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This Article is From Dec 02, 2011

खुदरा विवाद पर ममता की मनमोहन को 'ना'

नई दिल्ली: बहु-ब्रांड खुदरा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) और अन्य मुद्दों पर बने गतिरोध के चलते संसद की कार्यवाही लागातार नौवें दिन शुक्रवार को भी बाधित रही। एफडीआई के मुद्दे पर सरकार के सहयोगी दल द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) के नरम रुख के बाद तृणमूल कांग्रेस को मनाने की प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की पहल काम नहीं आई। तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष और प. बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री से साफ कर दिया कि इस मुद्दे पर उनकी पार्टी सरकार का समर्थन नहीं कर सकती। वही, केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने एफडीआई पर विपक्ष को राजनीतिक संकीर्णता छोड़ने और सरकार के फैसले को लागू करने के इच्छुक राज्यों की राह में राजनीतिक दल रोड़े न अटकाने के लिए कहा। उनके इस बयान ने विपक्ष के तेवरों को और तीखा करने का काम किया है। एफडीआई के मसले पर विपक्ष और अपने कुछ सहयोगियों के विरोध का सामना कर रही सरकार को चार दिनों के संसदीय अवकाश के दौरान एफडीआई के भंवर से बाहर निकलने की रणनीति बनाने का मौका मिलेगा। संसद की कार्यवाही अब बुधवार को शुरू होगी। एफडीआई और अन्य मुद्दों को लेकर लगातार नौंवें दिन शुक्रवार को भी संसद में गतिरोध बना रहा। परिणामस्वरूप दोनों सदनों की कार्यवाही आगामी बुधवार तक के लिए स्थगित कर दी गई। लोकसभा और राज्यसभा की बैठक शुरू होने के चंद मिनट के भीतर ही स्थगित कर दी गई। दोनों सदनों के पीठासीन अधिकारियों ने पहले प्रश्नकाल रद्द कर कार्यवाही 12 बजे तक स्थगित की। लेकिन दोबारा बैठक शुरू होने के बाद भी जब सदस्यों का हंगामा बंद नहीं हुआ, तो दोनों सदनों की कार्यवाही आगामी बुधवार तक स्थगित कर दी गई। संसद की बैठक अब चार दिन बाद बुधवार को होगी। सोमवार को पहले से ही सदन की बैठक नहीं होने वाली थी और मंगलवार को मुहर्रम की छुट्टी है। एफडीआई के मुद्दे पर प्रधानमंत्री ने सरकार के सहयोगी दल तृणमूल कांग्रेस का भरोसा जीतने और समर्थन हासिल करने की कोशिश की लेकिन उनकी यह कोशिश असफल साबित हुई। तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री से साफ कर दिया कि उनकी पार्टी इस मुद्दे पर सरकार का समर्थन नहीं कर सकती। मनमोहन सिंह ने ममता को फोन कर उन्हें एफडीआई के फायदे समझाए और उनसे समर्थन की मांग की। बनर्जी ने कहा, "प्रधानमंत्री ने मुझे शुक्रवार को फोन किया और मुझसे एफडीआई पर हमारे निर्णय पर दोबारा विचार करने के लिए कहा। मैंने उनसे कहा कि हम नहीं चाहते कि सरकार गिरे लेकिन एफडीआई के मुद्दे पर सरकार का समर्थन करना हमारे लिए एक समस्या है।" उन्होंने कहा, "हमारे राज्य के 50 प्रतिशत लोग खुदरा कारोबार पर आश्रित हैं। यहां तक कि अपने घोषणापत्र में हमने राज्य में एफडीआई का समर्थन नहीं करने की प्रतिबद्धता जताई है। हम अपने किसानों की एक उचित आजीविका सुनिश्चित करने के बाद ही इस बारे में सोच सकते हैं।" उन्होंने कहा, "इसके पहले कई मौकों पर मैंने सरकार का समर्थन किया है लेकिन यह मुद्दा काफी संवेदनशील है और मैं लोगों के साथ खड़ा होने के लिए प्रतिबद्ध हूं।" मुखर्जी ने शुक्रवार को खुदरा क्षेत्र में एफडीआई के मुद्दे पर टकराव छोड़कर विपक्षी दलों से उपयुक्त मंच पर चर्चा करने की अपील की। साथ ही उन्होंने कहा कि अगर संकीर्ण राजनीतिक फायदों के लिए इसे रोका गया तो इससे किसानों और उपभोक्ताओं को नुकसान पहुंचेगा। 'हिंदुस्तान टाइम्स लीडरशिप समिट' में यहां मुखर्जी ने कहा कि वैश्विक अनुभवों से पता चलता है कि एकीकृत आपूर्ति श्रृंखला वाले संगठित खुदरा कारोबार से फसलों की बर्बादी में कमी आई है जिससे किसानों को फायदा पहुंचा है। साथ ही प्रतियोगी कीमतों के कारण उपभोक्ताओं को भी फायदा पहुंचा है। मुखर्जी के मुताबिक भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए ऐसी नीतियां जरूरी है ताकि उच्च विकास दर हासिल की जा सके। उन्होंने कहा, "विशेषतौर पर यह ध्यान में रखा जाना चाहिए कि एफडीआई को अनुमति के बारे में राज्यों को निर्णय लेना है, क्योंकि उनके पास लाइसेंस जारी करने का अधिकार है। कानून के मुताबिक उनके पास जमीन और अन्य सुविधाएं मुहैया कराने का अधिकार है।" मुखर्जी ने कहा, "साथ ही मैं कहना चाहूंगा कि कोई अपनी सीमा में अपने अधिकारों का प्रयोग कर सकता है लेकिन जो इसे लागू चाहते हैं उनके रास्ते में रोड़ न अटकाएं।" इसके अलावा मुखर्जी ने वार्षिक विकास दर अनुमान को घटकार 7.5 फीसदी कर दिया है जबकि बजट भाषण में नौ फीसदी विकास दर का लक्ष्य रखा गया था।

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