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गांधी जयंती पर छलका पीएम नरेंद्र मोदी का दर्द, बोले- झेलने की कैपेसिटी बढ़ा रहा हूं

पीएम मोदी ने कहा कि कोई इंसान ऐसा नहीं जिसे गंदगी पसंद हो. मूलत: हमारी प्रवृत्ति स्वच्छता पसंद करने की है.

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गांधी जयंती पर छलका पीएम नरेंद्र मोदी का दर्द, बोले- झेलने की कैपेसिटी बढ़ा रहा हूं

पीएम नरेंद्र मोदी का छलका दर्द

खास बातें

  1. स्वच्छता अभियान देशवासियों का सपना
  2. हमारी प्रवृत्ति स्वच्छता पसंद करने की
  3. मुझे गाली देने के हजार विषय हैं :PM
नई दिल्ली: पीएम नरेंद्र मोदी ने गांधी जयंती के मौके विज्ञान भवन में कहा कि स्वच्छता अभियान के तीन साल में हम आगे बढ़े हैं. बेशक, इसके लिए लोगों ने मेरी आलोचना की कि हमारी 2 अक्टूबर की छुट्टी खराब कर दी. मेरा स्वभाव है कि बहुत-सी चीजें झेलता रहता हूं. झेलना मेरा दायित्व भी है और झेलने की कैपेसिटी भी बढ़ा रहा हूं. पीएम मोदी ने कहा कि कोई इंसान ऐसा नहीं जिसे गंदगी पसंद हो. मूलत: हमारी प्रवृत्ति स्वच्छता पसंद करने की है. हम विदेश जाते हैं तो साफ-सफाई की तारीफ करते हैं, लेकिन भूल जाते हैं कि वहां कोई यहां-वहां कूड़ा नहीं फेंकता.

"अगर 1000 महात्मा गांधी आ जाएं, एक लाख नरेन्द मोदी आ जाएं या फिर सभी चीफ मिनिस्टर आ जाएं, तो भी स्वच्छता का सपना पूरा नहीं हो सकता. लेकिन अगर सवा सौ करोड़ देशवासी साथ आ जाएं तो ये सपना पूरा हो सकता है", स्वच्छता अभियान के तीन साल पूरे होने के मौके पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विज्ञान भवन में एक कार्यक्रम में ये बात कही. प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वच्छता अभियान को सफल बनाने के रास्ते में अब भी चुनौतियां हैं, और सरकार और समाज दोनों को मिलकर इस बारे में आगे पहल करना होगा.

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बेशक, देश का मीडिया जल्द ही ऐसी तस्वीरें छापेगा कि स्वच्छ भारत अभियान से दूर कौन भाग रहा है. जब देश स्वीकार कर लेता है तो आप चाहें या न चाहें आपको उससे जुड़ना पड़ता है. स्वच्छता अभियान भारत सरकार का नहीं, देश के सामान्य आदमी का सपना बन चुका है. अब तक जो सफलता मिली है वह देशवासियों की है, सरकार की नहीं.

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कार्यक्रम में मौजूद पेयजल और स्वच्छता मंत्री उमा भारती ने विज्ञान भवन में प्रधानमंत्री की मौजूदगी में कहा, "2014 में जब ये अभियान शुरू हुआ तब 60 करोड़ लोग देश में खुले में शौच करते थे. आज इनमें से 30 करोड़ ने खुले में शौच करना छोड़ दिया है."

स्वच्छता अभियान के तीन साल पूरे होने के मौके पर पेयजल और स्वच्छता मंत्री उमा भारती ने विज्ञान भवन में प्रधानमंत्री की मौजूदगी में ये दावा किया. समारोह में उमा भारती ने सीवर की सफाई के दौरान हो रही सफाई कर्मचारियों की मौत का भी सवाल उठाया. उन्होंने कहा, "हमें ये तय करना होगा कि स्थानीय अधिकारी इसके लिए ज़िम्मेदार होगा. ऐसे मामलों में दंड का प्रावधान होना चाहिये."

पीएम ने कहा-बच्चे स्वच्छता के सबसे बड़े एम्बैसेडर हैं. घर में किसी को कूड़ा इधर-उधर फेंकते देखते हैं तो कहते हैं ऐसा मत करो. अरे जो बात बच्चों के गले उतर गई है वह हमें समझ क्यों नहीं आती. पीएम ने कटाक्ष करते हुए कहा कि हाथ धोने की कहते हैं तो कहते हैं, पानी तो है नहीं. पीएम मोदी को गाली देने के हजार विषय हैं, मैं हर दिन कुछ न कुछ देता हूं, तो देते रहें, लेकिन अपना दायित्व तो निभाएं.

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समारोह में प्रधानमंत्री ने कहा - लोगों को ये समझना ज़रूरी है कि टॉयलेट घर में ना होने का असर उन पर भी पड़ता है और उन्हें आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ता है. उन्होंने UNICEF के एक सर्वे का हवाला देते हुए कहा कि इस सर्वे में ये बात सामने आयी है कि एक परिवार में टायलेट ना होने की वजह से फैलने वाली गंदगी की वजह से औसतन 50,000 रुपये का खर्च आता है।

अगर स्वच्छता अभियान की तीसरी सालगिरह पर भी सरकार 30 करोड़ लोगों के खुले में शौच जाने की बात मानती है तो इससे ही समस्या की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है, जाहिर है इस मुहिम को अंजाम तक पहुंचाने के लिए अभी और प्रयास करने होंगे, न सिर्फ सरकार को बल्कि लोगों को भी जागरुक बनाना होगा.


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