सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के 10 लाख कर्मचारी आज हड़ताल पर, सड़कों पर उतर कर रहे हैं विरोध-प्रदर्शन

आज सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के करीब 10 लाख कर्मचारी हड़ताल पर हैं.

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के 10 लाख कर्मचारी आज हड़ताल पर,  सड़कों पर उतर कर रहे हैं विरोध-प्रदर्शन

Bank Strike: सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के कर्मतारी आज हड़ताल पर रहेंगे.

खास बातें

  • सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में आज हड़ताल
  • करीब 10 लाख कर्मचारी रहेंगे हड़ताल पर
  • सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में कामकाज पर पड़ेगा असर
नई दिल्ली :

आज सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (Bank Strike) के करीब 10 लाख कर्मचारी हड़ताल पर हैं. हड़ताल पर कर्मचारियों के होने की वजह से कामकाज प्रभावित होने की संभावना है. यह हड़ताल विजया बैंक और देना बैंक के बैंक आफ बड़ौदा में प्रस्तावित विलय के खिलाफ बुलाई गई है. सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक कर्मचारियों की यूनियन ने हड़ताल का आह्वान किया है (Bank Band). आपको बता दें कि एक सप्ताह से भी कम समय में यह दूसरी बैंक हड़ताल है. इससे पहले विलय और वेतन संशोधन पर बातचीत को जल्दी निष्कर्ष पर पहुंचाने को लेकर बीते 21 दिसंबर को भी हड़ताल की थी. हालांकि निजी क्षेत्र के बैंकों में कामकाज आम दिनों की तरह सामान्य रहेगा. गौरतलब है कि यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) ने हड़ताल का आह्वान किया है.

 

Bank Strike Live Updates:

 

-मध्य प्रदेश के भोपाल में भी बैंक कर्मचारियों ने सड़कों पर उतर कर विरोध प्रदर्शन किया.

-तमिलनाडु: कोयंबटूर में बैंक हड़ताल की तस्वीरें. बता दें कि 9 बैंकों के संघ के कर्मचारी विजया बैंक और देना बैंक का बैंक ऑफ बरोदा के साथ विलय के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं.

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यूएफबीयू नौ बैंक यूनियनों का संगठन है. इसमें ऑल इंडिया बैंक आफिसर्स कनफेडरेशन (एआईबीओसी), आल इंडिया बैंक एम्पलाइज एसोसिएशन (एआईबीईए), नेशनल कनफेडरेशन आफ बैंक एम्प्लायज (एनसीबीई) और नेशनल आर्गेनाइजेशन आफ बैंक वर्कर्स (एनओबीडब्ल्यू) आदि यूनियनें शामिल हैं. यूएफबीयू का दावा है कि उसके सदस्यों की संख्या 10 लाख से अधिक है. एआईबीईए के महासिचव सी एच वेंकटचलम ने कहा कि अतिरिक्त मुख्य श्रम आयुक्त ने बैठक बुलायी थी लेकिन उससे कोई हल नहीं निकला. इसीलिए सभी यूनियनों ने हड़ताल पर जाने का निर्णय लिया है. उन्होंने कहा कि बैठक के दौरान न तो सरकार और न ही संबंधित बैंकों ने आगे आकर यह भरोसा नहीं दिलाया कि वे विलय के लिये कदम नहीं उठाएंगे. 

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यूनियनों ने दावा किया कि सरकार विलय के जरिये बैंकों का आकार बढ़ाना चाहती है लेकिन यदि देश के सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को भी मिलाकर एक कर दिया जाए तो भी विलय के बाद अस्तित्व में आई इकाई को दुनिया के शीर्ष दस बैंकों में स्थान नहीं मिलेगा. सरकार ने सितंबर में सार्वजनिक क्षेत्र के विजया बैंक और देना बैंक का बैंक आफ बड़ौदा में विलय करने की घोषणा की थी. इससे देश का तीसरा सबसे बड़ा बैंक अस्तित्व में आएगा. वेतन संशोधन पर नेशनल आर्गेनाइजेशन ऑफ बैंक वर्कर्स के उपाध्यक्ष अश्विनी राणा ने कहा कि वेतन संशोधन नवंबर, 2017 से लंबित है. अब तक इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (आईबीए) ने वेतन में 8 प्रतिशत वृद्धि की पेशकश की है जो यूएफबीयू को स्वीकार्य नहीं है. (इनपुट- भाषा से भी)

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