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अब इस बड़े मुद्दे पर भी नीतीश कुमार और लालू यादव की राहें जुदा...

राष्ट्रपति चुनाव में एनडीए समर्थित उम्मीदवार रामनाथ कोविंद को समर्थन देने को लेकर महागठबंधन में उपजा विवाद अभी पूरी तरह शांत भी नहीं हो पाया था कि एक और अहम मुद्दे पर नीतीश कुमार और लालू यादव एकराय नहीं है.

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अब इस बड़े मुद्दे पर भी नीतीश कुमार और लालू यादव की राहें जुदा...

दोनों पार्टियों के बीच एक बार फिर से जुबानी जंग देखने को मिल सकती है...

खास बातें

  1. महागठबंधन में उपजा विवाद अभी पूरी तरह शांत भी नहीं हो पाया
  2. जीएसटी समारोह में लालू यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल भाग नहीं लेगी
  3. जीएसटी लॉन्च समारोह में शामिल होगी जनता दल यूनाइटेड
नई दिल्ली: राष्ट्रपति चुनाव में एनडीए समर्थित उम्मीदवार रामनाथ कोविंद को समर्थन देने को लेकर महागठबंधन में उपजा विवाद अभी पूरी तरह शांत भी नहीं हो पाया था कि एक और अहम मुद्दे पर नीतीश कुमार और लालू यादव एकराय नहीं है. यह अहम मसला है जीएसटी लॉन्च समारोह का. शुक्रवार को आधी रात को जीएसटी समारोह में लालू यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल भाग नहीं लेगी लेकिन नीतीश की पार्टी इस समारोह का हिस्सा बनेगी. ऐसे में दोनों पार्टियों के बीच एक बार फिर से जुबानी जंग देखने को मिल सकती है.   

नीतीश कुमार के कार्यालय की ओर से कहा गया है कि वह जीएसटी का समर्थन करेंगे. इतनी ही नहीं, यूपीए शासनकाल में भी जेडीयू जीएसटी के पक्ष में थी. गौरतलब है कि कई विपक्षी पार्टियों ने शुक्रवार रात संसद में आयोजित होने वाले जीएसटी समारोह का बहिष्कार कर दिया है. इस समारोह में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को आमंत्रित किया गया था लेकिन कांग्रेस के समारोह में शामिल न होने से वे भी इसमें हिस्सा नहीं लेंगे. कांग्रेस का कहना है कि व्यापारी अभी इस बड़े कर सुधार के लिए पूरी तरह से तैयार नहीं है और इसलिए सरकार को इसका क्रियान्वयन फिलहाल टाल देना चाहिए. कांग्रेस का यह भी कहना है कि जीएसटी समारोह संसद की गरिमा के खिलाफ है. 
 
विपक्षी पार्टियों से उलट सराकार के कदम का समर्थन करके नीतीश कुमार ने एक बार फिर अपनी गठबंधन पार्टियों से हटकर निर्णय लिया है. इससे पहले उन्होंने राष्ट्रपति चुनाव के लिए बीजेपी समर्थित उम्मीदवार रामनाथ कोविंद का समर्थन करके आरजेडी और कांग्रेस को असहज कर दिया था. इस मामले का सबसे रोचक पहलू यह था कि नीतीश कुमार ने ही राष्ट्रपति चुनाव के लिए विपक्ष का उम्मीदवार खड़ा करने की वकालत की थी. इस सिलसिले में उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी से मुलाकात भी की थी. 17 विपक्षी पार्टियां एकजुट हो गई थीं लेकिन इससे पहले वे अपने संयुक्त उम्मीदवार की घोषणा करते, नीतीश ने पाला बदलकर सबको हैरान कर दिया. नीतीश कुमार द्वारा रामनाथ कोविंद का समर्थन करने की घोषणा करने के बाद बिहार महागठबंधन में शामिल आरजेडी और कांग्रेस ने उनके इस कदम को ऐतिहासिक भूल करार दिया था. इसके जवाब में नीतीश कुमार ने कहा था कि बीजेपी ने पर्याप्त समर्थन जुटा लिया है.  

गौरतलब यह भी 2013 में जेडीयू सुप्रीमो नीतीश कुमार ने बीजेपी से अपने 13 साल पुराने गठबंधन को तोड़कर लालू से नाता जोड़ लिया था. जेडीयू ने पीएम मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाए जाने की मुखालफत करते हुए गठबंधन तोड़ा था. हालांकि, पिछले छह माह के दौरान उन्होंने कई मौकों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फैसलों की तारीफ की है. जानकारों का कहना है कि नीतीश 2019 के लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए बीजेपी से नजदीकियां बढ़ा रहे हैं क्योंकि वे जानते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी को हराना बहुत ही मुश्किल होगा.  


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