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इंटरनेट सेवाओं पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पर कश्मीर के लोगों में खुशी, पी. चिदंबरम ने कहा- सत्यपाल मलिक इस्तीफा दें

कश्मीर में इंटरनेट पर लगी रोक को लेकर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट की उस टिप्पणी से घाटी के लोगों को राहत मिली है कि इंटरनेट तक पहुंच लोगों का एक मौलिक अधिकार है. घाटी के कई लोगों ने इसे खुशखबरी बताते हुए उम्मीद जताई है कि जल्द ही इंटरनेट सेवाएं बहाल हो जाएंगी.

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इंटरनेट सेवाओं पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पर कश्मीर के लोगों में खुशी, पी. चिदंबरम ने कहा- सत्यपाल मलिक इस्तीफा दें

जम्मू-कश्मीर जारी पाबंदियों पर एक हफ्ते में समीक्षा हो : सुप्रीम कोर्ट

खास बातें

  1. जम्मू-कश्मीर पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
  2. पाबंदियों की एक हफ्ते में समीक्षा हो
  3. इंटनेट सेवाएं मौलिक अधिकार के तहत
नई दिल्ली:

कश्मीर में इंटरनेट पर लगी रोक को लेकर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट की उस टिप्पणी से घाटी के लोगों को राहत मिली है कि इंटरनेट तक पहुंच लोगों का एक मौलिक अधिकार है. घाटी के कई लोगों ने इसे खुशखबरी बताते हुए उम्मीद जताई है कि जल्द ही इंटरनेट सेवाएं बहाल हो जाएंगी. पांच महीने पहले पांच अगस्त को जब जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को रद्द कर दिया गया और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों- जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में विभाजित किया गया, तब से वहां इंटरनेट सेवाओं पर रोक है. सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को अपने एक महत्त्वपूर्ण फैसले में संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत इंटरनेट के इस्तेमाल को एक मौलिक अधिकार करार देते हुये जम्मू-कश्मीर प्रशासन को केंद्र शासित प्रदेश में प्रतिबंध लगाने के सभी आदेशों की एक हफ्ते में समीक्षा करने का आदेश दिया. शहर के लाल चौक इलाके के एक व्यवसायी इश्तियाक अहमद ने कहा, 'यह हमारे लिए बहुत ही बड़ी खुशखबरी है, एक बड़ी राहत है, क्योंकि इंटरनेट पांच महीनों से निलंबित है. हमें वास्तव में उम्मीद है कि अब जल्द से जल्द सेवाएं फिर से शुरू की जाएंगी.' उन्होंने कहा कि 5 अगस्त के बाद से कश्मीर में व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ है. घाटी में पर्यटन क्षेत्र से जुड़े एक अन्य व्यवसायी उम्मीद कर रहे हैं कि इंटरनेट पर निर्भर व्यवसाय को इससे बहुत बड़ी राहत मिलेगी. उन्होंने कहा, 'यह उस क्षेत्र को बढ़ावा देगा जो इंटरनेट पर अत्यधिक निर्भर है. इस क्षेत्र में सब कुछ इंटरनेट सेवाओं पर पूरी तरह से निर्भर रहता है.'  शहर के बाहरी इलाके में रहने वाला एक छात्रा आफरीन मुश्ताक ने कहा कि इंटरनेट प्रतिबंध का सबसे अधिक प्रभाव छात्र समुदाय पर पड़ा है और देर से ही सही, शीर्ष अदालत की आलोचना हमारे लिए राहत की बात है. हमारे लिए यह खुले हवा में सांस लेने जैसा है. श्रीनगर के एक पत्रकार ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने सही कहा है कि इंटरनेट का उपयोग एक मौलिक अधिकार है, जिसे रोका नहीं जा सकता है. इसके साथ ही उन्होंने उम्मीद जतायी कि मीडिया संगठनों के लिए यह सेवाएं बहाल की जाएंगी ताकि वे स्वतंत्र रूप से काम कर सकें. 

हटाए जाएं जम्मू-कश्मीर से पाबंदियां
माकपा ने जम्मू कश्मीर में इंटरनेट सेवाओं पर सुप्रीम कोर्ट की शुक्रवार की टिप्पणियों का हवाला देते हुए सरकार से राज्य में सभी प्रकार के प्रतिबंध हटाए जाने की मांग की है. माकपा पोलित ब्यूरो ने शुक्रवार को एक बयान में कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू कश्मीर में नागरिक अधिकारों की कटौती पर उल्लेखनीय टिप्पणी की है जिससे राज्य में सामान्य जनजीवन की बहाली के बारे में केन्द्र सरकार के गलत दावे का खुलासा हुआ है. पार्टी ने कहा कि केन्द्र सरकार ने गुरुवार को भी अपने इस दावे को सही ठहराने की कोशिश की और विदेशी राजनयिकों को जम्मू कश्मीर के सीमित दौरे पर भेजा. पोलित ब्यूरो ने कहा कि जम्मू कश्मीर में राजनयिकों को सरकार जो दिखाना चाहती है, उन्हें उसी का जायजा लेने की अनुमति दी गई है. यही वजह है कि राजनयिकों को राज्य के तीन नजरबंद पूर्व मुख्यमंत्रियों से मिलने की इजाजत नहीं दी गई है.


'सत्यपाल मलिक इस्तीफा दें'
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने शुक्रवार को कहा कि जम्मू-कश्मीर में इंटरनेट सेवाओं पर पाबंदी को लेकर सुप्रीम कोर्ट का आज का आदेश केंद्र सरकार के अहंकारी रुख को खारिज करता है और अब इस केंद्रशासित प्रदेश में संविधान का सम्मान करने वाले नए प्रशासकों की नियुक्ति होनी चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल रहे सत्यपाल मलिक को अब गोवा के राज्यपाल के पद इस्तीफा दे देना चाहिए. पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री ने ट्वीट कर कहा, 'सुप्रीम कोर्ट का आदेश जम्मू-कश्मीर में लगाई गई पाबंदियों पर केंद्र सरकार और जम्मू-कश्मीर प्रशासन के अहंकारी रुख को खारिज करता है. जम्मू-कश्मीर की वह टीम बदलनी चाहिए जिसने योजना तैयार की और लागू की.' चिदंबरम ने यह भी कहा, 'संविधान का सम्मान करने वाले नए प्रशासकों की नियुक्ति की जानी चाहिए. जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक को जिम्मेदारी लेनी चाहिए और उन्हें गोवा के राज्यपाल पद से इस्तीफा दे देना चाहिए.'

'2020 का पहला बड़ा झटका'
सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर में संविधान के अनुच्छेद 370 के अधिकांश प्रावधान खत्म करने के बाद लगाए गए प्रतिबंधों की एक हफ्ते के अंदर समीक्षा करने को कहा है. इस फैसले पर कांग्रेस ने मोदी सरकार के खिलाफ आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है. कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने फैसले के बाद पीएम मोदी और अमित शाह पर निशाना साधते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने इंटरनेट के महत्व को मौलिक अधिकार बताते हुए मोदी सरकार की अवैध गतिविधियों को साल 2020 का पहला बड़ा झटका दिया है.

गुलाम नबी आजाद ने साधा निशाना
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने जम्मू-कश्मीर के संदर्भ में आए उच्चतम न्यायालय के आदेश की सराहना करते हुए शुक्रवार को कहा कि सरकार ने लोगों को गुमराह करने की कोशिश की थी और इस बार शीर्ष अदालत किसी दबाव में नहीं आई. राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष आजाद ने कहा, 'हम फैसले का स्वागत करते हैं. यह पहली बार है कि सुप्रीम कोर्ट जम्मू-कश्मीर के लोगों की दिल की बात कही है. उसने लोगों की नब्ज पकड़ ली है. मैं ऐतिहासिक निर्णय के लिए सुप्रीम कोर्ट का धन्यवाद करना चाहता हूं. पूरे देश खासकर जम्मू-कश्मीर के लोग इसके लिए इंतजार कर रहे थे.'
 

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(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)


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