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NRC पर अमित शाह के दोबारा बोलने से पहले ममता के सांसदों का हंगामा, राज्‍यसभा स्‍थगित

असम में राष्ट्रीय नागरिक पंजीकरण (एनआरसी) को लेकर विपक्षी दलों का संसद में हंगामा बुधवार को भी जारी रहा. संसद की कार्यवाही शुरू होने से पहले विपक्षी सांसदों ने संसद के बाहर प्रदर्शन किया.

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NRC पर अमित शाह के दोबारा बोलने से पहले ममता के सांसदों का हंगामा, राज्‍यसभा स्‍थगित

राज्‍यसभा में बीजेपी सांसद अमित शाह

खास बातें

  1. विपक्षी सांसदों ने संसद के बाहर प्रदर्शन किया
  2. राज्‍यसभा में बीजेपी के सांसद को फिर से बोलने का मौका दिया
  3. वेंकैया नायडू ने सांसदों से कहा कि वह अपनी बात शांति से रखें.
नई दिल्ली: असम में राष्ट्रीय नागरिक पंजीकरण (एनआरसी) को लेकर विपक्षी दलों का संसद में हंगामा बुधवार को भी जारी रहा, जिसके चलते राज्‍यसभा की कार्यवाही को गुरुवार तक के लिए स्‍थागित कर दिया गया है. तृणमूल के सांसद सुखेंदू शेखर रॉय ने राज्‍यसभा में कहा कि कैसे एक शख्‍स (अमित शाह) को दूसरी बार बोलने का मौका दिया जा सकता है. जबकि वह पहले ही बोल चुके हैं. वहीं सभापति वेंकैया नायडू ने टीएमसी के सांसदों को वॉल से जाने के लिए कहा. संसद की कार्यवाही शुरू होने से पहले विपक्षी सांसदों ने संसद के बाहर प्रदर्शन किया. राज्‍यसभा में बीजेपी सांसद अमित शाह को फिर से बोलने का मौका दिया लेकिन हंगामे की वजह से वह बोल नहीं पाए. शाह मंगलवार को दिए अपने बयान को पूरा करना चाहते थे. वहीं राज्‍यसभा के सभापति वेंकैया नायडू ने सांसदों से कहा कि वह अपनी बात शांति से रखें. 

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आपको बता दें कि मंगलवार को एनआरसी के विरोध में हाथों में तख्ती लिए तृणमूल कांग्रेस, सपा, राजद, तेदेपा,आप, बसपा और जद(एस) के सांसदों ने दोनों सदनों में हंगामा किया जिसके चलते सदन की कार्यवाही को स्‍थगित करना पड़ा था. असम में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के मुद्दे पर राज्यसभा में चर्चा में हिस्सा लेते हुये शाह ने कहा था कि 1985 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने असम समझौते के तहत एनआरसी बनाने की घोषणा की थी. एनआरसी को असम समझौते की आत्मा बताते हुये उन्होंने कहा ‘एनआरसी को अमल में लाने की कांग्रेस में हिम्मत नहीं थी, हममें हिम्मत है इसलिये हम इसे लागू करने के लिये निकले हैं.’ शाह ने एनआरसी को लागू करने पर देश में क्षेत्रीय एवं भाषायी आधार पर राज्यों के बीच टकराव शुरू होने की विपक्ष की आशंकाओं और आरोपों को गलत बताते हुये कहा कि सदन में इस बात की भी चर्चा होनी चाहिये कि एनआरसी लाने की जरूरत क्यों पड़ी. 

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शाह ने कहा था कि इसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का जिक्र करते हुये कहा कि 14 अगस्त 1985 को गांधी ने असम समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद 15 अगस्त को लाल किले से इसकी घोषणा की थी. उन्होंने कहा ‘‘समझौते में कहा गया है कि अवैध घुसपैठियों की पहचान कर, उनको हमारे नागरिक रजिस्टर से अलग कर एक शुद्ध नेशनल सिटीजन रजिस्टर बनाया जायेगा.’शाह ने कहा कि एनआरसी बनाने की यह पहल पूर्व प्रधानमंत्री के फैसले के अनुपालन में ही की गयी है. उन्होंने कांग्रेस पर इसे लागू करने की हिम्मत नहीं दिखाने का आरोप लगाते हुये कहा कि एनआरसी को लागू करने की प्रक्रिया पूरी तरह से सुप्रीम कोर्ट के आदेश से बंधी हुयी है. शाह ने एनआरसी से 40 लाख लोगों का नाम हटाये जाने के विपक्ष के आरोप पर पलटवार करते हुये कहा ‘ये 40 लाख लोग कौन हैं. इनमें बांग्लादेशी घुसपैठिये कितने हैं. मैं पूछना चाहता हूं कि क्या आप बांग्लादेशी घुसपैठियों को बचाना चाहते हैं.’

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