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दिल्ली के थाने बने डंपयार्ड, कैसे चले स्वच्छता अभियान

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नई दिल्ली:

दिल्ली पुलिस के कमिश्नर भीमसेन बस्सी पूरे महकमे के साथ तिलक मार्ग थाने की सफाई में जुटे नज़र आए। इससे पहले पुलिस के कई बड़े अधिकारी झाड़ू चलाकर इस मुहिम को लगातार हवा दे रहे हैं। स्वच्छता अभियान की शुरुआत से पहले प्रधानमंत्री अचानक मंदिर मार्ग थाने जा पहुंचे और गंदगी को देख सफाई में जुट गए। शायद यही वजह है कि गृह मंत्रालय ने आदेश दे दिया कि एक हफ्ते के अंदर दिल्ली के सभी थानों को साफ−सुथरा कर दिया जाए।

जिस तिलक मार्ग थाने में पुलिस कमिश्नर सफाई में जुटे थे उसी थाने में अलग−अलग मामलों में जब्त हुए वाहन और मालखाने में जमा 'केस प्रापर्टी' कबाड़ में तब्दील होकर इस मुहिम पर पानी फेर रही है। चाहे दुघर्टना के मामलों में जब्त हुई गाड़ियां हों या दूसरे गंभीर अपराधों में या फिर लावारिश या चोरी से बरामद हुए वाहन, कानूनी पेचीदगियों के चलते इनके निबटान में लंबा समय लग जाता है।

ऐसे में इन वाहनों में ढांचे के अलावा कुछ नहीं बचता। ऐसे ही थाने में जब्त दूसरे सामानों जैसे ड्रग्स, हथियार, नकली करेंसी, शराब या दूसरे सामान भी भारी मात्रा में थानों में भरे पड़े हैं।

20−20 साल तक मामले चलते हैं और तब तक पुलिस की जिम्मेदारी होती है कि वो इन्हें संभाल कर रखे। थानों में जगह कम होती है तो अधिकतर जब्त हुए वाहन थानों के बाहर ही दिखते हैं, एक कबाड़ के रूप में। वैसे तो हर जिले में ऐसे वाहनों को रखने के लिए एक डंपयार्ड भी होता है, लेकिन वाहनों के हिसाब से वो भी कम ही हैं।

हालात ये हैं कि दिल्ली में कई थाने हैं जो डंपयार्ड में तब्दील हो चुके हैं। ग्रेटर कैलाश थाने के चारों ओर जब्त हुए वाहनों का अंबार लगा है। ये वो वाहन हैं जिनके केस या तो कोर्ट में लंबित हैं या इनपर दावा करने वाला कोई नहीं है। दिल्ली पुलिस के ही आंकड़ों पर नजर डालें तो दिल्ली में जब्त वाहनों की संख्या करीब 26 हजार है। इनमें से करीब 20 हजार वाहन एक साल से ज्यादा समय से जब्त हैं। दूसरे जब्त सामान की संख्या दो लाख 80 हजार के करीब है। इनमें करीब दो लाख 40 हजार सामान एक साल से ज्यादा समय से जब्त हैं।


ऐसी केस प्रापर्टी की सुरक्षा, कबाड़ के अंबार, थानों में जगह की कमी और लोगों की सहूलियत पुलिस के लिए बड़ी चुनौती है। इसी साल सितंबर के महीने में एक याचिका पर सुनवाई के बाद दिल्ली हाइकोर्ट ने केस प्रापर्टी के मामले निबटाने की समय सीमा एक महीने तय कर दी थी। साथ ही कोर्ट ने ये भी कहा कि हर तीन महीने में पुलिस को केस प्रापर्टी के बारे में रिपोर्ट, कोर्ट में भी देनी होगी।
 
जानेमाने वकील पीके शर्मा का कहना है पुलिस केस प्रापर्टी की तस्वीरें कोर्ट में दिखाकर केस प्रापर्टी का निपटान कर सकती है, हांलाकि अलग-अलग केस प्रापर्टी के निपटान के लिए कानून के अलग-अलग मानक और अड़चने हैं। अब देखना होगा कि कानूनी दांवपेंच में फंसे कबाड़ दिल्ली पुलिस कैसे निपटती है और कैसे दिल्ली के थानों को साफ और सुंदर बनाती है।

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