे सकती है. अब इस बिल को राज्यसभा में लाया जाएगा जहां इसको पास करना सरकार के सामने चुनौती होगी.इस बिल पर चर्चा के दौरान एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी और गृहमंत्री अमित शाह के बीच तीखी नोंकझोंक भी हुई. पहले विधेयक को विचार करने के लिए सदन में रखे जाने के मुद्दे पर एआईएमआईएम के असदुद्दीन ओवैसी ने मत-विभाजन की मांग की. गृह मंत्री अमित शाह ने भी कहा कि इस पर मत-विभाजन जरूर होना चाहिए. इसकी हम भी मांग करते हैं ताकि पता चल जाए कि कौन आतंकवाद के साथ है और कौन नहीं. मत विभाजन में सदन ने 6 के मुकाबले 278 मतों से विधेयक को पारित किये जाने के लिये विचार करने के वास्ते रखने की अनुमति दे दी.
10 बड़ी बातें
  1. गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी ने कहा कि इस संशोधन विधेयक का मकसद एनआईए अधिनियम को मजबूत बनाना है. आज आतंकवाद बहुत बड़ी समस्या है, देश में ऐसे उदाहरण हैं जब मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री आतंकवाद के शिकार हुए हैं. आतंकवाद आज अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय समस्या है. ऐसे में हम एनआईए को सशक्त बनाना चाहते हैं. 
  2. उन्होंने कहा कि जहां तक एनआईए अदालतों में न्यायाधीशों की नियुक्ति का विषय है तो हम सिर्फ प्रक्रिया को सरल बनाना चाहते हैं. कई बार जज का तबादला हो जाता है, पदोन्न्ति हो जाती है, तब अधिसूचना जारी करना पड़ती है और इस क्रम में दो तीन माह चले जाते हैं. हम इसे रोकना चाहते हैं . उन्होंने स्पष्ट किया कि एनआईए अदालत के जजों की नियुक्ति संबंधित उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ही करते रहेंगे, जिस तरह अभी प्रक्रिया चल रही है.
  3. गृह राज्य मंत्री ने कहा कि आतंकवाद के विषय पर केंद्र सरकार राज्यों के साथ मिलकर काम करेगी. दोनों में तालमेल रहेगा. उन्होंने पाकिस्तान के आतंकवाद से संबंधित समझौते पर दस्तखत करने या नहीं करने के सवाल पर कहा कि पुलवामा और बालाकोट आतंकी हमलों के बाद भारत ने बता दिया है कि आतंकवाद के खिलाफ जांच कैसे होती है.
  4. रेड्डी ने कहा कि कांग्रेस के समय ही एनआईए कानून में कई कानूनों को जोड़ा गया था लेकिन उस समय इस पर ठीक से काम नहीं हुआ और हम संशोधन लेकर इसे उन्नत बना रहे हैं. उन्होंने बताया कि एनआईए ने 272 मामलों में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की. इनमें 52 मामलों में फैसले आये और 46 में दोषसिद्धी हुई. 
  5. रेड्डी ने बताया कि 99 मामलो में आरोपपत्र दाखिल हो चुका है. उन्होंने कहा कि प्रस्तावित विधेयक से एनआईए की जांच का दायरा बढ़ाया जा सकेगा और वह विदेशों में भी भारतीय एवं भारतीय परिसम्पत्तियों से जुड़े मामलों की जांच कर सकेगी जिसे आतंकवाद का निशाना बनाया गया हो. 
  6. उन्होंने कहा कि इसमें मानव तस्करी और साइबर अपराध से जुड़े विषयों की जांच का अधिकार देने की बात भी कही गई है.  
  7. विधेयक के उद्देश्यों एवं कारणों में कहा गया है कि राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण संशोधन विधेयक 2019 उपबंध करता है कि अधिनियम की धारा 1 की उपधारा 2 में नया खंड ऐसे व्यक्तियों पर अधिनियम के उपबंध लागू करने के लिये है जो भारत के बाहर भारतीय नागरिकों के विरूद्ध या भारत के हितों को प्रभावित करने वाला कोई अनुसूचित अपराध करते हैं. 
  8. अधिनियम की धारा 3 की उपधारा 2 का संशोधन करके एनआईए के अधिकारियों की वैसी शक्तियां, कर्तव्य, विशेषाधिकार और दायित्व प्रदान करने की बात कही गई है जो अपराधों के अन्वेषण के संबंध में पुलिस अधिकारियों द्वारा न केवल भारत में बल्कि भारत के बाहर भी प्रयोग की जाती रही है.
  9. इसमें भारत से बाहर किसी अनुसूचित अपराध के संबंध में एजेंसी को मामले का पंजीकरण और जांच का निर्देश देने का प्रावधान किया गया है.
  10. इसमें कहा गया है कि केंद्र सरकार और राज्य सरकारें अधिनियम के अधीन अपराधों के विचारण के मकसद से एक या अधिक सत्र अदालत, या विशेष अदालत स्थापित करें. 

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