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बीजेपी को 48 घंटे दिए, शिवसेना को सिर्फ 24 घंटे; राज्यपाल के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में गुहार

शिवसेना ने कहा- NCP और कांग्रेस से समर्थन पत्र हासिल करने के लिए तीन दिन का समय मांगा था, गवर्नर ने खारिज कर दिया

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बीजेपी को 48 घंटे दिए, शिवसेना को सिर्फ 24 घंटे; राज्यपाल के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में गुहार

शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे (फाइल फोटो).

खास बातें

  1. शिवसेना ने कहा- राज्यपाल ने बीजेपी को 48 घंटे का समय दिया
  2. समर्थन पत्र लेने के लिए शिवसेना को सिर्फ 24 घंटे का समय दिया
  3. आरोप- राज्यपाल ने बीजेपी के इशारे पर जल्दबाजी में काम किया
नई दिल्ली:

महाराष्ट्र में राजनीतिक संकट गहरा गया है. शिवसेना सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है. शिवसेना ने सुप्रीम कोर्ट में राज्यपाल द्वारा महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश करने के फैसले को चुनौती दी है. शिवसेना ने कहा है कि उसने NCP और कांग्रेस से समर्थन पत्र हासिल करने के लिए तीन दिन का समय मांगा था, लेकिन राज्यपाल ने खारिज कर दिया. शिवसेना का कहना है कि राज्यपाल ने बीजेपी को यह बताने के लिए 48 घंटे का समय दिया कि क्या वह सरकार बना सकती है, लेकिन  समर्थन पत्र हासिल करने के लिए शिवसेना को सिर्फ 24 घंटे का समय दिया.

शिवसेना ने आरोप लगाया कि राज्यपाल ने सरकार बनाने के अवसर से इनकार करने के लिए बीजेपी के इशारे पर जल्दबाजी में काम किया.


शिवसेना ने याचिका में कहा है कि राज्यपाल ने इस मामले में फास्ट फार्वड तरीके से काम किया है. राज्यपाल का शिवसेना को वक्त न देने का 11 नवंबर का फैसला अंसवैधानिक, मनमाना, अवैध और समानता के अधिकार का उल्लंघन है. शिवसेना ने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया है कि वह सरकार बनाने के लिए उसे वाजिब समय देने का निर्देश जारी करे.

गौरतलब है कि महाराष्‍ट्र में राष्‍ट्रपति शासन के लिए राज्‍यपाल की सिफारिश को केंद्रीय कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है. अब यह मंजूरी के लिए राष्‍ट्रपति के पास भेजी जा रही है. इससे पहले प्रसार भारती ने अपने सूत्रों के हवाले से खबर दी थी कि महाराष्‍ट्र में राष्‍ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश कर दी गई है.

महाराष्‍ट्र में राज्‍यपाल ने की राष्‍ट्रपति शासन की सिफारिश, शिवसेना पहुंची सुप्रीम कोर्ट

बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री के विदेश दौरे से पहले हुई कैबिनेट बैठक में महाराष्‍ट्र के मुद्दे पर चर्चा हुई और राज्‍यपाल की सिफारिश को मान लिया गया. हालांकि इससे पहले जब एनसीपी नेता नवाब मलिक से सवाल किया गया कि राज्‍य में राष्‍ट्रपति शासन लगाए जाने की सिफारिश की गई है, तो उनका कहना था कि राजभवन से इस पर खुलासा आ गया है कि ऐसी कोई सिफारिश नहीं की गई है.

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