चीन के निवेश को मंजूरी नहीं देने की फिलहाल कोई योजना नहीं है : गृह मंत्रालय

केन्द्रीय गृह मंत्रालय के सलाहकार अशोक प्रसाद ने एनडीटीवी इंडिया से कहा, "भारत ऐसे पहलुओं पर समझदारी से काम लेगा."

चीन के निवेश को मंजूरी नहीं देने की फिलहाल कोई योजना नहीं है : गृह मंत्रालय

नई दिल्‍ली:

चीन ने बेशक मानसरोवर यात्रियों के लिए नाथुला पास बंद कर दिया हो लेकिन व्यापार चल रहा है. केंद्रीय गृह मंत्रालय के एक वरिष्‍ठ अफ़सर का कहना है, "व्यापार अभी चल रहा है, उस पर कोई रोक नहीं लगाई गई है." वैसे भारत सरकार का कहना है कि दोनों देशों के बीच तनाव के चलते जो सिक्योरिटी कलीरेनस केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा सिया जाता है उस पर कोई रोक नहीं लगाई जाएगी.

केन्द्रीय गृह मंत्रालय के सलाहकार अशोक प्रसाद ने एनडीटीवी इंडिया से कहा, "भारत ऐसे पहलुओं पर समझदारी से काम लेगा." लेकिन  चीनी कंपनियों को जिस उदारता से सिक्योरिटी क्लीयरेंस पहले दिया जाता रहा है इस बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया.

वैसे मंत्रालय ने ये भी साफ़ किया कि अभी तक चीन की कंपनियों पर अतिरिक्त निगरानी की कोई योजना तो नहीं है, लेकिन मौजूदा रिश्ते और बिगड़ते हैं तो चीन से होने वाले निवेश को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतने से भारत परहेज नहीं करेगा.

दरअसल ये सवाल अब पूछा जाने लगा है कि अगर चीन और भारत के बीच तनाव बढ़ रहा है तो भारत क्यों आर्थिक तौर पर कुछ क़दम नहीं उठता. साथ ही ये भी कि क्या चीन के बढ़ते दबाव को देखते हुए भारत सरकार यहां भारी भरकम निवेश करने वाली चीनी कंपनियों पर नकेल कसने की रणनीति अख्तियार करेगी? या क्या अगर दोनों देशों के बीच कोई युद्ध जैसी स्थिति पैदा होती है तो इसका असर यहां निवेश कर चुकी चीनी कंपनियों पर भी पड़ेगा?

चीनी कंपनियों के निवेश के सिक्योरिटी क्लीयरेंस पर फ़ैसला केन्द्रीय गृह मंत्रालय एजेंसियों की रिपोर्ट के आधार पर लेता है. वैसे दो दिन पहले ही चीन की सरकारी मीडिया ने अपनी कंपनियों को सावधान किया था कि वे भारत में निवेश करने को लेकर सावधान रहें क्योंकि अगर हालात बिगड़ते हैं तो उनके हितों पर असर पड़ सकता है.

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चीन पिछले डेढ़ दशक में भारत के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में शामिल हो चुका है. दोनों देशों के बीच पिछले वर्ष तकरीबन 75 अरब डॉलर का कारोबार हुआ. हालांकि इसका बड़ा हिस्सा चीन के पक्ष में ही रहा है. चूंकि भारत चीन को निर्यात के मुकाबले 50 अरब डॉलर का आयात ज्यादा करता है. पिछले 3-4 वर्षों से चीन की कंपनियों ने भारत में निवेश बढ़ाना भी शुरू कर दिया है. वर्ष 2015 में चीन की कंपनियों ने भारत के विभिन्न क्षेत्रों में 20 अरब डॉलर का निवेश करने की योजना बनाई है.

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चीन की कई टेलीकॉम कंपनियां भारत में मैन्यूफैक्चरिंग इकाई लगा चुकी हैं. इसके अलावा, सरकार के पास दर्जन भर चीनी कंपनियों के निवेश के प्रस्ताव विभिन्न स्तर पर हैं.