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गुमनाम जिंदगी जी रहे अवध के आखिरी शहजादे की दिल्ली के जर्जर 'महल' में मौत

देश की राजधानी दिल्ली में दिल्ली के खंडहर रूपी मालचा महल में अवध के आखिरी शहजादे की मौत हो गई.

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गुमनाम जिंदगी जी रहे अवध के आखिरी शहजादे की दिल्ली के जर्जर 'महल' में मौत

अवध के आखिरी शहजादे की मौत

खास बातें

  1. अवध के आखिरी शहजादे की दिल्ली के मालचा महल में मौत.
  2. कहा जाता है कि अवध राजघराने के ये आखिरी वंशज थे.
  3. 2 सितंबर को पुलिस को मिला था शहजादे का शव.
नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली में दिल्ली के खंडहर रूपी मालचा महल में अवध के आखिरी शहजादे की मौत हो गई. अवध राजघराने के आखिरी शहजादे अली राजा की मौत की पुष्टि  सोमवार को की गई. अवध राजघराने के आखिरी राजकुमार 2 सितंबर को मृत पाये गये. बताया जा रहा है कि वे काफी गरीबी में अपनी जिंदगी जी रहे ते. ये दिल्ली के मालचा महल में 1985 से रह रहे थे, जिसे सरकार ने दिया था. 

बतया जा रहा है कि साइरस के नाम से जाने जाने वाले अली राजा की कहानी कोई साधारण कहानी नहीं थी. मालचा महल तुगलक काल की एक जर्जर इमारत है. वह अपने परिवार के आखिरी जीवित सदस्य थे जो अपनी वंशावली अवध राजपरिवार से जोड़ता था. हालांकि इस दावे की कभी पुष्टि नहीं हो पायी. बताया जा रहा है कि वह वहां 1985 से ही रह रहे थे. उनकी मां बेगम विलायत महल ने तत्कालीन केंद्र सरकार को इसके लिए बाध्य किया था कि वह उनके शाही अतीत के मुताबिक रहने का स्थान मुहैया कराये. बेगम विलायत महल ने कथित रूप से हीरे का चूरा खाकर आत्महत्या कर ली थी.

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2 सितंबर को पुलिस को मिला शव
पुलिस ने बताया कि उन्होंने शहजादे का शव बीते दो सितम्बर को मिला था. मौके से उन्हें कुछ फोन नम्बर मिले थे मगर किसी से भी संपर्क नहीं हो पयाा. इतना ही नहीं, पुलिस ने 72 घंटे तक इंतजार किया कि कोई आकर शव ले ले मगर कोई भी शव पर दावा करने नहीं आया. पुलिस के मुताबिक, हमने दिल्ली वक्फ बोर्ड से मदद मांगी और उन्हें पांच सितम्बर को दिल्ली गेट के पास दफना दिया गया. पोस्टमार्टम कराया गया और इसमें आया कि उनकी मृत्यु प्राकृतिक कारणों से हुई। इसके पीछे कोई साजिश नहीं थी. एक विस्तृत पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है.

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बता दें कि शहजादे की बहन सकीना कुछ महीने पहले ही 700 साल पुरानी इमारत में अपनी आखिरी सांस ली थी. हैरान करने वाली बात ये है कि इस इमारत में न दरवाजें थे, न खिड़कियां थीं, न बिजली थी और न ही पानी की कोई सुविधा थी. 
 
ali raza ani

दावा था कि वे अवध के राजघराने के वंशज थे.
शहजादे की मां बेगम विलायत महल का दावा था कि वह अवध के राजघराने की वंशज हैं. बेगम ने 70 के दशक में अपने परिवार के 1857 की आजादी की पहली लड़ाई में किये गए योगदान की पहचान की मांग करते हुए नयी दिल्ली रेलवे स्टेशन स्थित प्रथम श्रेणी के प्रतीक्षालय में रहना शुरू कर दिया था. 1985 में किसी समय बेगम और उनके दो बच्चे साइरस और उनकी बहन सकीना लॉज में आ गए जिसे तब 'बिस्तादारी खंडहर' कहा जाता था. बाद में इस स्थान को मालचा महल कहा जाने लगा क्योंकि वह मालचा मार्ग से नजदीक स्थित था.

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अवध के आखिरी शासक वाजिद अली शाह थे
बता दें कि अवध के आखिरी और दसवें नवाब वाजिद अली शाह ने 1856 तक करीब 9 सालों तक राज किया था. उसके बाद उनकी मृत्यु 1887 में कोलकाता में हो गई थी. बताया जाता है कि परिवार ने दुनिया से दूर रहने का चयन किया. परिवार इसके लिए बदनाम था कि वह बाहरी लोगों पर खूंखार कुत्ते छोड़ देता है. हालांकि समय बीतने के साथ बेगम और उनकी पुत्री के निधन के बाद खुंखार कुत्ते भी गायब हो गए. 
 


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