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सभी लखनऊ की 'पहले आप' वाली तहजीब अपनाएं तो नहीं होंगी व्यवहार की समस्याएं : राष्ट्रपति कोविंद

राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने लखनऊ में ‘पहले आप’ कहने को ‘धैर्यवान और संवेदनशील होने की तहजीब’ बताते हुए कहा कि अगर सभी देशवासी इस तहजीब को अपना लें तो बहुत सी आपसी व्यवहार की समस्याएं पैदा ही नहीं होंगी.

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सभी लखनऊ की 'पहले आप' वाली तहजीब अपनाएं तो नहीं होंगी व्यवहार की समस्याएं : राष्ट्रपति कोविंद

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद (फाइल फोटो)

लखनऊ: देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में ‘पहले आप’ कहने को ‘धैर्यवान और संवेदनशील होने की तहजीब’ बताते हुए गुरुवार को कहा कि अगर सभी देशवासी इस तहजीब को अपना लें तो बहुत सी आपसी व्यवहार की समस्याएं पैदा ही नहीं होंगी. बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति ने कहा, ‘हमारे देश में लखनऊ की तहजीब की अपनी एक अलग पहचान है. यहां के शिष्टाचार में सबको ‘आप’ कहकर संबोधित किया जाता है. इसके पीछे केवल औपचारिकता ही नहीं है, बल्कि यह दूसरे को आदर देने की भावना का परिचायक है.'

उन्होंने कहा, ‘इसी तरह लखनऊ के लोगों में दूसरे को तरजीह देते हुए ‘पहले आप, पहले आप’ कहने की परंपरा रही है। कभी-कभी इसका परिहास भी होता है। लेकिन इसके पीछे भी केवल नफासत ही नहीं, बल्कि धीरज रखने और दूसरे को प्राथमिकता देने की भावना होती है। यह अधीर या आक्रामक होने के बजाय धैर्यवान और संवेदनशील होने की तहजीब है.' कोविन्द ने कहा, 'अगर सभी देशवासी लखनऊ के लोगों की ‘पहले आप’ वाली तहजीब अपना लें, तो बहुत सी आपसी व्यवहार की समस्याएं शायद पैदा ही नहीं होंगी और लोग अधिक खुश रहेंगे.' 

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लखनऊ शहर से अंबेडकर के रिश्ते का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इस शहर से बाबासाहेब अंबेडकर का भी एक खास रिश्ता रहा है जिसके कारण कुछ लोग लखनऊ को बाबासाहेब की ‘स्नेह-भूमि’ भी कहते हैं. राष्ट्रपति ने कहा कि बाबासाहेब के लिए गुरु समान बोधानन्द और उन्हें दीक्षा प्रदान करने वाले भदंत प्रज्ञानन्द लखनऊ में ही रहते थे. आज से 15 दिन पहले भदंत प्रज्ञानन्द जी का लखनऊ में ही परिनिर्वाण हुआ. उन्होंने कहा, ‘आज यहां आने से पहले मुझे उनकी पुण्यस्थली जाकर उनके सम्मान में सादर-नमन करने का अवसर मिला है.’ पुराने दिनों को याद करते हुए कोविन्द ने कहा कि यहां आकर उनकी उन दिनों की यादें ताज़ा हो गई हैं, जब वह राज्यसभा के सदस्य थे और इस विश्वविद्यालय की गवर्निंग काउंसिल का सदस्य होने के नाते इसकी प्रगति का जायजा लिया करते थे. 

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उन्होंने कहा कि आज इस विस्तृत 'विद्यामन्दिर परिसर' में प्रभावशाली इन्फ्रास्ट्रक्चर (बुनियादी ढांचा) देखकर उन्हें हार्दिक प्रसन्नता हो रही है. इस परिसर में ‘अंबेडकर भवन’ और ‘अटल बिहारी वाजपेयी सभागार’ के होने से भारत-रत्न से सम्मानित दो महापुरुषों को नमन करने का अवसर मिला है. राष्ट्रपति ने कहा, ‘जैसा कि आप सब जानते हैं, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को लखनऊ के लोग संसद में अपना प्रतिनिधि चुन कर भेजते रहे हैं। समाज और राष्ट्र के निर्माण में उनके महान योगदान के लिए पूरा देश उनका आदर करता है.’ 

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उन्होंने कहा, ‘‘आज संयोग से एक और भारत रत्न को स्मरण करने का अवसर है। भारत को वर्तमान स्वरुप प्रदान करने वाले लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की आज पुण्य तिथि है. भारत के पहले गृह मंत्री और उप प्रधानमंत्री के रूप में उन्होंने हमारी शासन व्यवस्था को एक मजबूत आधार प्रदान किया था। एक कृतज्ञ राष्ट्र की ओर से मैं उनकी स्मृति में सादर नमन करता हूं.’

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