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कर्नाटक में अल्पसंख्यक समुदाय के निर्दोष लोगों से जुड़े मामलों पर राजनीति

पुलिस महानिदेशक कार्यालय ने मांगी रिपोर्ट, बीजेपी और कांग्रेस की राज्य सरकार आमने-सामने

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कर्नाटक में अल्पसंख्यक समुदाय के निर्दोष लोगों से जुड़े मामलों पर राजनीति

बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव और कर्नाटक प्रभारी मुरलीधर राव (फाइल फोटो).

बेंगलुरु: बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव और कर्नाटक प्रभारी मुरलीधर राव ने एक पत्र ट्वीट किया जो कि कर्नाटक पुलिस मुख्यालय के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक शिवप्रकाश देवराज की तरफ से कर्नाटक के ज़िला और कमिश्नरी स्तर के पुलिस प्रमुखों को लिखा गया है.

19 जनवरी को तीसरी बार भेजे गए इस पत्र में लिखा है कि "पहले भी दो बार कार्यालय ने उन मामलों को वापस लेने के लिए पत्र लिखा था जो कि 2013 से 2017 के बीच दर्ज हुए हैं जिनमें अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों पर आरोप हैं. अल्पसंख्यक समुदाय के निर्दोष लोगों से जुड़े मामलों पर निष्पक्ष राय फौरन कार्यालय को भेजें. वायज़ मामले जो साम्प्रदायिकता से जुड़े हैं या इस जैसे दूसरे मामले भी. दो बार पहले भी पत्र भेजा गया था लेकिन जवाब नहीं आया."

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मुरलीधर राव ने अपने ट्वीट में लिखा कि "ये है कर्नाटक सरकार का सर्कुलर, निर्दोष मुसलमानों को रिहा करने के लिए. कांग्रेस का मकसद बीजेपी कार्यकर्ताओं को भयभीत करके चुनावों में फायदा उठाने का है."

इस ट्वीट के सामने आने के बाद विधान परिषद सदस्य रिजवान अरशद ने कहा कि "बीजेपी किस मुंह से यह सवाल उठा रही है. उसके मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने साथ-साथ 20000 कार्यकर्ताओं से जुड़े मामले वापस लिए. दरअसल मुस्लिम संगठनों का एक प्रतिनिधिमंडल गृह मंत्री से मिला था और उन मामलों में हस्तक्षेप करने का आग्रह किया था जो संगीन नहीं हैं जैसे उन मामलों में जिनमें कोई घायल नहीं हुआ है. हमारी सरकार ने इन्हीं मामलों में पुलिस से उनकी राय मांगी है."

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इससे पहले सुबह इंदिरा कैंटीन ऑन व्हील्स का उद्घाटन करने के बाद जब मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से रिपोर्टरों ने पूछा कि बीजेपी आप पर अल्पसंख्यकों के तुष्टिकरण का आरोप लगा रही है तो मुख्यमंत्री ने जवाब दिया कि "कांग्रेस लोगों को सबका साथ सबका विकास जैसे स्लोगंस के ज़रिए बेवकूफ नहीं बनाती. प्रो कन्नडा संगठनों और किसानों के खिलाफ भी मामले वापस लिए जा रहे हैं. क्या वे हिन्दू नहीं हैं."


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