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मेघालय की अवैध कोयला खदान में दिखा एक और शव, बाहर निकालने की कोशिश तेज

जयंतिया हिल्स जिले की एक खदान में 13 दिसंबर से फंसे हुए खनिकों में से एक और शव का पता नौसेना के गोताखोरों ने लगाया है.

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मेघालय की अवैध कोयला खदान में दिखा एक और शव, बाहर निकालने की कोशिश तेज

मेघालय खदान में एक और मजदूर का शव मिला

खास बातें

  1. 280 फीट की गहराई से नौसेना को मिला एक और शव
  2. अभी तक दो कुल शव मिले हैं
  3. 13 दिसंबर से अवैध कोयला खदान में फंसे हुए हैं मजदूर
नई दिल्ली:

मेघालय के पूर्वी जयंतिया हिल्स जिले की एक खदान में 13 दिसंबर से फंसे हुए खनिकों में से एक और शव का पता नौसेना के गोताखोरों ने लगाया है. अधिकारियों ने यह जानकारी दी. जिला उपायुक्त एफ एम डोप्थ ने बताया, भारतीय नौसेना ने हमें जानकारी दी है कि तड़के तीन बजे एक और शव का पता चला है और यह मुख्य शाफ्ट से 280 फुट दूर है'' उन्होंने बताया कि शव सड़ चुका है और इसे खदान से बाहर निकालने के प्रयास किए जा रहे हैं. इसके लिए नौसेना के रिमोट से संचालित वाहन (आरओवी) का इस्तेमाल किया जाएगा. इस राहत कार्य में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल की मदद ली जाएगी. खदान से पहला शव अमिर हुसैन का निकाला गया. हुसैन के शव को उनके परिवार वालों को शनिवार को सौंप दिया गया. 

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बाकी फंसे 13 मजदूरों की खोज में बचाव कार्य जारी है. अधिकारियों ने बताया कि खदान के भीतर शव दिखने के बाद नौसेना के गोताखोर इसे इसके मुहाने तक लाए. ये मजदूर मेघालय के ईस्ट जयंतिया हिल्स जिले में एक अवैध रैटहोल खदान में अचानक पानी भर जाने से फंस गए थे. अब तक के बचाव संबंधी प्रयासों के लगातार विफल होने के बाद यह उम्मीद बेहद कम हो गई थी कि इन खनिकों को सही सलामत बाहर निकाला जा सकेगा. खदानों में अपने काम के लिये महारत रखने वाले वैज्ञानिकों की एक शीर्ष टीम बचाव अभियान में लगी हुई है. इस बचाव अभियान को देश का सबसे लंबा चलने वाला बचाव अभियान बताया जा रहा है. 

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हैदराबाद स्थित राष्ट्रीय भू-भौतिकीय अनुसंधान संस्थान, वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (एनजीआईआर-सीएसआईआर) और ग्रैविटी एंड मैग्नेटिक ग्रुप के विशेषज्ञों की एक टीम भी बचाव कार्य में लगी हुई है. रविवार तक 370 फुट गहरी खदान से एक करोड़ लीटर पानी निकाला जा चुका था. इसके अलावा पास ही में मौजूद अन्य खदानों से भी दो करोड़ लीटर पानी निकाला जा चुका है क्योंकि आशंका थी कि ये खदानें आपस में जुड़ी हुई हैं. हालांकि, बचावकर्मी इस बात का पता नहीं लगा पाए हैं कि पानी कैसे और कहां से आ रहा है. 

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बचाव अभियान में कई सरकारी एजेंसियों के करीब 200 कर्मी लगे हुए हैं, जिसमें नौसेना और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल के अलावा कोल इंडिया और किर्लोस्कर ब्रदर्स लि के कर्मी शामिल हैं. बचाव अभियानों की निगरानी कर रहे सुप्रीम कोर्ट ने बचाव एजेसियों को खनिकों को जीवित या मृत बाहर निकालने का निर्देश दिया है.

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