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चुनाव आयोग ने राज्यसभा चुनाव में NOTA के इस्तेमाल को लेकर सुप्रीम कोर्ट में लिखित जवाब दाखिल किया

चुनाव आयोग ने राज्यसभा चुनाव में NOTA के इस्तेमाल को लेकर सुप्रीम कोर्ट में लिखित जवाब दाखिल किया.

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चुनाव आयोग ने राज्यसभा चुनाव में NOTA के इस्तेमाल को लेकर सुप्रीम कोर्ट में लिखित जवाब दाखिल किया

प्रतीकात्मक फोटो.

नई दिल्ली: चुनाव आयोग ने राज्यसभा चुनाव में NOTA के इस्तेमाल को लेकर सुप्रीम कोर्ट में लिखित जवाब दाखिल किया. चुनाव आयोग ने कहा कि यह कदम आयोग ने संज्ञान लेकर नहीं किया, बल्कि उसे सुप्रीम कोर्ट के ही आदेश के तहत किया है. चुनाव आयोग ने इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के 2013 के फैसले का पालन करते हुए राज्यसभा चुनाव में NOTA का इस्तेमाल करना शुरू किया था.

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चुनाव आयोग अगर राज्यसभा चुनाव में NOTA का इस्तेमाल शुरू करता है तो यह अदालती आदेश की अवहेलना और अदालत की अवमानना का मामला बनता है. 2013 के आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि जिस तरह हर मतदाता को वोट डालने का अधिकार है उसी तरह उसे किसी को भी वोट नहीं देने का अधिकार भी है. सुप्रीम कोर्ट का आदेश सभी चुनाव को लेकर है और ये प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष दोनों तरह के चुनाव पर लागू होगा. चुनाव आयोग ने कहा है कि अगर सुप्रीम कोर्ट 2013 के आदेश की अलग तरीके से व्याख्या करता है तो आयोग उसे उसी भावना में लागू करने को तैयार है.

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वकील अमित शर्मा के माध्यम से दाखिल इस जवाब में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश जनप्रतिनिधि अधिनियम के तहत राज्यों की काउंसिल के चुनाव पर भी लागू होगा. इससे पहले 30 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर फैसला सुरक्षित रख लिया था कि राज्यसभा चुनाव में NOTA का इस्तेमाल होगा या नहीं. उधर, गुजरात कांग्रेस की याचिका पर सुनवाई पूरी चुकी है, जिसमें कांग्रेस के साथ NDA सरकार ने भी राज्यसभा चुनाव में NOTA का विरोध किया है. सुनवाई के दौरान CJI दीपक मिश्रा ने कहा कि राज्यसभा चुनाव पहले से ही उलझन भरे हैं. चुनाव आयोग इन्हें क्यों और जटिल बनाना चाहता है? कानून किसी विधायक को NOTA के इस्तेमाल की इजाजत नहीं देता, लेकिन इस नोटिफिकेशन के जरिए चुनाव आयोग MLA के वोट ना डालने का अधिकार दे रहा है जबकि ये उसका संवैधानिक दायित्व है तो वह NOTA का रास्ता इस्तेमाल नहीं कर सकता. हमें इस पर संदेह है कि NOTA के जरिए किसी विधायक को उम्मीदवार को वोट डालने से रोका जा सकता है.

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वहीं जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि बैलेट बॉक्स में डालने से पहले कोई विधायक बैलेट पेपर को क्यों दिखाए? मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने गुजरात कांग्रेस के चीफ व्हिप शैलेश मनुभाई परमार की याचिका का समर्थन करते हुए कहा कि नोटा का इस्तेमाल राज्यसभा चुनाव के दौरान नही किया जाना चाहिए. केंद्र सरकार ने कहा कि नोटा का इस्तेमाल वहीं होगा जहां प्रतिनिधि जनता के द्वारा सीधे चुने जाते हैं, लेकिन राज्यसभा में इसका इस्तेमाल नहीं हो सकता क्योंकि यहां प्रतिनिधि प्रत्यक्ष तौर पर नही चुने जाते.

इससे पहले चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में जवाब दाखिल कर कहा कि राज्यसभा चुनाव में NOTA, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक है और ये प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों ही चुनावों पर लागू होता है. चुनाव आयोग ने अपने हलफनामें में ये भी कहा कि NOTA के खिलाफ गुजरात कांग्रेस की याचिका अदालती कार्रवाई का दुरुपयोग है. NOTA राज्यसभा चुनाव में 2014 से जारी है, जबकि कांग्रेस ने 2017 में चुनौती दी. 2014 से अब तक गुजरात समेत 25 राज्यसभा चुनाव NOTA से हो चुके हैं. 


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