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PM मोदी ने कनाडा के इस ओलंपियन की प्रेरक कहानी छात्रों को सुनाई, अब मिला ये जवाब

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते सप्ताह परीक्षा संबंधी विषयों पर छात्रों के साथ दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में बातचीत की थी.

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PM मोदी ने कनाडा के इस ओलंपियन की प्रेरक कहानी छात्रों को सुनाई, अब मिला ये जवाब

PM मोदी ने कनाडा के ओलंपियन मार्कमॉरिस की प्रेरक कहानी छात्रों को सुनाई

खास बातें

  1. PM मोदी ने इस ओलंपियन की प्रेरक कहानी छात्रों को सुनाई थी
  2. बीते सप्ताह दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में सुनाई थी उनकी कहानी
  3. मार्कमॉरिस ने पीएम मोदी को इसके लिए धन्यवाद कहा है
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते सप्ताह परीक्षा संबंधी विषयों पर छात्रों के साथ दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में बातचीत की थी. उन्होंने छात्रों द्वारा पूछे गए प्रश्नों के जवाब भी दिए थे. पीएम मोदी ने इस दौरान छात्रों का हौसला बढ़ाते हुए कनाडा के स्नोबोर्डर मार्कमॉरिस का उदाहरण दिया. उन्होंने मार्कमॉरिस का उदाहरण देते हुए कहा, "11 महीने पूर्व उन्हें घातक चोट लगी थी और उनका जीवन खतरे में पड़ गया था, जिसके बावजूद उन्होंने शीतकालीन ओलंपिक खेलों में कांस्य पदक जीता है. दरअसल, मार्कमॉरिस को एक एक्‍सीडेंट में 17 फ्रैक्‍चर का सामना करना पड़ा था औ वो कोमा में चले गए थे. फिर भी उन्होंने अपना आत्मविश्वास बनाए रखा अपने देश के लिए शीतकालीन ओलंपिक्स कांस्य पदक भी जीता. करीब एक साल पहले स्नोबोर्डिंग के दौरान वो एक पेड़ से टकरा गए थे. इसी घटना में उनको ये गंभीर चोट आई थी.

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मार्क की उम्र उस समय महज 24 वर्ष की थी. लेकिन उन्होंने अपना आत्मविश्वास नहीं खोया. पीएम मोदी द्वारा छात्रों को उनकी कहानी सुनाने के बाद मार्कमॉरिस को भारत में गूगल पर काफी सर्च किया गया. पीएम मोदी ने बीते सप्ताह मार्कमॉरिस की कहानी छात्रों को सुनाई थी. लेकिन 23 फरवरी को उन्होंने इसका वीडियो ट्वीट किया.मार्कमॉरिस ने भी ट्वीट कर उनको धन्यवाद दिया और कहा, मैं बहुत खुश हूं कि पीएम मोदी ने मेरी कहानी को छात्रों को इस प्रकार सुनाया.
 
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इस दौरान पीएम मोदी ने अपने अध्यापकों को भी याद करते हुए कहा था, "मेरे अध्यापकों ने मुझमें ऐसे मूल्यों का निरूपण किया, जिससे मेरे भीतर का छात्र आज भी जीवित है. मैं सबका आह्वान करता हूं कि सभी अपने अंदर के छात्र को जीवित रखें."

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दो घंटे चले इस आयोजन के दौरान प्रधानमंत्री ने कई तरह के सवालों के जवाब दिए, जिनमें परीक्षा के दौरान घबराहट, चिंता, एकाग्रता, दबाव, मातापिता की आकांक्षा और अध्यापकों की भूमिका जैसे प्रश्न शामिल थे। उन्होंने अपनी हाजिर जवाबी के साथ छात्रों को तरह-तरह के उदाहरण दिए.


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