लॉकडाउन में मिली ढील के साथ ही सक्रिय हुआ विपक्ष, सोनिया गांधी ने बुलाई महाबैठक

इस हफ्ते शुक्रवार को दोपहर 3 बजे आयोजित होने वाली बैठक में सरकार द्वारा दिए गए आर्थिक पैकेज और कोरोनावायरस महामारी को लेकर उठाए गए अन्य कदमों पर भी चर्चा होने की उम्मीद है.

लॉकडाउन में मिली ढील के साथ ही सक्रिय हुआ विपक्ष, सोनिया गांधी ने बुलाई महाबैठक

कांग्रेस पार्टी ने देश के मौजूदा हालात को देखते हुए शुक्रवार को सभी विपक्षी दलों की बैठक बुलाई है.

नई दिल्ली:

कोरोनावायरस के चलते जारी लॉकडाउन 4.0 में सरकार द्वारा दी गई ढील के बाद विपक्षी सक्रियता नजर आने लगी है. कांग्रेस पार्टी ने देश के मौजूदा हालात को देखते हुए शुक्रवार को सभी विपक्षी दलों की बैठक बुलाई है. इस बैठक के एजेंडे में सरकार द्वारा कोरोनावायरस महामारी निपटने के लिए उठाए गए कदमों, प्रवासी मजदूरों का मुद्दा, राज्यों के श्रम कानूनों के निलंबन और विभिन्न संसदीय समितियों की गतिविधियों पर रोक लगाने का मुद्दा शामिल है.

शुक्रवार को दोपहर 3 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आयोजित होने वाली बैठक में सरकार द्वारा दिए गए आर्थिक पैकेज और कोरोनावायरस महामारी को लेकर उठाए गए अन्य कदमों पर भी चर्चा होने की उम्मीद है. कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक के लिए 18 राजनीतिक दलों को निमंत्रण दिया है. डीएमके नेता एमके स्टालिन, लेफ्ट पार्टियां और ममता बनर्जी की टीएमसी ने भी इस बैठक में शामिल होने पर सहमति व्यक्त की है. 

कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, 'हम यह सुनिश्चित करने के लिए हर संभव विकल्प का पालन करेंगे कि विधायी  निरीक्षण हो और सरकार विपक्षी दलों के साथ मिलकर काम करे.' मार्च में देशव्यापी लॉकडाउन का ऐलान किए जाने से पहले संसद की कार्यवाही स्थगित कर दी गई थी. इसके बाद सरकार ने प्रशासन से जुड़े मुद्दों पर कई स्तर पर वीडियो कॉन्फ्रेंस की है. लेकिन इस दौरान संसद की किसी भी स्थायी समिति की बैठक नहीं हुई है. सरकार का तर्क है कि स्थायी समिति की बैठक कैमरे पर आयोजित नहीं की जा सकती. 

एक विपक्षी नेता ने नाम न छापने की शर्त पर NDTV को बताया, 'नरेंद्र मोदी-अमित शाह के गठबंधन ने विपक्ष को अस्थिर कर दिया है.' उन्होंने आगे कहा कि सरकार इस बैठक का विरोध कर रही है.  शशि थरूर, और आनंद शर्मा सहित कई कांग्रेस नेताओं ने पीठासीन अधिकारियों को पत्र लिखकर पूछा है कि इन बैठकों को वस्तुतः अनुमति दी जाए और या फिर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक हो. जिस प्रकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, स्पीकर और  राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद कर रहे हैं.

महामारी के दौरान अति-केंद्रीकरण के चलते सरकार की पहले से काफी आलोचना हो रही है. यह बताते हुए कि देश एक लोकतंत्र है, विपक्षी नेता सामान्य लोकतांत्रिक कार्यों को बनाए रखने में जुटे हैं. विशेष रूप से अब जबकि सरकार का ध्यान धीरे-धीरे लॉकडाउन प्रतिबंधों को कम करने पर है.

आपको बता दें कि मार्च महीने कोरोनावायरस के चलते लॉकडाउन की घोषणा का कांग्रेस के नेतृत्व में सभी राजनीतिक दलों ने स्वागत किया था और यह माना था कि इस वक्त इस महामारी पर काबू पाना पहली प्राथमिकता है. 

पिछले हफ्तों में, प्रवासी मजदूरों और राज्यों द्वारा श्रण कानूनों के निलंबन, राज्यों को केंद्र द्वारा वित्तीय सहायता में देरी जैसे मुद्दों को लेकर आरोप-प्रत्यारोप बढ़े हैं.

उत्तर प्रदेश में, प्रवासी मजदूरों के लिए बसों की आपूर्ति को लेकर कांग्रेस योगी सरकार के साथ मिलकर काम कर रही है. अब भी, 1000 बसें नौकरशाही की मार में फंस गई हैं, असहाय प्रवासियों को अभी भी अपने घर ले जाने के लिए परिवहन का इंतजार है.
 

 
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