प्रशांत किशोर ने ट्वीट कर पूछा सवाल, "जामिया हिंसा के लिए पुलिस पर कार्रवाई कौन करेगा?"

प्रशांत किशोर ने पूछा कि जामिया कैम्पस में घुसकर जो हिंसा छात्रों पर की गई, उनके खिलाफ कार्रवाई कब होगी?

प्रशांत किशोर ने ट्वीट कर पूछा सवाल,

प्रशांत किशोर ने जामिया हिंसा में पुलिस पर कार्रवाई करने कि मांग की

नई दिल्ली:

जनता दल यूनाइटेड के उपाध्यक्ष और राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर नागरिकता संशोधन कानून के विरोध को लेकर लगातार चर्चाओं में हैं. रविवार को दिल्ली के जामिया मिल्लिया इस्लामिया में हुई पुलिस-छात्र झड़प के बाद भी उन्होंने एक के बाद एक कई ट्वीट किए थे. एक बार फिर उन्होंने छात्रों के समर्थन में ट्वीट कर दिल्ली पुलिस पर कार्रवाई की मांग की है.

प्रशांत किशोर ने हिंसा में कथित तौर पर शामिल लोगों पर हो रही कार्रवाई के साथ-साथ पुलिस के ऊपर भी कार्रवाई की मांग की है. प्रशांत किशोर ने अपने ट्वीट में लिखा है "दिल्ली में हुई हिंसा में कथित तौर पर शामिल लोगों पर दिल्ली पुलिस कार्रवाई कर रही है और ये होना भी चाहिए. परन्तु जो हिंसा पुलिस ने जामिया विश्वविद्यालय के कैम्पस के अन्दर छात्रों पर किया, उनपर कार्यवाही कौन करेगा?#CAA2019 #NRC"

बता दें, जामिया में रविवार को हुई हिंसा मामले में दिल्ली पुलिस ने 10 लोगों को गिरफ्तार किया है. इनमें एक भी जामिया यूनिवर्सिटी का छात्र शामिल नहीं है. गिरफ्तार किए गए लोगों में तीन घोषित बदमाश हैं और सभी जामिया और ओखला इलाके के रहने वाले हैं. साथ ही पुलिस ने कहा कि हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि छात्रों को क्लीन चिट दे दी गई है. वहीं, दिल्ली के जामिया मिल्लिया इस्लामिया में पुलिस कार्रवाई और विवादास्पद नागरिकता (संशोधन) कानून के खिलाफ सोमवार को देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हुए. प्रदर्शन का समर्थन नेता और सामाजिक कार्यकर्ता भी करते नजर आए. कहीं-कहीं ये प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे, तो कहीं इसने हिंसक रूप ले लिया था.

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उधर अमेरिका की तरफ से भी CAA के मुद्दे पर बयान आया है, अमेरिकी विदेश मंत्रालय का कहना है कि वह भारत में नागरिकता संशोधन कानून के मामले पर बारिकी से नजर रख रहा है. इसके साथ ही प्रदर्शन करने वालों से हिंसा से दूर रहने और प्रशासन से शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकारों की रक्षा और सम्मान करने की अपील की है. अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने न्यूज एजेंसी एएनआई से कहा, 'हम लोग नागरिकता संशोधन कानून के मामले पर बारिकी से नजर रख रहे हैं. हम प्रशासन से आग्रह करते हैं कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकारों की रक्षा और सम्मान किया जाना चाहिए. हम प्रदर्शनकारियों से भी हिंसा से दूर रहने की अपील करते हैं.'अमेरिकी विदेश विभाग मंत्रालय ने कहा कि धार्मिक स्वतंत्रता और समानता के अधिकार हमारे दोनों लोकतंत्र के मूल सिद्धांत हैं. अमेरिका ने भारत से आग्रह किया है कि अपने धार्मिक अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा की जाए.

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