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संस्कृत विभाग में मुस्लिम शिक्षक की नियुक्ति के विरोध पर BHU ने जारी किया यह बयान

BHU ने एक बयान जारी कर कहा, 'विश्वविद्यालय में कुलपति की अध्यक्षता में चयन समिति हुई थी, जिसमें विषय विशेषज्ञों के अतिरिक्त विजिटर नॉमिनी, संकाय प्रमुख, विभागाध्यक्ष और ओबीसी पर्यवेक्षक भी चयन समिति के सदस्यों के रूप में मौजूद थे.

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संस्कृत विभाग में मुस्लिम शिक्षक की नियुक्ति के विरोध पर BHU ने जारी किया यह बयान

बनारस हिंदू विश्वविद्याल

खास बातें

  1. BHU के छात्र मुस्लिम शिक्षक की नियुक्ति का कर रहे हैं विरोध
  2. 'अनार्य' शिक्षक फिरोज खान के खिलाफ वे 12 दिन से धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं
  3. आंदोलनकारी छात्र कहते हैं कि ये काशी की ऊंची परंपराओं के खिलाफ है
नई दिल्ली:

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में छात्रों का एक गुट संस्कृत साहित्य पढ़ाने के लिए एक मुस्लिम शिक्षक की नियुक्ति के खिलाफ आंदलोन कर रहा है. छात्रों का कहना है कि उन्हें उनके धर्म और संस्कृति की शिक्षा सिर्फ एक 'आर्य' ही दे सकता है. इसलिए उनकी नजर में 'अनार्य' शिक्षक फिरोज खान के खिलाफ वे 12 दिन से धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं. धर्म के नाम पर किसी योग्य शिक्षक का विरोध करने वालों को कैंपस में आंदोलन करने की छूट मिली हुई है. बता दें, BHU में ये ढोल-मंजीरे संस्कृत के एक मुस्लिम विद्वान के खिलाफ बज रहे हैं. अब क्योंकि यूजीसी के किसी नियम में यह नहीं लिखा है कि कोई मुस्लिम संस्कृत नहीं पढ़ा सकता. इसलिए राजस्थान के फिरोज खान ने भी एप्लाइ कर दिया और 29 लोगों में सबसे ज्यादा योग्य पाए गए और चुन लिए गए. लेकिन आंदोलनकारी छात्र कहते हैं कि ये काशी की उच्च परंपराओं के खिलाफ है. 

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आंदोलन कर रहे छात्रों में से एक कृष्ण कुमार ने कहा, 'यह आंदोलन किसी व्यक्ति, किसी धर्म या किसी संप्रदाय विशेष के खिलाफ नहीं है. न हम किसी संप्रदाय विशेष में हस्तक्षेप करने की इच्छा रखते हैं. इसके विपरीत हमारे धर्म, हमारी संस्कृति, हमारी काशी की परंपराओं के अनुकूल चीजें नहीं हो रही है. इसलिए हम लोग धरने पर बैठे हैं.' छात्रों का कहना है कि काशी की परंपरा शुद्धतावादी है. ऐसे में वे फिरोज खान से पढ़ना स्वीकार नहीं करेंगे.

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काशी की परंपराओं के बारे में बताते हुए कृष्ण कुमार ने कहा, 'पंडित राज जगन्नाथ जी ने एक यवन कन्या से विवाह कर लिया था. वह अद्भुत विद्वान थे, लेकिन काशी की विद्वत सभा ने उनका बहिष्कार कर दिया था.' आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि फिरोज खान 'आर्य' वंश से नहीं है. जबकि उनके विभाग में 'अनार्य' यानी गैर आर्यों का पढ़ाना तो दूर वहां उनके प्रवेश पर भी प्रतिबंध हैं. फिर उनके विभाग में साहित्य के साथ हिंदु धर्म और संस्कृति की भी पढ़ाई होती है. और उनके धर्म और संस्कृति की शिक्षा तो सिर्फ 'आर्य' ही दे सकते हैं. कोई और धर्म वाला उन्हें उनका धर्म कैसे पढ़ा सकता है?

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एक दूसरे आंदोलनकारी छात्र शुभम ने कहा, 'आर्ट फैकल्टी में संस्कृत विभाग स्थापित किया गया. इसका मुख्य उद्देश ये था, जो साफ तौर पर प्रस्तावना में लिखा हुआ है कि ये जो संस्कृत विद्या धर्म और संकाय है वह धर्म शिक्षक और पुजारी तैयार करेंगे. जिसका सारा काम हिंदुओं के हाथों में होगा और उसमें अनार्यों का प्रवेश वर्जित है.' आधिकारिक तौर पर नियुक्त एक शिक्षक के खिलाफ यूनिवर्सिटी में हो रहे है इस आंदोलन पर BHU ने एक बयान जारी कर कहा, 'विश्वविद्यालय में कुलपति की अध्यक्षता में चयन समिति हुई थी, जिसमें विषय विशेषज्ञों के अतिरिक्त विजिटर नॉमिनी, संकाय प्रमुख, विभागाध्यक्ष और ओबीसी पर्यवेक्षक भी चयन समिति के सदस्यों के रूप में मौजूद थे. चयन समिति ने पारदर्शी प्रक्रिया अपनाते हुए सर्वसम्मति से सबसे योग्य पाए गए अभ्यार्थी को उक्त पद पर नियुक्त किया.'

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वहीं BHU के चीफ प्रोटेक्टर ओपी राय ने कहा, 'संस्कृत विद्याधन संकाय में एपॉइंटमेंट एक अध्यापक का हुआ है. एक वर्ग विशेष का. इस पर बच्चों का ये कहना है कि ये हमारे कल्चर के हिसाब से सही नहीं है. हम विश्वविद्यालय में जो भी नियुक्ति करते हैं वह संविधान और जो हमारे एक्ट हैं, यूजीसी के एक्ट हैं उनको ध्यान में रखते हुए नियुक्तियां की जाती हैं. इस बार भी हमारी सेलेक्शन कमेटी ने उसी को ध्यान में रखते हुए नियुक्तियां की हैं.'



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