पीएम मोदी ने जनसंख्या नियंत्रण की जरूरत बताई, मुस्लिम उलेमा फैमिली प्लानिंग के हक में

इस्लाम धर्मशास्त्र के विद्वानों का मत- कुरान में फैमिली प्लानिंग का कहीं भी विरोध नहीं, ऐसा कहने वाले या तो नासमझ हैं या उनका मकसद कुछ और है

पीएम मोदी ने जनसंख्या नियंत्रण की जरूरत बताई, मुस्लिम उलेमा फैमिली प्लानिंग के हक में

प्रतीकात्मक फोटो.

खास बातें

  • स्वतंत्रता दिवस पर पीएम मोदी ने बढ़ती आबादी पर चिंता जताई
  • सन 1058 में जन्मे विद्वान अल गाज़ली ने गर्भ निरोध के बारे में बताया था
  • आबादी वृद्धि सामाजिक समस्या है जिसका धर्म से कोई संबंध नहीं
लखनऊ:

स्वतंत्रता दिवस पर पीएम नरेंद्र मोदी की जनसंख्या नियंत्रण की अपील का तमाम मुस्लिम उलेमा ने स्वागत किया है. उनका कहना है कि फैमिली प्लानिंग जरूरी है. जनसंख्या बढ़ने के सामाजिक आर्थिक कारण हैं, इसका धर्म से कोई ताल्लुक नहीं है. इस्लाम धर्मशास्त्र के कई विद्वानों का कहना है कि कुरान में फैमिली प्लानिंग का कहीं भी विरोध नहीं किया गया. ऐसा कहने वाले या तो नासमझ हैं या उनका मकसद कुछ और है. स्वतंत्रता दिवस के मौके पर पीएम मोदी ने देश की बढ़ती आबादी पर भी फिक्र जाहिर की. भारत दुनिया में चीन के बाद  दूसरा सबसे बड़ी आबादी वाला मुल्क है और अंदेशा है कि 2025 तक इसकी आबादी चीन से ज़्यादा हो जाएगी.

डेमोग्राफर आबादी बढ़ने की कई वजहें मानते हैं. मिसाल के लिए- गरीबी में आदमी ज़्यादा कमाने के लिए ज़्यादा बच्चे चाहता है. लड़की को बोझ समझकर जल्दी शादी की जाती है. अगर 18 के बजाय 28 साल की उम्र में लड़की की शादी हो तो बच्चों का जन्म 10 साल टाला जा सकता है. बेटे की चाह में तमाम लोग तब तक बच्चे पैदा करते रहते हैं जब तक बेटा न हो जाए. गैर कानूनी माइग्रेशन हो रहा है. बांग्लादेश और नेपाल से आकर भारत में बसने वाले भी आबादी बढ़ाते हैं.

शायद इस सियासी प्रचार की वजह से कि मुसलमान परिवार ज्यादा बच्चे पैदा करते हैं, कई उलेमा ने फौरन पीएम की हिमायत की. पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य मौलाना खालिद रशीद फिरंगीमहली ने कहा कि 'प्राइम मिनिस्टर साहब ने आज यौमे आज़ादी के मौके पर जो पॉपुलेशन वाली बात कही है वह बहुत कीमती और बहुत अहम बात है. और हम यह समझते हैं कि जैसे-जैसे मुल्क में एजुकेशन बढ़ेगा, वैसे-वैसे इंशा अल्लाह पॉपुलेशन पर रोक लगाई जा सकेगी.'

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देश में मुस्लिम आबादी करीब 14 फीसदी है लेकिन उनके फैमिली प्लानिंग न अपनाने का प्रचार ज्यादा है. मुस्लिम विद्वान कहते हैं कि कुरान में कहीं फैमिली प्लानिंग का विरोध नहीं है. करीब 1500 साल पहले अरेबियन पेनिन्सुला में आबादी की कोई समस्या नहीं थी और तब परिवार नियोजन के आधुनिक उपाय भी नहीं थे.

सन 1058 में जन्मे मुस्लिम विद्वान अल गाज़ली ने अपनी किताब “इहया उलूम उद-दीन” में लिखा कि गर्भ निरोध इन वजहों से अपनाया जा सकता है-
1. अगर बच्चे पैदा करने से बीवी की खूबसूरती पर असर पड़े.
2. अगर बीवी की सेहत पर असर पड़े.
3. अगर बीवी की जिंदगी को खतरा हो.
4. अगर बच्चा पैदा करने से आर्थिक तंगी आए.
5. यदि बड़े परिवार से दूसरी दिक्कतें पैदा हों.

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डॉ नदीम हसनैन ने कहा कि 'हिन्दुस्तान में जो दूसरी रिलीजियस कम्युनिटीस हैं उनके मुकाबले में ग्रोथ रेट थोड़ी ज़्यादा है. लेकिन यह बात भी अपनी जगह सही है कि जिस तरह से हम पिछली दो जनगणना देखें तो उसमें सबसे ज़्यादा गिरावट आई है. जन्म दर में भी मुसलमानों में ही गिरावट आई है.'

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विकास से ज्यादा प्रभावी गर्भ निरोधक कोई नहीं हो सकता. यानी जैसे-जैसे इकॉनामिक डेवलपमेंट, प्रॉस्पेरिटी बढ़ती है, आबादी नीचे आती है. यह पूरी दुनिया में है. यह बात कोई हमारे ही देश में लागू नहीं होती है. यह सब जगह ऐसे ही है.

जनसंख्या विस्फोट इस देश की बहुत बड़ी समस्या है. लेकिन यह एक सामाजिक समस्या है जिसका न किसी धर्म से कोई संबंध है और न ही राजनीति से. लेकिन यह हल इसलिए नहीं हो पाती है क्योंकि इसके बीच में राजनीति आ जाती है और जब राजनीति आती है तो अपने साथ धर्म भी लेकर आती है.

VIDEO : पीएम मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर देश को संबोधित किया

 
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