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राफेल पर चर्चा के लिए सही जगह अदालत नहीं, संसद है : चिदंबरम

राफेल करार पर अदालत जाने से जुड़े एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि इस समस्या का समाधान अदालत नहीं है.

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राफेल पर चर्चा के लिए सही जगह अदालत नहीं, संसद है : चिदंबरम

प्रतीकात्मक चित्र

नई दिल्ली: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने शनिवार को कहा कि राफेल लड़ाकू विमान सौदे पर चर्चा के लिये अदालत नहीं संसद सही मंच हैं. कांग्रेस इस सौदे में बड़े पैमाने पर घोटाले का आरोप लगाती रही है. पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री ने संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि राफेल करार की तुलना बोफोर्स मामले से नहीं की जा सकती क्योंकि 1980 के दशक में स्वीडन से बोफोर्स तोप खरीदे जाने में कोई भ्रष्टाचार नहीं हुआ था. राफेल करार पर अदालत जाने से जुड़े एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि इस समस्या का समाधान अदालत नहीं है.भारत में यह चलन बन गया है.हर बात के लिये आप अदालत चले जाते हैं. चिदंबरम ने कहा कि चर्चा की जगह संसद है.जहां निर्वाचित प्रतिनिधि हैं. सभी बहस संसद में होती है, अदालत में चर्चा नहीं होती.

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यह सिर्फ भारत में होता है कि अदालतें बहस की जगह बन गई हैं और संसद में ठहराव आ गया है. उन्होंने कहा कि सरकार संसद में इस मुद्दे पर बहस नहीं करना चाहती, दूसरा विकल्प एक संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) का गठन कर इस करार पर चर्चा का है, जिसकी मांग कांग्रेस द्वारा की गई है. उन्होंने कहा कि जेपीसी संसद का प्रतिनिधित्व करती है. यह संसद का लघु रूप है. गौरतलब है कि चिदंबरम से पहले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने राफेल डील को लेकर सरकार की घेराबंदी की थी. इसके बाद राफेल सौदे को लेकर जारी विवाद के बीच उद्योगपति अनिल अंबानी ने कहा सचाई की जीत होगी.

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राफेल सौदे के तहत फ्रांस की कंपनी से अंबानी को ही विवादास्पद ठेका मिला है. उन्होंने यह बात ऐसे समय कही है जब राफेल सौदे को लेकर वित्त मंत्री अरूण जेटली और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक-दूसरे पर आज ताजा आरोप लगाये. आरोप को आधारहीन और दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए अंबानी ने कहा कि सचाई की जीत होगी. उन्होंने कहा कि जो भी आरोप लगाये जा रहे हैं, वह दुर्भावनापूर्ण, निहित स्वार्थ और कंपनी प्रतिद्वंद्विता से प्रेरित है.अनिल अंबानी से मीडिया ने पूछा था कि राफेल सौदा मामले में उनकी कंपनी ने 5,000 करोड़ रुपये के मानहानि मामले में कांग्रेस अध्यक्ष को अलग क्यों रखा.

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मैंने व्यक्तिगत रूप से गांधी को पत्र लिखा और उनसे कहा है कि कांग्रेस के पास गलत और गुमराह करने वाली सूचना है जो दुर्भावनापूर्ण निहित स्वार्थ और कंपनी प्रतिद्वंद्विता का नतीजा है. उन्होंने आर इंफ्रा के मुंबई में बिजली कारोबार का अडाणी समूह को 18,800 करोड़ रुपये में बेचे जाने का सौदा पूरा होने की घोषणा के बाद यह बात कही. (इनपुट भाषा से) 


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