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राज्यसभा में भी पास हुआ NIA संशोधन विधेयक, गृहमंत्री ने कहा - नहीं होगा कानून का दुरुपयोग

अमित शाह ने यह भी भरोसा जताया कि विश्व में जहां पर भी भारतीयों के खिलाफ आतंकवाद का अपराध होगा, एनआईए उससे निबटने में सक्षम है.

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राज्यसभा में भी पास हुआ NIA संशोधन विधेयक, गृहमंत्री ने कहा - नहीं होगा कानून का दुरुपयोग

राज्यसभा में पास हुआ एनआईए बिल, अमित शाह ने दिया सवालों का जवाब

नई दिल्ली:

विदेशों में आतंकवादी घटनाओं में भारतीय नागरिकों के प्रभावित होने की स्थिति में एनआईए को मामला दर्ज कर अन्य देशों में जाकर जांच करने का अधिकार देने वाले एक महत्वपूर्ण विधेयक को संसद ने बुधवार को अपनी मंजूरी दे दी. राज्यसभा में भी इस विधेयक को पारित कर दिया गया. बता दें कि लोकसभा में यह विधेयक पहले ही पेश और पारित किया जा चुका था. इस विधेयक के पारित होने पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने आश्वासन दिया कि वह इस कानून का किसी तरह से भी दुरुपयोग नहीं होने देंगे. राज्यसभा में विधेयक पर हुई चर्चा के जवाब में गृह मंत्री ने यह आश्वासन दिया. उन्होंने यह भी भरोसा जताया कि विश्व में जहां पर भी भारतीयों के खिलाफ आतंकवाद का अपराध होगा, एनआईए उससे निबटने में सक्षम है. उच्च सदन ने गृह मंत्री के जवाब के बाद ‘राष्ट्रीय अन्वेषण अधिकरण संशोधन विधेयक 2019' को सर्वानुमति से पारित कर दिया. लोकसभा इसे पहले ही पारित कर चुकी है.

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हालांकि, गृहमंत्री के जवाब से पहले वाम दलों ने इस विधेयक को प्रवर समिति में भेजने की मांग करते हुए सदन से वाक आउट किया. इससे पहले शाह ने सदस्यों से कहा कि सदन में ऐसी बातें नहीं करनी चाहिए जिससे राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की साख कम हो. उन्होंने सदन को आश्वासन दिया कि मोदी सरकार इस कानून का कतई दुरुपयोग नहीं होने देगी. उन्होंने कहा कि विदेश में कहीं भी आतंकवादी घटनाओं में भारतीय नागरिक हताहत होते हैं, हमारे दूतावास प्रभावित होते हैं, जानमाल को नुकसान होता है, हमारे पास कानूनी कार्रवाई का अधिकार नहीं है. हमारे अधिकारी वहां जाते हैं तो पूछा जाता है कि आपके पास कानून कहां है, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा.

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अमित शाह ने राजनीति के लिए एनआईए को निशाना बनाने की प्रवृत्ति के प्रति आगाह करते हुए कहा कि इतने संवेदनशील मुद्दे पर केवल राजनीति के लिए एजेंसी को नीचा लाया (दिखाया) जाए और दुनिया के सामने इसकी साख को कम किया जाये, मुझे लगता है कि यह ठीक नहीं होगा. एनआईए के कामकाज की दक्षता का जिक्र करते हुए कहा कि 2014 से 17 जुलाई 2019 तक कुल 195 मामले दर्ज किए गये. इनमें से 129 मामलों में आरोपपत्र दाखिल किए गये. ऐसे 44 मामलों में अभियोजन पक्ष ने अपना काम पूरा किया और अदालत के फैसले आ गये हैं.

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41 मामलों में दोषियों को सजा हुई. इनमें 184 आरोपियों को दोषी ठहराया गया. ये सारे आतंकवादी गतिविधियों से जुड़े मामले थे. उन्होंने कहा कि समझौता विस्फोट मामले का जिक्र करते हुए कहा पूर्व की संप्रग सरकार के शासनकाल में दाखिल किया गया आरोपपत्र इतना कमजोर था और उसमें साक्ष्यों की इतनी कमी थी कि सारे आरोपियों को अदालत को छोड़ना पड़ गया. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इसमें राजनीतिक बदले की भावना से काम किया गया.

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गृह मंत्री ने कहा कि समझौता ट्रेन विस्फोट मामले में अगस्त 2012 को जब आरोपपत्र दाखिल किया गया था, उस समय केन्द्र में संप्रग की सरकार थी. सजा होना, न होना आरोपपत्र पर निर्भर होता है। उन्होंने कहा कि इस मामले में कोई सबूत नहीं था और कोरी राजनीतक बदले की भावना के साथ यह मामला दर्ज किया गया था. (इनपुट भाषा से) 



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