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समाधि में ही लीन रहेंगे आशुतोष महाराज, पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने खारिज की बेटे की अर्जी

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने बुधवार को जनवरी 2014 में मृत आध्यात्मिक संत आशुतोष महाराज के संबंध में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा कि वे समाधि में ही लीन रहेंगे.

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समाधि में ही लीन रहेंगे आशुतोष महाराज, पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने खारिज की बेटे की अर्जी

आशुतोष महाराज ने 1983 में जालंधर में दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की स्थापना की थी...

खास बातें

  1. हाईकोर्ट के फैसले से अनुयायियों में खुशी की लहर
  2. याचिका में की गई थी अंतिम संस्कार कराने की मांग की
  3. याचिका में दावा - मनोज झा है आशुतोष महाराज का असली नाम
चंंडीगढ़: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने बुधवार को जनवरी 2014 में मृत आध्यात्मिक संत आशुतोष महाराज के संबंध में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा कि वे समाधि में ही लीन रहेंगे. इससे उनके अनुयायियों में खुशी की लहर है. कोर्ट ने आज उनके बेटा होने का दावा करने वाले शख्स दिलीप कुमार झा की 3 साल पुरानी याचिका खारिज कर दी जिसमें उन्होंने अपने पिता के शरीर का अंतिम संस्कार कराने की मांग की थी.  

पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट की डबल बेंच ने सिंगल बेंच के आदेश को निरस्त करते हुए दिव्य ज्योति जागृति संस्थान (डीजेजेएस) के प्रमुख के शरीर को संरक्षित करने का फैसला सुनाया. इससे पहले साल 1 दिसंबर 2014 को जस्टिस एमएमएस बेदी की सिंगल बेंच ने डीजेजेएस प्रमुख के शरीर का अंतिम संस्कार करने का आदेश दिया था. तब कोर्ट ने कहा था कि आशुतोष महाराज क्लिनिकली डेड को चुकेहैं. लिहाजा, उनका अंतिम संस्कार कर दिया जाए. माना जाता है कि उनकी मृत्यु दिल का दौरा पड़ने से हुई थी.  

हाइकोर्ट की सिंगल बेंच के आदेश के खिलाफ डीजेजेएस ने डबल बेंच में चुनौती दी थी और कहा था कि आशुतोष महाराज समाधि में लीन हैं और एक दिन वो इससे बाहर आएंगे. लिहाजा, उनका अंतिम संस्कार नहीं किया जा सकता है. इसके साथ ही हाईकोर्ट की डबल बेंच ने समय-समय पर आशुतोष महाराज के शरीर का मेडिकल टीम द्वारा निरीक्षण कराने का भी निर्देश दिया है. यह निरीक्षण लुधियाना के अस्पताल के डॉक्टों की टीम करेगी. संस्थान को इस निरीक्षण के लिए 50 लाख रुपये जमा कराने को कहा गया है.

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क्या है पूरा मामला
28 जनवरी 2014 को जालंधर के नूरमहल कस्बे में स्थित दिव्य ज्योति संस्थान के प्रमुख आशुतोष महाराज ने सीने में दर्द की शिकायत की थी. इसके बाद वे मौन हो गए थे. लेकिन इस घटना के बाद दो मत पैदा हो गए. एक का मानना था कि महाराज का निधन हो गया है जबकि दूसरे पक्ष का मानना था कि महाराज गहरी समाधि में लीन हैं.  

मनोज झा है आशुतोष महाराज का असली नाम!
उधर, मनोज झा के वकील का कहना है कि हमें नहीं मालूम कि कोर्ट ने हमारी याचिका को क्यों खारिज कर दिया. लेकिन हम सुप्रीम कोर्ट जाएंगे. मनोज झा ने दावा किया कि आशुतोष महाराज का असली नाम महेश कुमार झा है और उन्होंने 1970 के दशक में अपना गांव छोड़ दिया था. उन्होंने 1983 में जालंधर में दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की स्थापना की. उनके देश-विदेश में लाखों भक्त हैं. दिलीप और गुरु के पूर्व ड्राइवर पूरन सिंह ने कोर्ट में याचिका दायर करके शव को का अंतिम संस्कार कराने की मांग की थी.  


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