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पीएम की चीन यात्रा : शी जिनपिंग और मोदी की मुलाकात में हो सकती है इन मुद्दों पर बातचीत

ब्रिक्स का वार्षिक शिखर सम्मेलन चीन के शियामेन शहर में 3 सितंबर से, मोदी-जिनपिंग की द्विपक्षीय मुलाकात होने की संभावना

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पीएम की चीन यात्रा : शी जिनपिंग और मोदी की मुलाकात में हो सकती है इन मुद्दों पर बातचीत

चीन में हो रहे ब्रिक्स सम्मेलन में पीएम नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात होने की संभावना है.

खास बातें

  1. डोकलाम गतिरोध समाप्त होने के बाद अहम होगी मुलाकात
  2. दोनों देशों के बीच सीमा विवाद को लेकर हो सकती है चर्चा
  3. लद्दाख में पांगोंग झील के पास सड़क निर्माण का मुद्दा उठा सकता है चीन
नई दिल्ली: अगले सप्ताह होने जा रहे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान इससे हटकर भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात होने की उम्मीद है. यदि मोदी व शी जिनपिंग की मुलाकात हुई तो दो महीने से ज्यादा समय तक चले डोकलाम गतिरोध के खत्म होने के बाद यह महत्वपूर्ण मुलाकात होगी. डोकलाम गतिरोध को लेकर दोनों देशों के संबंधों में खटास बढ़ गई थी.

ब्रिक्स की वार्षिक बैठक चीन के शियामेन शहर में 3 सितंबर को शुरू होगी. इस तीन दिवसीय बैठक में पांच सदस्य देश  ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका भाग लेंगे. इस दौरान अगर मोदी-शी की बैठक हुई तो इन दोनों नेताओं की इस साल यह तीसरी बैठक होगी. उनकी पिछली बैठक शंघाई सहयोग संगठन की अस्ताना में जून में हुए सम्मेलन में हुई थी. वे अनौपचारिक तौर पर जर्मनी में जी-20 के दौरान भी मिले थे.

यह भी पढ़ें : चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता ने दिया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग की द्विपक्षीय मुलाकात का संकेत

भारत और चीन आर्थिक विकास को रफ्तार देने के लिए आपसी कारोबार बढ़ाने को अहम मानते हैं, लेकिन दोनों के बीच रिश्ते ठीक नहीं हैं. संबंधों को पूरी तरह सामान्य बनाने के लिए जरूरी है कि सीमा विवाद सहित अन्य मुद्दे सुलझाए जाएं. चूंकि डोकलाम पर लंबा चला गतिरोध खत्म हो चुका है इसलिए अब संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में दोनों देशों की ओर से प्रयास किए जा सकते हैं.


भारत-चीन के बीच विवाद के मुद्दे

दोनों देशों के बीच सीमा को लेकर विवाद- भारत और चीन के बीच चार हजार किलोमीटर की सीमा (एलएसी) है जो कि निर्धारित नहीं है. भारत और चीन की सेना का जहां तक कब्जा है, वही नियंत्रण रेखा है. यह रेखा 1914 में मैकमोहन ने तय की थी. हालांकि इसे चीन नहीं मानता और अक्सर घुसपैठ की कोशिश करता रहता है.

तिब्बत विवाद - दोनों देशों के बीच विवाद की बड़ी वजह है तिब्बत. तिब्बत को भारत मान्यता देता है और चीन भारत के इस रुख से नाराज रहता है. तिब्बत के मुद्दे पर ही भारत और चीन के बीच युद्ध भी हो चुका है.

अरुणाचल प्रदेश - भारतीय राज्य अरुणाचल प्रदेश पर चीन अपना दावा जताता है. अरुणाचल को विवादित बताने के लिए ही चीन वहां के निवासियों को स्टेपल वीजा देता है. भारत इस मुद्दे को चीन के रुख का लगातार विरोध करता रहा है.

लद्दाख में सड़क निर्माण - भारत के लद्दाख में पांगोंग झील के पास सड़क निर्माण के फैसले पर चीन को आपत्ति है. भारत के गृह मंत्रालय ने पांगोंग झील से 20 किलोमीटर दूर एक सड़क निर्माण को मंजूरी दी है.

जम्मू-कश्मीर - चीन जम्मू-कश्मीर को भारत का अंग नहीं मानता है. दूसरी तरफ वह पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) को पाकिस्तान का हिस्सा मानता है.  इस पर भारत उससे नाराज है.

पीओके में प्रोजेक्ट - चीन ने पाक अधिकृत कश्मीर में 46 बिलियन डॉलर की लागत का प्रोजेक्ट शुरू किया है, जो विवाद का कारण बन गया है.

ब्रह्मपुत्र नदी- चीन ब्रम्हपुत्र नदी पर कई बांध बनाकर सारा पानी रोक रहा है. इसका भारत विरोध कर रहा है.

महासागर में गतिविधियां - चीन ने हिंद महासागर में अपनी गतिविधियां बढ़ा दी हैं जिसको लेकर भारत को आपत्ति है.

VIDEO : संबंधो में रोड़ा सीमा विवाद

डोकलाम में भारत और चीन के बीच गतिरोध सोमवार को खत्म हो गया. इस घटनाक्रम के बाद पीएम नरेंद्र मोदी चीन दौरे पर जा रहे हैं. ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान मोदी और शी की यदि मुलाकात होती है तो दोनों के बीच विवाद के मुद्दों को हल करने के लिए चर्चा हो सकती है.


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