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निर्भया के दोषियों ने 23 बार तोड़े जेल के नियम, एक लाख से ज्यादा कमाया मेहनताना- सूत्र

विनय को जेल के नियमों को तोड़ने के लिए 11 बार सजा मिली है, जबकि अक्षय को एक बार सजा दी गई थी. वहीं मुकेश ने तीन बार और पवन ने आठ बार नियमों को तोड़ा.

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नई दिल्ली:

निर्भया गैंगरेप केस के चार दोषियों जिन्हें एक सप्ताह बाद फांसी होनी है, उन्होंने पिछले सात साल तिहाड़ जेल में रहते हुए 1,37,000 रुपये मेहनताना कमया है. यह जानकारी देते हुए सूत्रों ने यह भी बताया कि उन्होंने 23 बार नियमों का उल्लंघन किया. अक्षय ठाकुर सिंह, मुकेश, पवन गुप्ता और विनय कुमार को साल 2012 में दिल्ली में एक मेडिकल छात्रा के साथ गैंगरेप करने और हत्या के मामले में दोषी ठहाराया गया था. इन्हें 22 जनवरी को सुबह 7 बजे फांसी पर लटकाया जाएगा. हालही दिल्ली की कोर्ट ने इनके खिलाफ डेथ वारंट जारी किया था. 

विनय को जेल के नियमों को तोड़ने के लिए 11 बार सजा मिली है, जबकि अक्षय को एक बार सजा दी गई थी. वहीं मुकेश ने तीन बार और पवन ने आठ बार नियमों को तोड़ा. पिछले सात वर्षों में मुकेश ने मजदूरी करने से मना कर दिया था. जबकि अक्षय ने मेहनताना के तौर पर 69,000 रुपये, पवन ने 29 हजार और विनय ने 39 हजार रुपये कमाए.

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साल 2016 में तीन दोषियों मुकेश, पवन और अक्षय ने 10वीं कक्षा में एडमिशन लिया, लेकिन वे एग्जाम पास नहीं कर पाए. विनय ने साल 2015 में स्नातक में प्रवेश लिया, लेकिन वह अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर पाया. दोषियों के परिजनों को फांसी से पहले दो बार मिलने की अनुमति दी गई है. विनय सबसे ज्यादा बेचैन दिख रहा है. उसके पिता मंगलवार को उससे मिलने आए थे. 

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वहीं, निर्भया की मां ने मंगलवार को कहा कि उन्हें पूरा यकीन था कि दोषियों की सुधारात्मक याचिका खारिज हो जाएगी और उन्हें यकीन है कि चारों को 22 जनवरी को फांसी जरूर होगी. उच्चतम न्यायालय द्वारा फांसी की सजा पाने वाले चार दोषियों में से दो की ओर से दायर सुधारात्मक याचिका खारिज किए जाने के बाद पीड़िता की मां ने यह बात कही. उन्होंने कहा, ‘सुधारात्मक याचिकाएं खारिज होनी ही थी. वह तीसरी बार उच्चतम न्यायालय पहुंचे थे. वह चाहे कोई याचिका दायर करें , हम लड़ने के लिए तैयार हैं. हमें लगता है कि उन्हें 22 जनवरी को फांसी होगी. हम चाहते हैं कि ऐसा हो.'

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इस घृणित अपराध के छह में से चार दोषियों विनय शर्मा, मुकेश कुमार, अक्षय कुमार सिंह और पवन गुप्ता को 22 जनवरी को सुबह सात बजे फांसी पर लटकाने का वारंट निचली अदालत ने जारी कर दिया है. अगर चारों को कहीं से राहत नहीं मिलती है तो तिहाड़ की जेल नंबर तीन में इन्हें फांसी दी जाएगी. इनकी मौत का वारंट सात जनवरी को जारी हुआ. इनमें से दो विनय और मुकेश ने नौ जनवरी को न्यायालय में सुधारात्मक याचिका दायर की थी. न्यायालय द्वारा फांसी रोकने से इंकार करने के बाद मुकेश ने तुरंत राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के समक्ष दया याचिका दायर की है. मुकेश ने मौत का वारंट रद्द करने के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय से अनुरोध किया था. अदालत संभवत: इस अर्जी पर बुधवार को सुनवाई करेगी.

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