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बच्चों के साथ रेप के मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई : एमिकस क्यूरी ने कहा- पॉक्सो एक्ट लागू करने में सरकारें फिसड्डी

रजिस्ट्री ने देश के सभी हाइकोर्ट से आंकड़े मंगाए. आंकड़ों के मुताबिक पहली जनवरी से 30 जून तक देश भर में बच्चो से रेप के 24 हज़ार मुकदमे दर्ज किए गए हैं. इस दुर्भाग्यपूर्ण सूची में उत्तरप्रदेश 3457 मुकदमों के साथ सबसे ऊपर है. जबकि 9 मुकदमों के साथ नगालैंड सबसे नीचे.

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बच्चों के साथ रेप के मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई : एमिकस क्यूरी ने कहा- पॉक्सो एक्ट लागू करने में सरकारें फिसड्डी

फाइल फोटो

नई दिल्ली:

देशभर में बच्चों के साथ रेप के मामलों में स्वत: संज्ञान याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई के दौरान एमिकस क्यूरी (अदलत मित्र) सीनियर एडवोकेट वी गिरी ने अपनी रिपोर्ट में कोर्ट को बताया कि इस गंभीर और संवेदनशील मामले में  पॉक्सो एक्ट के प्रावधान लागू करने में सरकारें फिसड्डी रही हैं. तमाम दावों के बावजूद बच्चों के यौन शोषण को रोकना तो दूर कम भी नहीं किया जा सका है. गिरी ने कोर्ट को बताया कि ऐसे मामलों में जांच जल्दी पूरी कर दोषियों को सख्त सजा देने के लिए स्पेशल पॉक्सो कोर्ट स्थापित करनी होगी और स्पेशल पब्लिक प्रोसिक्यूटर नियुक्त करने होंगे.

उन्होंने आगे बताया कि दिल्ली को छोड़कर किसी भी राज्य में बच्चों के यौन शोषण या रेप के मामलों में पीड़ित की अलग जांच और गवाहों के बयान के लिए अलग कमरे , वेटिंग रूम और अन्य जरूरी इंतज़ाम नहीं हैं. पॉक्सो एक्ट के मुताबिक साल भर में सुनवाई पूरी हो कर दोषियों को सज़ा मिल जानी चाहिए लेकिन पुलिस के लापरवाही भरे रवैए से साल भर बाद भी जांच तक पूरी नही हो पाई है. 

सुप्रीम कोर्ट ने बच्चों के रेप के मामले में दिल्ली के आंकड़ों पर चिंता जताई और कहा कि यह खराब आंकड़े हैं. दिल्ली में इस साल जनवरी से अभी तक 172 मामले दर्ज हुए हैं लेकिन सिर्फ दो ही मामलों में ट्रायल पूरा हुआ.


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आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने वरिष्ठ वकील वी गिरी को एमिकस क्यूरी नियुक्त किया है. प्रधान न्यायाधीश गोगोई ने  सारे आंकड़े गिरी को देकर कहा है कि वो इसका अध्धयन कर इसके बारे में सुझाव दें कि कोर्ट क्या निर्देश जारी कर सकता है. मासूम बच्चों को अपनी हवस का शिकार बनाने वालों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त है और स्वतः संज्ञान याचिका दाखिल की है.  देश भर में बच्चों के साथ  रेप की लगातार बढ़ रही संख्या पर ठोस कार्रवाई के लिए कोर्ट ने स्वत:संज्ञान लेते हुए पीआईएल रजिस्टर की. प्रधान न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई ने मीडिया में आ रही हर दिन बच्चों से बलात्कार की घटनाओं से आहत होकर सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री से पूरे देश में पहली जनवरी से अब तक ऐसे मामलों में दर्ज एफआईआर और कि गई कानूनी कार्रवाई के आंकड़े तैयार करने को कहा .

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रजिस्ट्री ने देश के सभी हाइकोर्ट से आंकड़े मंगाए. आंकड़ों के मुताबिक पहली जनवरी से 30 जून तक देश भर में बच्चो से रेप के 24 हज़ार मुकदमे दर्ज किए गए हैं. इस दुर्भाग्यपूर्ण सूची में उत्तरप्रदेश 3457 मुकदमों के साथ सबसे ऊपर है. जबकि 9 मुकदमों के साथ नगालैंड सबसे नीचे. यूपी ऐसे कांड में ही आगे नही बल्कि यहां की पुलिस भी निकम्मेपन में सबसे आगे है. बच्चो से रेप के संवेदनशील मुकदमों में भी पुलिस की लापरवाही इस कदर है कि 50 फीसद ज़्यादा यानी 1779 मुकदमों की जांच ही पूरी नहीं हो पाई है तो दरिंदगी के अभियुक्तों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल करना तो बहुत दूर की बात है. इस काली सूची में मध्यप्रदेश 2389 मामलों के साथ दूसरे नम्बर पर है लेकिन पुलिस  1841 मामलों में जांच पूरी कर चार्जशीट भी दाखिल कर चुकी है. प्रदेश की निचली अदालतों ने 247 मामलों में तो ट्रायल भी पूरा कर लिया है.

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सुनवाई के दौरान  प्रधान न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा, "ये चिंताजनक है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश और दिशा-निर्देश के बाद भी पर्याप्त इंतजाम नही किए गए हैं. सुप्रीम कोर्ट ने एमिकस क्यूरी से कहा कि यौन अपराधों से पीड़ित बच्चों को न्याय दिलाने के लिए क्या कर सकते हैं सुझाव दें. इस पर एमिकस क्यूरी गिरी ने कहा कि पॉस्को की स्पेशल कोर्ट की स्थापना और स्पेशल ट्रायल सरकारी वकीलों के द्वारा ही बदलाव होगा.  सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जो आंकड़े हमें मिले वो पहली जनवरी से 30 जून तक के हैं. इससे पहले के आंकड़े और ज्यादा होंगे. यौन अपराध से पीड़ित बच्चों का जिलावार आंकड़ा चाहिए.   साथ ही हमें फोरेंसिक लैब, जांच की प्रक्रिया, पीड़ित बच्चे का बयान दर्ज कराने के विस्तृत ब्यौरा चहिये.  सुप्रीम कोर्ट ने रजिस्ट्री से जिलावार बच्चों से रेप के मामले और कुल लंबित मामलों की संख्या का ब्यौरा मांगा साथ ही ये भी जानकारी हो कि  कौन से मामले कितने सालों से लंबित हैं.  सुप्रीम कोर्ट ने रजिस्ट्री से कहा कि सभी राज्यो के जुवेनाइल जस्टिस कमिटी से 10 दिनों में ब्यौरा लें. मामले की अगली सुनवाई 25 जुलाई को होगी. 

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