6 महीने से घाटी में तैनात NSG कमांडो नहीं ले पाए एक भी ऑपरेशन में हिस्सा, वजह- गृह मंत्रालय ने भूमिका ही नहीं बताई

बीते छह महीने से NSG की एक टुकड़ी कशमीर में तैनात है, लेकिन अभी तक उन्हें किसी ऑपरेशन में हिस्सा लेने की इजाज़त ही नहीं मिली.

6 महीने से घाटी में तैनात NSG कमांडो नहीं ले पाए एक भी ऑपरेशन में हिस्सा, वजह- गृह मंत्रालय ने भूमिका ही नहीं बताई

घाटी में 6 महीने से एनएसजी के गार्ड तैनात हैं.

खास बातें

  • घाटी में 6 महीने से तैनात हैं एनएसजी के कमांडो
  • अभी तक एक भी ऑपरेशन में हिस्सा नहीं ले पाए हैं
  • एनएसजी के डीजी इस मसले पर राज्यपाल से मिले हैं
नई दिल्ली :

बीते छह महीने से NSG की एक टुकड़ी कशमीर में तैनात है, लेकिन अभी तक उन्हें किसी ऑपरेशन में हिस्सा लेने की इजाज़त ही नहीं मिली. वजह यह है कि गृह मंत्रालय ने उन्हें बताया ही नहीं कि उनकी भूमिका क्या है. अब NSG के डीजी ने इस मसले पर जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल से मुलाकात की है. साथ ही गृह मंत्रालय से भी कहा है कि उन्हें उनकी भूमिका बताई जाए. दरअसल, जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोवाल ने एनएसजी की टीम लगवाई थी, लेकिन न तो सुरक्षाबलों को यह फैसला रास आया था और न ही राज्यपाल को. अब स्थिति यह है कि NSG के तेज-तर्रार ब्लैक कैट कमांडो कश्मीर घाटी में हैं किसी ऑपरेशन में हिस्सा लेने के इंतजार में बैठे हैं. गौरतलब है कि पिछले छह महीने से NSG के हिट यानी हाउस इंटरेन्शन टीम के 80 जवान हमहामा में तैनात हैं, लेकिन उनको किसी कार्रवाई में हिस्सा लेने नहीं दिया गया है. अब NSG ने गृह मंत्रालय से कहा है कि उसे उसका कार्यक्षेत्र बताया जाए, लेकिन मंत्रालय इसको लेकर हड़बड़ी दिखाने के हक़ में नहीं है. उसकी दलील है कि घाटी में आधा दर्जन फ़ॉर्सेज़ पहले से तैनात हैं. ऐसे मे सुरक्षा ग्रिड को छेड़ना अभी ठीक नहीं है.

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दूसरी तरफ, जबकि एनएसजी के डीजी का कहना है कि राज्य सरकार के आग्रह के बाद ही उनकी टीम वहां गई. गौरतलब है कि इस साल घाटी में आतंकी गतिविधियां हर साल के मुक़ाबले में ज़्यादा रही हैं. केंद्रीय गृह मंत्रालय के मुताबिक़ अब तक 450 आतंकी घटनाएं दर्ज की गई हैं.  जिनमें 230 आतंकी और 85 सुरक्षा कर्मी मारे जा चुके हैं, लेकिन देश की एक एलीट फोर्स बस ट्रेनिंग के काम में लगाई गई है. ऐसे में इस पर सवाल खड़े हो गए हैं. आपको बता दें कि घाटी में जब एनएसजी के जवान तैनात किये गए थे तभी सेना को इस पर ऐतराज था. हालांकि गृह मंत्रालय को उम्मीद थी कि एनएसजी की तैनाती से घाटी में आतंकी घटनाओं पर लगाम लगेगा. साथ ही NSG को भी लाइव मुठभेड़ों से निपटने का अनुभव प्राप्त होगा. गृह मंत्रालय का मानना था कि हाउस इंटरवेंशन की टीम के जरिये ऐसे ऑपरेशन को अंजाम दिया जाएगा, जिससे मरने वालों का आंकड़ा कम किया जाएगा, क्योंकि ये सभी काफी ट्रेंड स्नाइपर्स होते हैं.  

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