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पीएम मोदी की अमेरिका यात्रा से पहले हरियाणा का पिछड़ा गांव मरोड़ा बना 'ट्रम्प विलेज'

एनजीओ सुलभ इंटरनेशनल कर रहा गांव का विकास, अमेरिका से गांवों के विकास के लिए मदद की दरकार

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पीएम मोदी की अमेरिका यात्रा से पहले हरियाणा का पिछड़ा गांव मरोड़ा बना 'ट्रम्प विलेज'

हरियाणा के मरोड़ा गांव में ट्रम्प विलेज के होर्डिंग और बोर्ड लगाए गए हैं.

खास बातें

  1. सुलभ इंटरनेशनल ने किया गांव का नामकरण
  2. शौचालय बनवाने और विकास के लिए अतिरिक्त नाम दिया
  3. ट्रम्प विलेज से मोदी-ट्रम्प संबंध बढ़ सकते हैं आगे
नई दिल्ली: दिल्ली से 80 किलोमीटर दूर हरियाणा के मेवात इलाके का मरोड़ा गांव अचानक सुर्खियों में आ गया है. एक एनजीओ ने इस गांव को गोद लेकर इसका नाम दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश के सबसे ताकतवर शख्स अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के नाम पर 'ट्रम्प विलेज' रख दिया.  

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जल्द ही अमेरिका की यात्रा पर जाने वाले हैं. वहां वे डोनाल्ड ट्रम्प से मुलाकात भी करेंगे. उनकी इस यात्रा से पहले ट्रम्प के नाम पर गांव का नामकरण करने को मोदी-ट्रम्प और भारत-अमेरिका संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए खास संकेत के रूप में देखा जा रहा है.   

देश में सार्वजनिक शौचालय बनवाने वाले मशहूर एनजीओ सुलभ इंटरनेशनल ने इस गांव में शौचालय बनवाने और विकास कराने के लिए गांव को यह अतिरिक्त नाम दिया है.

सुलभ इंटरनेशनल के संस्थापक बिंदेश्वर पाठक ने बताया कि इस गांव का नाम डोनाल्ड ट्रम्प के नाम पर इसलिए रखा है क्योंकि जब वे अमेरिका में डोनाल्ड ट्रम्प की पार्टी के लोगों से मिले थे तो उनसे देश के गांवों में शौचालय बनवाने और विकास के लिए मदद करने की बात कही थी. डोनाल्ड ट्रम्प का नाम इसलिए दिया ताकि इसको देखकर अमेरिका से विकास के लिए मदद मिले. पाठक ने कहा "उसी बातचीत में यह बात आई. हमने कहा कि एक गांव हम अपने यहां डोनाल्ड ट्रम्प के नाम पर रख देते हैं और उसका विकास कर देते हैं. शौचालय बनवा देते हैं. फिर अमेरिकन जो हैं, वे हेल्प करें. इसके लिए तो डोनाल्ड ट्रम्प का नाम हमने उसी मीटिंग में ले लिया.'' पाठक ने यह भी कहा कि ''अभी अमेरिका से कोई मदद नहीं मिली है क्योंकि बिना काम देखे कोई मदद नहीं करता, बल्कि मंशा पर शक करता है. लेकिन जब वे हमारे काम देखेंगे तो खुद आएंगे मदद करने.''

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वैसे मरोड़ा गांव पिछड़ा है. लोग अपने घरों में शौचालय बनवाने में सक्षम नहीं हैं. यहां 80 फीसदी घरों में औरत-मर्द दोनों खुले में शौच को मजबूर हैं. गांव की महिलाओं ने बताया कि उनको शौच करने के लिए घर से बहुत दूर जंगल और खेतों में जाना पड़ता है. हर तरफ निगाह रखनी होती है कि कोई देख तो नहीं रहा. आने-जाने में रोज दो घंटे का समय लग जाता है. और अगर रात में जाना पड़े तो डरते हुए किसी के साथ जाना मजबूरी है. महिलाओं ने यह भी बताया कि अगर वे आर्थिक रूप से सक्षम होतीं तो शौचालय बनवा लेतीं लेकिन मेहनत मजदूरी करके ज़िंदगी जैसे-तैसे चल रही है तो शौचालय कैसे बनवाते.

वैसे गांव की औरतों को डोनाल्ड ट्रम्प के बारे में नहीं पता लेकिन लोग शुक्रगुजार हैं कि इसी बहाने गांव का विकास होगा.


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