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पूर्व वित्त मंत्री पी.चिदंबरम ने मोदी सरकार पर साधा निशाना, कहा- आज देश में भय का शासन है

पूर्व वित्त एवं गृह मंत्री ने (P. Chidambaram) कहा कि यह परिदृश्य राष्ट्र के संस्थापकों द्वारा दिये गए भारत के विचार को खत्म कर देगा और इसे बरकरार रखने के लिये एक अन्य स्वतंत्रता आंदोलन और एक अन्य महात्मा गांधी की आवश्यकता पड़ेगी.

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पूर्व वित्त मंत्री पी.चिदंबरम ने मोदी सरकार पर साधा निशाना, कहा- आज देश में भय का शासन है

पी. चिदंबरम ने मोदी सरकार पर साधा निशाना

नई दिल्ली:

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम (P. Chidambaram) ने एक बार फिर मोदी सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि आज देश में हर तरफ भय का शासन है. इस बात का भी डर है कि मौजूदा सरकार कहीं संविधान को हिंदुत्व से प्रेरित एक दस्तावेज से बदल न दे. पूर्व वित्त एवं गृह मंत्री ने (P. Chidambaram) कहा कि यह परिदृश्य राष्ट्र के संस्थापकों द्वारा दिये गए भारत के विचार को खत्म कर देगा और इसे बरकरार रखने के लिये एक अन्य स्वतंत्रता आंदोलन और एक अन्य महात्मा गांधी की आवश्यकता पड़ेगी. बता दें कि पी. चिदंबरम (P. Chidambaram) ने यह टिप्पणी अपनी नई किताब उन्होंने “अनडांटेड: सेविंग द आइडिया ऑफ इंडिया” में की है. यह किताब पिछले साल प्रकाशित उनके निबंधों का संग्रह है.

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उनते मुताबिक पटरी से उतरी अर्थव्यवस्था को दुरुस्त किया जा सकता है, विभाजित समाज की खाइयों को पाट कर उसे फिर से एकजुट किया जा सकता है लेकिन एक चीज जो टूटने के बाद सही नहीं की जा सकती वह है संविधान. और उस दस्तावेज में सन्निहित संवैधानिक मूल्य. उन्होंने कहा कि अभी संविधान के हर मूल्य पर हमला हो रहा है चाहे वह स्वतंत्रता हो, समानता, उदारवाद, धर्मनिरपेक्षता, निजता या फिर वैज्ञानिक स्वभाव आदि.

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इस किताब में चिदंबरम लिखते हैं कि इस बात का स्पष्ट और प्रत्यक्ष खतरा है कि भारत के संविधान को एक ऐसे दस्तावेज से बदल दिया जाएगा जो हिंदुत्व की विचारधारा से प्रेरित होगा. यह भारत के विचार का अंत होगा जो राष्ट्र के संस्थापकों ने हमें दिया था. इस विचार को फिर से स्थापित करने के लिये एक दूसरे स्वतंत्रता संग्राम और एक और महात्मा से कम में काम नहीं चलेगा. उन्होंने किताब में कहा है कि मुझे यह कहते हुए कोई हिचकिचाहट नहीं है कि आज भारत में भय का शासन है.

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हर आदमी डर में जीता है- पड़ोसी का डर, स्वयं-भू नैतिकता के ठेकेदारों का डर, कुटिल दिमाग से कानून थोपे जाने का डर, और सबसे बड़ा भारतीय राज्य की जासूसी का डर. बता दें कि इस किताब की भूमिका पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने लिखी है जिसमें उन्होंने संस्थानों के प्रभावों के बारे में बताया है. (इनपुट भाषा से) 

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