पैन को आधार से लिंक करने की तारीख 6 महीने बढ़ा कर 30 सितंबर 2019 की गई

सीबीडीटी ने यह भी कहा कि 1 अप्रैल से इनकम का रिटर्न फाइल करते समय आधार नंबर को कोट करना और लिंक करना अनिवार्य होगा.

पैन को आधार से लिंक करने की तारीख 6 महीने बढ़ा कर 30 सितंबर 2019 की गई

प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर

नई दिल्‍ली:

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने स्‍पष्‍ट किया है कि पैन को आधार नंबर के साथ लिंक करने की तारीख 30 सितंबर 2019 है. पहले यह तारीख 31 मार्च 2019 थी. इस तरह इसे 6 महीने के लिए बढ़ा दिया गया है. सीबीडीटी ने यह भी कहा कि 1 अप्रैल से इनकम का रिटर्न फाइल करते समय आधार नंबर को कोट करना और लिंक करना अनिवार्य होगा.

यह छठा मौका है जब सरकार ने पैन को आधार से जोड़ने के लिये समयसीमा बढ़ाई है. सरकार ने पिछले साल जून में कहा था कि हर व्यक्ति को 31 मार्च तक अपनी बायोमेट्रिक पहचान वाली आधार संख्या को पैन के साथ जोड़ना है. केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने रविवार को जारी वक्तव्य में कहा है, ‘‘... यदि कोई विशिष्ट छूट नहीं दी जाती है तो, आधार संख्या के बारे में सूचना देने और पैन को आधार संख्या से जोड़ने की अंतिम तिथि अब 30 सितंबर 2019 है.''

हालांकि, इसके साथ ही यह भी कहा गया है कि एक अप्रैल 2019 से आयकर रिटर्न भरते हुये आधार नंबर का उल्लेख करना अनिवार्य होगा. सीबीडीटी ने कहा कि इस तरह की रपटें दिखाई दी हैं कि ऐसे पैन जो कि 31 मार्च तक आधार से नहीं जुड़े होंगे उन्हें अमान्य करार दिया जायेगा. इसके बाद सरकार ने मामले पर विचार करते हुये इन्हें आपस में जोड़ने की अंतिम तिथि को बढ़ाकर 30 सितंबर कर दिया.

फरवरी महीने में सीबीडीटी ने एक परामर्श पत्र में कहा था कि पिछले साल सितंबर में उच्चतम न्यायालय ने अपने आदेश में आधार की संवैधानिक मान्यता को बरकरार रखा था. इसी क्रम में आयकर कानून-1961 की धारा-139एए के तहत सीबीडीटी द्वारा 30 जून, 2018 को जारी आदेश मान्य हो जाता है.

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उच्चतम न्यायालय ने छह फरवरी को अपने आदेश में पुष्टि की कि आयकर रिटर्न दाखिल करने वालों के लिए पैन कार्ड को आधार से जोड़ना अनिवार्य है. उच्चतम न्यायालय ने दोबारा यह निर्णय दिल्ली उच्च न्यायालय के एक फैसले के खिलाफ केंद्र की याचिका पर दिया था दिल्ली उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में दो लोगों को उनका 2018-19 का आयकर रिटर्न पैन से आधार को जोड़े बिना दाखिल करने की अनुमति दे दी थी.

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इस पर न्यायामूर्ति ए. के. सीकरी और न्यायमूर्ति एस. अब्दुल नजीर की पीठ ने कहा कि शीर्ष अदालत इस मामले में पहले ही फैसला दे चुकी है और उसने आयकर की धारा 139एए को बरकरार रखा है. उच्चतम न्यायालय ने पिछले साल सितंबर में केंद्र की आधार योजना को मान्य करार दिया था, लेकिन बैंक खातों, मोबाइल फोनों और स्कूलों में प्रवेश जैसे कुछ काम अनिवार्य बनाने वाले प्रावधानों को रद्द कर दिया था.

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