प्रधानमंत्री आ सकते हैं लोकपाल के दायरे में

खास बातें

  • इस अध्यादेश में प्रधानमंत्री समेत लोक सेवकों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए एक लोकपाल बनाए जाने की संभावना है।
New Delhi:

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह प्रस्तावित लोकपाल के दायरे में आ सकते हैं और समझा जाता है कि सरकार भ्रष्टाचार को रोकने के अपने प्रयासों के तहत एक अध्यादेश लाने पर विचार कर रही है। घोटालों के कारण विवाद में घिरे होने और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी द्वारा हाल ही में पार्टी के महाधिवेशन में भ्रष्टाचार से निपटने के लिए कार्ययोजना की घोषणा किए जाने के बाद सरकार जल्द से जल्द एक अध्यादेश लाना चाहती है और अटकलें हैं कि गुरुवार को होने वाली कैबिनेट की बैठक में इस पर विचार किया जा सकता है। सूत्रों ने बताया कि सरकार चाहती है कि गणतंत्र दिवस की पूर्वसंध्या पर राष्ट्रपति के राष्ट्र के नाम संदेश में इस अध्यादेश का उल्लेख हो। विधि मंत्री वीरप्पा मोइली ने कहा कि लोकपाल विधेयक अनेक मंत्रालयों के विचाराधीन है और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह इसमें दिलचस्पी रख रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि संसद में स्थिति ठीक रही, तो बजट सत्र में विधेयक को रखा जा सकता है। सूत्रों ने कहा कि अध्यादेश का स्वरूप लोकपाल विधेयक से तय किया जाएगा जिस पर विधि मंत्रालय विचार-विमर्श कर रहा है और यह प्रधानमंत्री, मंत्रियों और सांसदों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की शिकायत लोकपाल के समक्ष दर्ज करने के प्रावधान रखेगा। विधेयक के मुताबिक लोकपाल में एक अध्यक्ष होगा जो कि उच्चतम न्यायालय के वर्तमान या पूर्व प्रधान न्यायाधीश या न्यायाधीश होंगे। इसमें दो सदस्य भी होंगे, जो या तो उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश या उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीश होंगे। सरकार का कदम ऐसे समय में आया है जब उस पर 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन और राष्ट्रमंडल खेलों के आयोजन में अनियमितताओं समेत अनेक बड़े घोटालों को लेकर विपक्ष का हमला जारी है। अध्यादेश लाने के फैसले को पिछले महीने कांग्रेस के महाधिवेशन में सोनिया गांधी के इस बयान से जोड़कर देखा जा रहा है कि भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के आवास पर गत 31 दिसंबर को हुई कांग्रेस कोर ग्रुप की बैठक में इस बाबत चर्चा हुई। बैठक में सोनिया गांधी की भ्रष्टाचार से लड़ने की पांच सूत्री कार्ययोजना के मद्देनजर प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा तैयार नोट पर विचार-विमर्श किया गया। लोकपाल विधेयक के मसौदे में इस बात के भी प्रावधान हैं कि मंत्रियों और सांसदों के खिलाफ शिकायतें लोकसभा अध्यक्ष या राज्यसभा के सभापति के माध्यम से दर्ज की जानी चाहिए।

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