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पेट्या रैन्समवेयर हमले से मुंबई कन्टेनर पोर्ट जेएनपीटी पर भी कामकाज प्रभावित

जेएनपीटी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "हमें बताया गया है कि जीटीआई पर संचालन रुक गया है, क्योंकि (मैलवेयर हमले के चलते) उनके सिस्टम डाउन (बंद) हो गए हैं..."

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पेट्या रैन्समवेयर हमले से मुंबई कन्टेनर पोर्ट जेएनपीटी पर भी कामकाज प्रभावित

प्रतीकात्मक चित्र

खास बातें

  1. पेट्या रैन्समवेयर हमले की वजह से जेएनपीटी पर जीटीआई का संचालन रुक गया
  2. जेएनपीटी अधिकारी के अनुसार, जीटीआई के सिस्टम डाउन हो गए हैं
  3. हमले के चलते यूरोप में सबसे ज़्यादा असर, कामकाज बुरी तरह प्रभावित
रैन्समवेयर, जिसे पेट्या कहा जा रहा है, के विश्वव्यापी हमले के चलते आज रात भारत के सबसे बड़े कन्टेनर पोर्ट जेएनपीटी के तीन में से एक टर्मिनल का संचालन भी प्रभावित हुआ है. इसी हमले के चलते यूरोप में कई बड़ी कॉरपोरेशनों तथा कुछ अहम बैंकों का कामकाज बाधित पहले ही बुरी तरह प्रभावित हो चुका है.

दुनियाभर में प्रभावित हुई कंपनी एपी मॉलर-मैर्स्क (AP Moller-Maersk) ही भारत में जेएनपीटी पर गेटवे टर्मिनल्स इंडिया (जीटीआई) का संचालन करती है, जिसकी क्षमता 18 लाख स्टैंडर्ड कन्टेनर यूनिट की है. जेएनपीटी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने समाचार एजेंसी प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया से कहा, "हमें बताया गया है कि जीटीआई पर संचालन रुक गया है, क्योंकि (मैलवेयर हमले के चलते) उनके सिस्टम डाउन (बंद) हो गए हैं... वे मैन्यूअली काम करने की कोशिश कर रहे हैं..." अधिकारी के मुताबिक, जेएनपीटी भी कंपनी की मदद करने की कोशिश कर रही है, लेकिन ज़्यादा कुछ नहीं किया जा सकता, क्योंकि समस्या सिस्टम के साथ है.

इससे पहले, समाचार एजेंसी भाषा ने एसोसिएटेड प्रेस के हवाले से बताया था कि दुनिया भर में हुए सॉफ्टवेयर को प्रभावित करने वाले एक नए साइबर हमले में कंपनियां एवं सरकारों को निशाना बनाया गया है, जिससे खासतौर पर यूरोप पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है.

यूक्रेन के अधिकारियों ने देश के पॉवरग्रिड और साथ ही बैंकों एवं सरकारी दफ्तरों के कंप्यूटरों में गंभीर घुसपैठ की जानकारी दी है. वहां के एक वरिष्ठ कर्मचारी ने एक काले कंप्यूटर स्क्रीन की तस्वीर डालते हुए लिखा, "पूरा नेटवर्क बंद हो चुका है..."

रूस की रोसनेफ्ट तेल कंपनी ने भी हैकिंग का शिकार होने की ख़बर देते हुए कहा कि वह भारी नुकसान से बाल-बाल बचा. वहीं डेनमार्क की जहाजरानी कंपनी एपी मॉलर-मैर्स्क ने भी ऐसी ही जानकारी दी.

इस बात की पुष्टि हो चुकी है कि हमला यूरोप से बाहर तक फैल चुका है. अमेरिकी दवा कंपनी मर्क ने कहा कि उसके कंप्यूटर सिस्टम भी हमले का शिकार हुए हैं.

(इनपुट एजेंसियों से भी)


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