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एनएसजी हब हुआ अव्यवस्थाओं का शिकार

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  1. 23 फरवरी 2012 को मुंबई में 21 एकड़ में फैले एनएसजी हब के उद्घाटन के समय दावा किया गया था कि यह हब पश्चिमी भारत में किसी भी आतंकी हमले और प्लेन हाइजैक को मुहतोड़ जवाब देने के लिए बनाया गया है लेकिन कुछ महीनो के भीतर ही बदइंतजामी की पोल खुल गई है।
मुंबई:

23 फरवरी 2012 को मुंबई में 21 एकड़ में फैले एनएसजी हब के उद्घाटन के समय दावा किया गया था कि यह हब पश्चिमी भारत में किसी भी आतंकी हमले और प्लेन हाइजैक को मुहतोड़ जवाब देने के लिए बनाया गया है लेकिन कुछ महीनो के भीतर ही बदइंतजामी की पोल खुल गई है।

इसके उद्घाटन के लिए तत्कालीन गृहमंत्री पी चिदंबरम के साथ-साथ राज्य के मुख्यमंत्री और गृह मंत्री भी आए थे।

मुंबई के इस हब मे रहने वाले कमांडो के खुद के जान के लाले पड़ गए हैं। हब में कमांडो और अधिकारीयों के लिए बनी रिहायशी इमारत मे दरार पड़ गई है।

परिवार की सुरक्षा को देखते हुए इन्हें मुंबई पुलिस के मरोल ट्रेनिंग सेंटर के मेकशिफ्ट इमारत में भेजा गया है।

हब से जुड़े कमांडो बता रहे हैं कि यह हालत सिर्फ रिहायशी इमारत की नहीं है बल्कि कुछ ट्रेनिंग इमारतों में भी दरार की वजह से उनपर होने वाली काउंटर टेरेरिज्म ट्रेनिंग रोक दी गई है।


एनएसजी के मुंबई हब के स्क्वॉड मे 241 कमांडो और अधिकारी हैं। मुंबई युनिट मे विशेष काउंटर हाइजैक के साथ एंटी−टेरर ऑपरेशन कमांडो की तैनाती की गई है। आतंकी ऑपरेशन के दौरान इस्तेमाल होने वाले स्निफर डॉग भी रखे गए हैं।

किसी भी स्पेशल ऑपरेशन के लिए यहां एक हेलीपैड भी बनाया गया है। मुंबई के इस हब मे अंडरग्राउंड फायरिंग रेंज बनाने का भी प्रस्ताव रखा गया था।

दरअसल, मुंबई में एनएसजी के बेस की जरूरत 26/11 आंतकी हमलों के दौरान हुई थी। तब एनएसजी के कमांडो को मनसेरा के बेस से मुंबई आने में काफी वक्त लगा था।

आने वाले वक्त में पश्चिमी भारत में किसी भी आतंकी हमले को नाकाम करने और कमांडो को कम से कम वक्त मे पहुंचाने के लिए ही मुंबई हब बनवाया गया था। एनएसजी का मुंबई हब 56 करोड़ रुपये की लागत नेशनल बिल्डिंग कन्स्ट्रक्शन कॉरपोरेशन ने बनवाया था लेकिन यह हब अपनी उपयोगिता के लिए कम और विवाद के लिए ज्यादा सुर्खियों मे बना रहा।

मुंबई हब बनवाने के दौरान एनएसजी ने लगभग 80 एकड़ जमीन की मांग की थी जिसमें ट्रेनिंग और रिहायशी इमारत बनवाने का प्रस्ताव शामिल था लेकिन एनएसजी की मांग को दरकिनार कर महाराष्ट्र सरकार ने सिर्फ 23 एक़ की जमीन एनएसजी हब बनवाया। वहीं दूसरी ओर आंध्र प्रदेश सरकार ने एनएसजी के लिए 600 एकड़ जमीन दी।

एनएसजी से जुड़े अधिकारी मुंबई के हब के लिए दी गई जमीन के ऊपर से गुजरने वाले पावर ग्रिड के खंभों पर ऐतराज जता रहे थे।  
अधिकारियों के मुताबिक इन खंबो की वजह से हब की सुरक्षा से समझौता किया जा रहा है। इस पावर ग्रिड के खंभों की वजह से चॉपर की नाइट लैंडिंग भी नही करवाई जा सकती। इतना ही नहीं, एनएसजी को अपनी फायर प्रैक्टिस के लिए मुंबई पुलिस पर ही निर्भर रहना पड़ रहा है।

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एनएसजी के जवान एसआरपीएफ के गोरेगांव फायरिंग रेंज पर जाते हैं। साल 2010 में मरोल मे तैनाती के वक्त गंदे पानी की सप्लाई की वजह से कई कमांडो बीमार भी हुए थे।

फिलहाल, एनएसजी ने आईआईटी रुड़की के जानकारों से इमारत में होने वाली दरार का पता लगा लगाकर भविष्य मे उसकी रोकथाम का पता लगाने को कहा है जिसमें एक साल तक का वक्त लग सकता है।



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