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छठ पूजा पर घुटने-घुटने ज़हरीले झाग में खड़े होकर सूर्यदेव को दिया 'अर्घ्य'

खतरनाक प्रदूषण तथा बारिश के बीच श्रद्धालुओं को घुटने-घुटने झाग में खड़े देखा गया, और वे छठ पूजा के लिए अपने हाथों में फूल, फल और अन्य सामग्री थामे हुए थे. हालांकि श्रद्धालुओं को सूर्योदय साफ दिखाई नहीं दे पाया, क्योंकि दिल्ली के आकाश में गहरी धुंध छाई हुई थी.

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छठ पूजा पर घुटने-घुटने ज़हरीले झाग में खड़े होकर सूर्यदेव को दिया 'अर्घ्य'

कुछ महिलाओं और लड़कियों को इसी झाग में खड़े होकर सेल्फी खींचते हुए भी देखा गया.

नई दिल्ली:

रविवार को दिल्ली में हवा की गुणवत्ता का स्तर तीन साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया था, लेकिन छठ पूजा की अंतिम प्रार्थना के लिए यमुना नदी के तट पर हज़ारों श्रद्धालु जमा हुए. रविवार तड़के धोती पहने पुरुष तथा साड़ियां पहने महिलाएं नदी में उतरीं, जहां ज़हरीला, सफेद झाग नदी के बेहद प्रदूषित हो चुके पानी के ऊपर तैर रहा था.

खतरनाक प्रदूषण तथा बारिश के बीच श्रद्धालुओं को घुटने-घुटने झाग में खड़े देखा गया, और वे छठ पूजा के लिए अपने हाथों में फूल, फल और अन्य सामग्री थामे हुए थे. हालांकि श्रद्धालुओं को सूर्योदय साफ दिखाई नहीं दे पाया, क्योंकि दिल्ली के आकाश में गहरी धुंध छाई हुई थी.

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कुछ महिलाओं और लड़कियों को इसी झाग में खड़े होकर सेल्फी खींचते हुए भी देखा गया.

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आम आदमी पार्टी (AAP) के प्रमुख तथा दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और भारतीय जनता पार्टी (BJP) की दिल्ली इकाई के प्रमुख मनोज तिवारी ने भी रविवार सुबह उगते सूर्य को 'अर्घ्य' देकर पूजा में शिरकत की.

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रविवार को प्रदूषण का स्तर पिछले तीन साल के सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गया था, जिसके चलते सांस लेने में भी दिक्कत हो रही थी, तथा दृश्यता कम हो जाने की वजह से सड़क तथा हवाई यातायात भी प्रभावित हुआ. अरविंद केजरीवाल ने स्थिति को 'असहनीय' बताया और कहा कि दिल्ली के लोग बिना किसी गलती के तकलीफ झेल रहे हैं. दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम तथा फरीदाबाद में मंगलवार तक के लिए स्कूल बंद कर दिए गए हैं.

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दिल्ली सरकार ने यमुना के किनारे 1,100 घाट बनाए थे तथा इनके अलावा शहरभर में पार्कों व अन्य सार्वजनिक स्थानों पर भी छठ पूजा की व्यवस्था की थी.

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दिल्ली के लिए पानी का मुख्य स्रोत यमुना नदी देश की सबसे ज़्यादा प्रदूषित नदियों में शुमार की जाती है. राजधानी के 19 नाले इसी नदी में गिरते हैं, और नदी में मौजूद प्रदूषक तत्वों में से 96 फीसदी इन्हीं नालों से आते हैं. नदी में छोड़ा जाने वाले सीवेज का सिर्फ पांच फीसदी पानी ही ट्रीट किया हुआ होता है.



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