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राष्ट्रपति चुनाव : फ्री में समर्थन देने के मूड में नहीं शिवसेना, जानें क्या है चाहत

शिवसेना को राष्ट्रपति चुनाव के बाद लंबे समय तक न केंद्र में न राज्य में सरकार पर दबाव के लिए कोई मौका दिख रहा है. ऐसे में अपने समर्थन की कीमत वसूलने के पक्ष में शिवसेना में सौदे की दलगत सोच उभर रही है.

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खास बातें

  1. शिवसेना चाहती है अहम विभाग
  2. दबाव बनाने के लिए जल्द कोई और मौका नहीं
  3. फ्री में समर्थन नहीं देना चाहती शिवसेना
मुंबई: राष्ट्रपति चुनाव के लिए बीजेपी ने रामनाथ कोविंद का नाम आगे किया है. उनके नाम पर विपक्ष बंटा हुआ नजर आ रहा है. कांग्रेस, लेफ्ट, तृणमूल के कोविंद के नाम पर राज़ी होने की संभावना बेहद कम है जबकि बीजेडी, टीआरएस जैसे कई विपक्षी दलों ने एनडीए उम्मीदवार रामनाथ कोविंद के नाम का समर्थन किया है. वहीं शिवसेना फ्री में समर्थन देने के मूड में नहीं है. समर्थन के बदले में शिवसेना फायदे का सौदा चाहती है. सूत्राों के मुताबिक- ष्ट्रपति पद को लेकर पार्टी में जारी मंथन में यह बात निकलकर आ रही है कि इसके बदले में शिवसेना को क्या मिलेगा? पार्टी इस मौके पर फ्री में समर्थन देना नहीं चाहती. राष्ट्रपति चुनाव के बाद लंबे समय तक न केंद्र में न राज्य में सरकार पर दबाव के लिए कोई मौका दिख रहा है. ऐसे में अपने समर्थन की कीमत वसूलने के पक्ष में शिवसेना में सौदे की दलगत सोच उभर रही है. राज्य में बेहतर और मलाईदार विभाग अपने खाते में चढ़ा लेने के बदले में समर्थन दिया जा सकता है.

पार्टी के पास फिलहाल 5 कैबिनेट विभाग हैं, जिनमें पर्यावरण, उद्योग, स्वास्थ्य, परिवहन और विभाजित लोकनिर्माण विभाग हैं, लेकिन उनकी नजर राजस्व और गृह विभागों पर टिकी है. साथ ही विधानसभा का उपाध्यक्ष पद खाली है.

इससे पूर्व पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा था कि अगर सिर्फ दलित वोटों के लिए कोविंद को चुना गया है वह एनडीए उम्मीदवार का समर्थन नहीं करेगी. इससे देश को कोई लाभ नहीं होगा. शिवसेना ने कभी किसी को ढाल बनाकर राजनीति नहीं की. उद्धव ने कहा कि शिवसेना ने एमएस स्वामीनाथन का नाम राष्ट्रपति पद के लिए सुझाया था, जिससे किसानों को फायदा मिलता. शिवसेना आज अपने पत्ते खोलेगी. अगर शिवसेना एनडीए उम्मीदवार का समर्थन नहीं करती है तो ये नई बात नहीं होगी. इससे पहले भी शिवसेना यूपीए की उम्मीदवार प्रतिभा पाटिल और प्रणब मुखर्जी का समर्थन कर चुकी है.


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