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गहरा सकता है बिजली संकट : कोल इंडिया के कर्मचारी आज से पांच दिन की हड़ताल पर

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नई दिल्ली: कोल इंडिया के लाखों कर्मचारियों ने आज देश भर में पांच दिन की हड़ताल शुरू कर दी है। अगर ये हड़ताल लंबी चली तो आपके घरों में आने वाली बिजली की सप्लाई पर भी फ़र्क पड़ सकता है, क्योंकि ज़्यादातर बिजली घरों में कोयले की भारी किल्लत है।

इस हड़ताल से कोयला सेक्टर को अध्यादेश के ज़रिए पुनर्गठित करने का फैसला एनडीए सरकार को महंगा पड़ता दिख रहा है। इस फैसले के खिलाफ मंगलवार को कोल इंडिया के पांच लाख से ज्यादा कर्मचारी हड़ताल पर चले गए।

इंटक नेता एस क्यू ज़मां ने कहा, हमारा विरोध कोल इंडिया के पब्लिक सेक्टर कैरेक्टर को बदलने के लिए अध्यादेश लाने के सरकार के पहल के खिलाफ है।

हड़़ताल के पहले ही दिन इसका असर झारखंड की 100 से अधिक कोयला खदानों पर दिखा। छत्तीसगढ़ में 66 कोयला खदान बंद रहीं और महाराष्ट्र की 36 कोयला खदानों में काम ठप्प रहा।

इस हड़ताल का दायरा कितना बड़ा है इसका अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि कोल इंडिया दुनिया की सबसे बड़ी कोयला खनन कंपनी है। कोल इंडिया भारत में 81% कोयला उत्पादन करती है, और उसका भारत के कोयला बाज़ार पर 74% कब्ज़ा है। कंपनी कोयला से चलने वाले 86 थर्मल प्लांटों में 82 को कोयला सप्लाई करती है। उसके पास हर दिन औसतन क़रीब 15 लाख टन कोयला उत्पादन की क्षमता है यानी 5 दिन की हड़ताल चली तो 75 लाख टन कोयला का उत्पादन कम हो जाएगा।

संकट की वजह से सरकार पर दबाव बढ़ता जा रहा है, लेकिन कोयला मंत्री पूरे दिन कुछ भी खुलकर बोलने से बचते दिखे।

हड़ताल अगर लंबी चली तो हमारे-आपके घरों पर भी इसका असर दिख सकता है, क्योंकि हमारे यहां साठ फीसदी बिजली कोयले से बनती है और फिलहाल बिजली घरों के पास कोयला बहुत कम है। दरअसल कोल इंडिया के लाखों कर्मचारी ऐसे समय पर हड़ताल पर गये हैं जब बड़ो पॉवर प्रोजेक्ट्स के पास पहले से कोयला का स्टॉक कम है।

सेंट्रल इलैक्ट्रिसिटी ऑथोरिटी के पास मौजूदा ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, देश के 20 बड़े पॉवर प्लांट्स के पास चार दिन से भी कम का कोयला स्टॉक है।

नौबत यह है कि कोयला कुछ जगहों पर नहीं के बराबर है तो कुछ में दो-एक दिन का स्टॉक है। सेंट्रल इलैक्ट्रिसिटी ऑथोरिटी का पास मौजूद ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक देश के नौ बड़े बिजलीघरों में एक दिन का स्टॉक भी नहीं है, जबकि चार बड़े बिजलीघरों में बस एक दिन भर कोयला बचा हुआ है और चार-चार बिजलीघरों में 2 और तीन दिन का स्टॉक बचा हुआ है।

दिल्ली में केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री ने माना कि कोयला और बिजली सेक्टर संकट के दौर से गुज़र रहा है। तुगलकाबाद में एक कार्यक्रम में गडकरी ने कहा, 'कई पावर प्रोजेक्टस के पास कोयला नहीं है। जिनके पास कोल ब्लाक है उन्हें ज़मीन अधिग्रहण की मंज़ूरी नहीं मिल रही है... ऐसे में लोगों को बिजली सप्लाई करना मुश्किल हो रहा है'।

उधर कर्मचारियों को समझाने की कवायद चल रही है, लेकिन मंगलवार को कोई समाधान नहीं दिखा।


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