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फर्जी बाबाओं के जरिए सैन्य जवानों को जासूसी और हनी ट्रैप में फंसाने की पाक की साजिश का खुलासा

पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों की हरकत, सेना ने 150 सोशल मीडिया प्रोफाइलों को लेकर सैन्य कर्मियों को एडवाइजरी जारी की

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फर्जी बाबाओं के जरिए सैन्य जवानों को जासूसी और हनी ट्रैप में फंसाने की पाक की साजिश का खुलासा

प्रतीकात्मक फोटो.

खास बातें

  1. भारतीय सेना ने अपनी सभी यूनिटों को नए सिरे से एडवाइजरी जारी की
  2. निशाने पर जूनियर, नॉन कमीशन ऑफिसर और आर्मी के मेडिकल ऑफिसर
  3. अधिकारियों के साथ उनके परिवारों के सदस्यों के साथ भी संपर्क की कोशिश
नई दिल्ली:

पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियों की नापाक हरकत सामने आई है. हनी ट्रैप में सेना के जवानों को फंसाने की साजिश का खुलासा हुआ है. पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी फर्जी बाबाओं के जरिए सेना के जवानों की जासूसी और हनी ट्रैप में फंसाने की साजिश रच रही थी. फर्जी बाबाओं के जरिए सेना के जवानों की जासूसी और हनी ट्रैप में फंसाने की साजिश का यह एक नया ट्रेंड सामने आया है. ऐसे 150 फर्जी सोशल मीडिया  प्रोफाइलों का पता लगा है जिनके जरिए ऐसी हरकतें होती हैं. इंडियन आर्मी ने अक्टूबर में अपनी सभी यूनिटों को नए सिरे से एडवाइजरी जारी की. एडवाइजरी में सोशल मीडिया पर संयम बरतने की सलाह दी गई है.

जासूसी और हनी ट्रैप के लिए पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी के निशाने पर जूनियर ऑफिसर, नॉन कमीशन ऑफिसर, आर्मी के मेडिकल ऑफिसर हैं. आर्मी के मेडिकल ऑफिसर इसलिए क्योंकि उनका मिलना-जुलना सिविलियन के साथ रहता है. साथ ही वे हमेशा अलर्ट पर नहीं रहते.


पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी के ऑपरेटिव इनके जारिए वरिष्ठ अधिकारी के साथ परिवार के सदस्यों के साथ भी संपर्क साध सकते हैं. आपको बता दें कि बुधवार को ही राजस्थान के पोकरण में दो जवानों को गिरफ्तार किया गया है जो  बेहद संवेदनशील सूचना ऑनलाइन दुश्मन एजेंसी को लीक कर रहे थे.

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सूत्रों के अनुसार सैन्य कर्मियों को एडवाइजरी निदेशालयों और कमानों के जरिए दी गई है. बताया जाता है कि विभिन्न सोशल मीडिया मंचों पर फर्जी प्रोफाइल का इस्तेमाल कर रहे लोग सैन्य कर्मियों, उनके परिवारों और यहां तक की सेवानिवृत्त सैन्य कर्मियों को भी निशाना बना रहे हैं.

एक अधिकारी ने कहा कि हाल के समय में सोशल मीडिया के जरिए पाकिस्तानी खुफिया इकाई से जुड़े लोगों द्वारा हमलों में तेजी आई है. इसी के अनुरूप सेना परामर्श जारी करने और क्या करें, क्या नहीं जैसे कदम उठा रही है. इन 150 प्रोफाइलों की पहचान करना भी इन कदमों में से एक है.

अधिकारी ने कहा कि “प्रोफाइल आम तौर पर दो से तीन साल पुराने होते हैं. इसलिए संदेह नहीं पैदा करते और प्रामाणिक प्रतीत होते हैं. इसके बाद वे निशाना बनाना शुरू करते हैं.” अधिकारी ने कहा संचार माध्यमों में जैसे-जैसे विविधता आती है वैसे ही अपने कर्मियों को इनके जाल में नहीं फंसने देना भी चुनौतीपूर्ण होता जाता है.

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एक अधिकारी ने कहा कि फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल का इस्तेमाल कर लोग सैन्य कर्मियों से जुड़ने की कोशिश कर रहे हैं जिससे उनसे सूचनाएं निकलवाई जा सकें. इसके लिए वे साथी सैन्य अधिकारी, पुलिसकर्मी या यहां तक की महिलाएं होने का दिखावा कर रहे हैं.

पिछले साल भारतीय वायुसेना के एक ग्रुप कैप्टन और ब्रह्मोस एरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड के साथ काम कर रहे एक इंजीनियर को सोशल मीडिया के जरिए हनी ट्रैप में फंसाया गया था.

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(इनपुट भाषा से भी)



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