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समाजवादी नेता की जयंती पर एक मंच पर जुटा विपक्ष, राष्ट्रपति चुनाव के लिए एकजुटता की कवायद

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समाजवादी नेता की जयंती पर एक मंच पर जुटा विपक्ष, राष्ट्रपति चुनाव के लिए एकजुटता की कवायद

राष्ट्रपति चुनाव के लिए तमाम विपक्षी दल लामबंद होने लगे हैं, इस पद के लिए शरद पवार का नाम उभर कर आ रहा है (फाइल फोटो)

खास बातें

  1. विधानसभा चुनावों में हार के बाद राष्ट्रपति चुनाव के लिए एकजुट हुआ विपक्ष
  2. NCP प्रमुख शरद पवार विपक्षी दलों की पहली पसंद हैं राष्ट्रपति पद के लिए
  3. तमाम विपक्षी दल मिलकर बीजेपी को घेरने की कोशिश में जुट गए हैं
नई दिल्ली: आगामी राष्ट्रपति चुनाव से पहले विपक्षी दलों की तरफ से एक साझा उम्मीदवार खड़ा करने की कवायद तेज़ हो गई है. सोमवार को कई कद्दावर नेता एक मंच पर जुटे. बहाना समाजवादी नेता मधु लिमये के 95वें जन्मदिन का था, लेकिन कोशिश सबको साथ लाने की भी दिखी.  
 
कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह, सीपीएम महसचिव सीताराम येचुरी, एनसीपी के नेता डीपी त्रिपाठी, जेडी (यू) के पूर्व अध्यक्ष शरद यादव और प्रधान महासचिव केसी त्यागी, सीपीआई नेता डी. राजा समेत कई अहम विपक्षी नेता एक ही मंच पर दिखे. सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी ने एनडीटीवी से कहा कि विपक्ष ऐसा साझा उम्मीदवार खड़ा करना चाहता हैं जो संविधान की सुरक्षा कर सके.

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सीताराम येचुरी ने कहा, 'कोशिश है कि राष्ट्रपति ऐसा व्यक्ति बने जो गणतंत्र की सुरक्षा कर सके. ऐसे व्यक्ति पर सहमति बनाने की कोशिश हो रही है. अभी किसी उम्मीदवार का नाम लेने का समय नहीं आया है. हम चाहेंगे कि हमारी कोशिश सफल हो.'
  
दरअसल, ये कवायद आगामी राष्ट्रपति चुनाव से पहले विपक्ष को एक ही मंच पर लाने की शुरूआत है. जेडीयू के प्रधान महासचिव केसी त्यागी ने एनडीटीवी से कहा कि एनसीपी नेता शरद पवार एक सशक्त उम्मीदवार हो सकते हैं. 
 
केसी त्यागी ने कहा, 'संविधान संकट में है. हमारे लिए ये महत्वपूर्ण है कि ऐसा व्यक्ति राष्ट्रपति बने जिससे संविधान महफूज रहे. उम्मीद है कि विपक्ष से सशक्त उम्मीदवार उतरेगा.'

जब एनडीटीवी ने पूछा कि क्या शरद पवार वह सशक्त उम्मीदवार हो सकते हैं? इस पर त्यागी ने कहा, 'शरद पवार सशक्त उम्मीदवार हो सकते हैं ये फैसला सभी बड़े विपक्षी दलों के नेताओं को करना है.' 
 
हाल के दिनों में ये पहला मौका है कि जब एक ही मंच पर कई अहम विपक्षी दलों के नेता एकसाथ दिखे हैं. राष्ट्रपति चुनाव से पहले विपक्षी दलों को एकजुट करने की कवायद ज़ोर पकड़ रही है. अब एक साझा उम्मीदवार खड़ा करने की जद्दोजहद के दौरान ये देखना महत्वपूर्ण होगा कि अलग-अलग राज्यों में एकदूसरे के सामने खड़े विपक्षी दल किस हद तक अपने-अपने राजनीतिक हितों को पीछे कर एक ही मंच पर आने में कामयाब हो पाते हैं. 
 


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