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मैंने ऑटोमोबाइल निर्माताओं से कहा, कभी खुशी होती है, कभी गम होता है..... यही जीवन चक्र है : नितिन गडकरी

केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने अर्थव्यवस्था में सुस्ती के दौर के बीच शनिवार को कहा कि उद्योगों को परेशान होने की जरूरत नहीं है क्योंकि मुश्किल समय गुजर जायेगा.  गडकरी ने विदर्भ उद्योग संघ के 65वें स्थापना दिवस पर यहां कहा, 'मुझे पता है कि उद्योग काफी कठिन दौर से गुजर रहे है. हम वृद्धि दर बढ़ाना चाहते हैं.'

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मैंने ऑटोमोबाइल निर्माताओं  से कहा, कभी खुशी होती है, कभी गम होता है..... यही जीवन चक्र है : नितिन गडकरी

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी (फाइल फोटो)

खास बातें

  1. नितिन गडकरी को भरोसा
  2. 'बुरा वक्त निकल जाएगा'
  3. 'कभी खुशी होती है, कभी गम होता है'
नई दिल्ली:

केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने अर्थव्यवस्था में सुस्ती के दौर के बीच शनिवार को कहा कि उद्योगों को परेशान होने की जरूरत नहीं है क्योंकि मुश्किल समय गुजर जायेगा.  गडकरी ने विदर्भ उद्योग संघ के 65वें स्थापना दिवस पर यहां कहा, 'मुझे पता है कि उद्योग काफी कठिन दौर से गुजर रहे है. हम वृद्धि दर बढ़ाना चाहते हैं.' उन्होंने कहा कि हाल ही में वह ऑटोमोबाइल निर्माताओं से मिले थे और वे कुछ चिंतित थे. उन्होंने कहा, 'मैंने उनसे कहा, कभी खुशी होती है, कभी गम होता है. कभी आप सफल होते हैं और कभी आप असफल होते हैं. यही जीवन चक्र है.' वहीं दूसरी ओर  वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने सुस्त पड़ती अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिये शनिवार को बाजार प्रोत्साहन के उपायों की तीसरी किस्त की घोषणा की. इसमें रीयल एस्टेट तथा निर्यात क्षेत्रों को कुल मिला कर 70 हजार करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय मदद देने की योजनाएं शामिल हैं.

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इनमें अधूरी आवास परियोजनाओं को पूरा करने के लिये वित्तपोषण मुहैया कराने हेतु एक कोष की स्थापना जैसी योजनाओं के लिये 30 हजार करोड़ रुपये के खर्च की योजनाएं भी शामिल हैं. सरकार ने यह कदम ऐसे समय उठाया है जब आर्थिक वृद्धि दर की रफ्तार कम होकर छह साल के निचले स्तर पर आ गयी है. वित्तमंत्री की इस घोषणा का देश के उद्योग संगठनों, रीयल एस्टेट कंपनियों और निर्यातकों ने स्वागत किया है. सीतारमण ने राजधानी में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि निर्माण के आखिरी चरण में पहुंच चुकी साफ-सुथरी आवासीय परियोजनाओं को पूरा कराने में वित्तीय मदद के लिए 20 हजार करोड़ रुपये का कोष बनाया जाएगा. इसमें करीब 10 हजार करोड़ रुपये सरकार मुहैया कराएगी तथा इतनी ही राशि अन्य स्रोतों से जुटायी जाएगी. इस योजना का लाभ उन्हीं परियोजनाओं को मिलेगा जो एनपीए घोषित नहीं हैं और न ही उनको ऋण समाधान के लिए एनसीएलटी के सुपुर्द किया गया है. 

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सरकार ने इससे पहले वाहन क्षेत्र की मदद, पूंजीगत लाभ कर में कमी और गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के लिए अतिरिक्त नकदी की सहायता जैसे उपायों की घोषणा की थी. अर्थव्यवस्था में निवेश को गति देने के लिए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के नियमों को अधिक उदार बनाने और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के आपस में विलय के जरिए बड़े बैंक स्थापित करने के भी फैसले किए गए हैं. सरकार राजकोषीय स्थिति का नये सिरे से आकलन कर रही है, यह पूछे जाने पर सीतारमण ने कहा, 'यह (पांच प्रतिशत की वृद्धि दर) एक तिमाही की बात है लेकिन इसके बाद निश्चित ही हम इसपर गौर करने वाले हैं जो मैंने बजट में कहा उसके साथ इसका मिलान करने वाले हैं..और हम यह तय करेंगे कि हम किस जगह और किस स्तर पर हैं.' वित्त मंत्री ने इस बात पर बल दिया कि वह वृद्धि दर के गिरकर पांच प्रतिशत पर आने की बात की कोई उपेक्षा नहीं कर रही हैं.

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(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)


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