चाइल्ड पोर्नोग्राफी के खिलाफ भी देशों को एकजुट करें पीएम नरेंद्र मोदी : संसदीय समिति

राज्यसभा में कांग्रेस के सदस्य जयराम रमेश (Jairam Ramesh) की अध्यक्षता वाली उच्च सदन की तदर्थ समिति ने शनिवार को सभापति एम. वेंकैया नायडू (M. Venkaiah Naidu) को सौंपी अपनी रिपोर्ट में यह बात कही है.

चाइल्ड पोर्नोग्राफी के खिलाफ भी देशों को एकजुट करें पीएम नरेंद्र मोदी : संसदीय समिति

संसदीय समिति ने पीएम मोदी से चाइल्ड पोर्नोग्राफी के खिलाफ आवाज उठाने की अपील की है. (फाइल फोटो)

खास बातें

  • कमेटी ने पीएम मोदी से की मांग
  • जयराम रमेश हैं कमेटी के अध्यक्ष
  • चाइल्ड पोर्नोग्राफी के खिलाफ मुहिम
नई दिल्ली:

इंटरनेट के जरिए अश्लीलता खासकर, सोशल मीडिया पर 'चाइल्ड पोर्नोग्राफी' के व्यापक प्रसार की समस्या से निपटने के लिए राज्यसभा सदस्यों की एक समिति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) से अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन की तर्ज पर चाइल्ड पोर्नोग्राफी के खिलाफ भी विभिन्न देशों को एकजुट करने का अनुरोध किया है. राज्यसभा में कांग्रेस के सदस्य जयराम रमेश (Jairam Ramesh) की अध्यक्षता वाली उच्च सदन की तदर्थ समिति ने शनिवार को सभापति एम. वेंकैया नायडू (M. Venkaiah Naidu) को सौंपी अपनी रिपोर्ट में यह बात कही है.

राज्यसभा सचिवालय के सूत्रों के अनुसार, समिति ने कहा कि प्रधानमंत्री को चाइल्ड पोर्नोग्राफी की समस्या पर संज्ञान लेते हुए अपने 'मन की बात' कार्यक्रम में भी इस विषय को शामिल कर यह बताना चाहिए कि इससे निपटने के लिए क्या-क्या उपाय किए जा सकते हैं. समिति ने प्रधानमंत्री से अनुरोध किया है कि जिस प्रकार से उन्होंने सौर ऊर्जा के क्षेत्र में वैश्विक पहल करते हुए अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन का गठन किया है, ठीक वैसे ही चाइल्ड पोर्नोग्राफी के संकट से निपटने के लिए भी उन्हें वैश्विक राजनीतिक गठजोड़ बनाने के लिए पहल करनी चाहिए. समिति ने सुझाव दिया है कि प्रधानमंत्री इस दिशा में जी-20 या संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन में कारगर पहल कर सकते हैं.

उल्लेखनीय है कि राज्यसभा के पिछले साल 250वें सत्र के दौरान उच्च सदन में अन्नाद्रमुक की सदस्य एस विजिला सत्यनाथन ने इंटरनेट, खासकर सोशल मीडिया पर अश्लील सामग्री की बच्चों तक आसान पहुंच का मुद्दा उठाया था. इस पर समूचे सदन ने एक स्वर से गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए सभापति के माध्यम से सरकार से कारगर कदम उठाने की मांग की थी. सभापति ने इस समस्या से निपटने के उपाय सुझाने के लिए जयराम रमेश की अगुवाई में 14 सदस्यीय तदर्थ समिति का गठन कर एक महीने में रिपोर्ट देने को कहा था. समिति ने इस विषय पर तीन बैठकें कर विस्तार से चर्चा के बाद रिपोर्ट में सिफारिश की है कि सरकार को यौन अपराधों से बच्चों को बचाने वाले पॉक्सो कानून, सूचना प्रौद्योगिकी कानून और भारतीय दंड संहिता में माकूल बदलाव करने की तत्काल पहल करना चाहिए. साथ ही राज्य सरकारों को भी सिफारिश की है कि वे राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग को इस समस्या से निपटने के लिए सजगता से कार्रवाई करने में सक्षम बनाएं.

समिति ने ट्विटर और फेसबुक सहित अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म तथा संबद्ध पक्षकारों से विचार-विमर्श के बाद पॉक्सो कानून में चाइल्ड पोर्नोग्राफी की परिभाषा को व्यापक बनाने और इसकी ऑनलाइन निगरानी के तंत्र को मजबूत बनाने के तकनीकी सुझाव भी दिए हैं. इनमें भारत में उपलब्ध सभी संचार उपकरणों में ऐसे एप्लिकेशन को अनिवार्य बनाने को कहा है, जिसकी मदद से बच्चों तक अश्लील सामग्री की पहुंच पर अभिभावक सतत निगरानी रख सकें. समिति ने ऑनलाइन फिल्म प्रसारण करने वाले नेटफ्लिक्स और ट्विटर एवं फेसबुक सहित अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को वयस्कों के लिए प्रसारित होने वाली सामग्री का अलग स्थान सुनिश्चित करने का भी सुझाव दिया है ताकि बच्चों तक इसकी पहुंच न हो.



(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)

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