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पिछले तीन सालों में ‘प्रवासी मतदाताओं’’ की संख्या में दोगुनी बढ़ोत्तरी

हालांकि यह आंकड़ा विदेशों में रहने वाले भारतीयों की संख्या की तुलना में काफी कम है.

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पिछले तीन सालों में ‘प्रवासी मतदाताओं’’ की संख्या में दोगुनी बढ़ोत्तरी

फाइल फोटो

नई दिल्ली: सरकार एवं चुनाव आयोग के ताजा आंकड़ों के अनुसार पिछले तीन वर्षों में प्रवासी भारतीयों (एनआरआई) के ‘‘प्रवासी मतदाताओं’’ के तौर पर खुद को पंजीकृत कराए जाने की संख्या में दो गुना बढ़ोतरी हुई है. हालांकि यह आंकड़ा विदेशों में रहने वाले भारतीयों की संख्या की तुलना में काफी कम है. सेवा मतदाताओं की तर्ज पर भारतीय चुनावों में एनआरआई द्वारा परोक्ष मतदान करने संबंधी अधिकार बढ़ाए जाने के लिए सरकार द्वारा लोकसभा में संबंधित विधेयक पेश किये जाने के मद्देनजर इस मुद्दे पर फिर से बहस हो रही है.

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विधेयक के अनुसार भारत आकर मतदान करने के आवश्यक प्रावधान के कारण प्रवासी भारतीयों को ‘‘कठिनाई’’ होती है. इस समय विदेश में रहने या काम करने वाले एनआरआई, जिन्होंने अपनी नागरिकता नहीं छोड़ी है, भारत आकर उन निर्वाचन क्षेत्रों में वोट डाल सकते हैं जहां वे पंजीकृत हैं.

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इसका मतलब है कि पहले उन्हें खुद को मतदाता के रूप में पंजीकृत कराना पड़ेगा और इसके बाद चुनाव के दिन मतदान करने के लिए भारत आने के लिए लम्बी उड़ान लेनी होगी. कई एजेंसियों की रिपोर्ट के अनुसार मई 2012 तक 10037761 एनआरआई थे और 2014 चुनाव के लिए 11,846 लोगों ने ही ‘‘प्रवासी मतदाताओं’’ के तौर पर पंजीकरण किया. इनमें से 11,140 पुरुष और 706 महिलाएं थीं.

 


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