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ईवीएम पर अटपटा है कांग्रेस का रुख : जहां बीजेपी जीती, वहां मशीनें गड़बड़ बताईं, लेकिन पंजाब पर चुप्पी

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ईवीएम पर अटपटा है कांग्रेस का रुख : जहां बीजेपी जीती, वहां मशीनें गड़बड़ बताईं, लेकिन पंजाब पर चुप्पी

विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि ईवीएम के साथ छेड़छाड़ की गई है...

नई दिल्ली: कांग्रेस के नेतृत्व में 13 बड़ी पार्टियों ने केंद्रीय निर्वाचन आयोग को औपचारिक रूप से याचिका देकर मांग की है कि गुजरात और हिमाचल प्रदेश में जल्द ही होने वाले विधानसभा चुनावों के दौरान इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) का इस्तेमाल नहीं किया जाए. इन पार्टियों ने आरोप लगाया है कि हालिया विधानसभा चुनाव के दौरान, जिनमें उत्तर प्रदेश भी शामिल था, इन मशीनों से छेड़छाड़ की गई थी.

गौरतलब है कि चुनाव आयोग कह चुका है कि मतदान के लिए इस्तेमाल की जा रही मशीनों से छेड़छाड़ कर उनमें गड़बड़ी नहीं की जा सकती है, लेकिन पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस तथा वामदलों समेत कई पार्टियों के वरिष्ठ नेताओं ने चुनाव आयोग से कहा, "चुनाव आयोग का मानना है कि ये मशीनें टैम्पर-प्रूफ हैं... फूल-प्रूफ तो पेंटागन (अमेरिकी रक्षा मंत्रालय का कार्यालय) भी नहीं है... हमने आयोग से आग्रह किया है कि जब तक सभी पक्षों द्वारा बिना किसी संदेह के ईवीएम की विश्वसनीयता सिद्ध नहीं हो जाती है, हमें पेपर बैलट प्रणाली पर लौट जाना चाहिए..."

कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड - दोनों ही राज्यों में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने सूपड़ा साफ जीत हासिल की थी - के नतीजों को ईवीएम की वजह से गलत बताया, लेकिन उसने पंजाब को लेकर कोई चिंता ज़ाहिर नहीं की, जबकि वही एकमात्र राज्य है, जिसमें पिछले कुछ सालों में कांग्रेस ने जीत हासिल की है. कांग्रेस नेता गुलाम नबी आज़ाद ने चुनाव आयोग से एक घंटे तक बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में कहा, "हालिया वक्त में ईवीएम पर लोगों का भरोसा कम हो गया है, और इसीलिए चुनाव आयोग को बैलट पेपर की तरफ लौट जाना चाहिए..."

ईवीएम के खिलाफ राजनैतिक दलों की यह 'जंग' दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सबसे पहले शुरू की थी, जब उनकी आम आदमी पार्टी को पंजाब में 'भविष्यवाणी' से कहीं कम सीटें हासिल हो पाई थीं. अरविंद केजरीवाल ने यह मांग भी की थी कि दिल्ली में 23 अप्रैल को होने वाले नगर निगम चुनाव ईवीएम के स्थान पर बैलट पेपर के ज़रिये करवाए जाएं. बहरहाल, अरविंद केजरीवाल को चुनाव आयोग से मिलने गए दलों में शुमार होने का न्योता नहीं दिया गया, क्योंकि उन्होंने पंजाब के चुनाव परिणामों पर भी सवालिया निशान लगाया था.

हाल ही में मध्य प्रदेश के भिंड में ईवीएम के एक डेमॉन्स्ट्रेशन के दौरान वोट देने के लिए अलग-अलग पार्टियों के बटन दबाए जाने के बावजूद कागज़ी रसीद बीजेपी के नाम की ही निकली, जिसकी वजह से सभी पार्टियों ने एकजुट होकर विरोध जताने का फैसला किया. डेमॉन्स्ट्रेशन के लिए इस्तेमाल की गई वह मशीन उत्तर प्रदेश से ही लाई गई थी, जहां पिछले माह बीजेपी ने शानदार जीत हासिल की है. हालांकि चुनाव आयोग ने कहा है कि उनकी जांच में मशीन में कोई गड़बड़ी सामने नहीं आई है, और समस्या इसलिए हुई, क्योंकि डेमॉन्स्ट्रेशन से पहले मशीन को री-फॉरमैट नहीं किया गया था.

अरविंद केजरीवाल ने राजस्थान की धौलपुर लोकसभा सीट पर इसी सप्ताहांत हुए उपचुनाव के दौरान भी ईवीएम में समस्या होने का आरोप लगाया. उनकी पार्टी ने कहा है कि राजस्थान में इस्तेमाल की गई मशीनों को दिल्ली नगर निगम चुनाव के इस्तेमाल नहीं किया जा सकता. अरविंद केजरीवाल का दावा है, "मैं आईआईटी से इंजीनियर हूं, और छेड़छाड़ और खराब मशीन में अंतर को समझता हूं..." उन्होंने ने चुनाव आयोग पर ईवीएम के खिलाफ मिल रही शिकायतों को नज़रअंदाज़ करने और बीजेपी की मदद करने का आरोप लगाते हुए यहां तक कहा, "चुनाव आयोग धृतराष्ट्र की तरह बर्ताव कर रहा है, जो अपने पुत्र दुर्योधन (बीजेपी) को किसी भी तरह सत्ता में लाना चाहता है..."

सोमवार को चुनाव आयोग से मिले विपक्षी नेताओं ने यह भी कहा है कि नई वोटिंग मशीनें खरीदने के लिए फंड रिलीज़ करने से इंकार कर सरकार ने चुनाव जीतने की खातिर गलत रास्ते अख्तियार करने के प्रति अपने लगाव की पोल खोल दी है. वीवीपीएटी मशीनें वोट दिए जाने के बाद काग़ज़ी रसीद जारी करती हैं. विपक्ष का कहना है कि रसीदें जारी करने वाली ज़्यादा मशीनें अब तक चुनावों में इस्तेमाल नहीं की गई हैं, और केंद्र सरकार जानबूझकर उस रकम को मंज़ूर करने में देरी कर रहा है, जिससे वर्ष 2019 में होने वाले अगले लोकसभा चुनाव में ज़्यादा से ज़्यादा वीवीपीएटी मशीनें इस्तेमाल हो सकें.


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