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सुप्रीम कोर्ट का सरकार से सवाल- दिल्ली में प्रदूषण करने वाले वाहनों की पहचान की योजना का क्या हुआ?

अमिक्स क्यूरी ने कोर्ट को बताया, सड़क परिवहन मंत्रालय ने योजना कानून मंत्रालय को भेजी लेकिन उसने इस पर कदम नहीं उठाया

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सुप्रीम कोर्ट का सरकार से सवाल- दिल्ली में प्रदूषण करने वाले वाहनों की पहचान की योजना का क्या हुआ?

प्रतीकात्मक फोटो.

नई दिल्ली:

दिल्ली और NCR में प्रदूषण के मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने वाहनों के कलर कोड स्टीकर पर कानून मंत्रालय से नियमों में बदलाव के हालत पर जवाब मांगा है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मंत्रालय जवाब दे कि प्रदूषित वाहनों की पहचान के लिए बनी इस योजना का क्या हुआ?

अमिक्स क्यूरी ने कोर्ट को बताया कि सड़क परिवहन मंत्रालय ने सकारात्मक तरीके से नियमों का पालन किया और योजना को कानून मंत्रालय को भेजा. लेकिन कानून मंत्रालय ने इस पर कदम नहीं उठाया. अगर कानून मंत्रालय ने समय पर कार्य किया होता तो दिल्ली में गंभीर श्रेणी का प्रदूषण रोका जा सकता था. उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली में गंभीर श्रेणी के प्रदूषण के कारण गरीब प्रभावित होते हैं और दैनिक मजदूर अपनी आजीविका खो रहे हैं.

वहीं सरकारी वकील ने कहा कि  कानून मंत्रालय से राय नहीं मिलने के बावजूद सड़क परिवहन मंत्रालय सभी राज्यों को अधिसूचना जारी कर सकता है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कानून मंत्रालय से बात कर कल जवाब दिया जाए.


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दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण को लेकर केन्‍द्र सरकार की योजना पर अगस्त में सुप्रीम कोर्ट ने मुहर लगा दी थी.
केंद्र सरकार ने पेट्रोल और CNG गाड़ियों के लिए ब्लू स्टिकर और डीजल गाड़ियों में नारंगी स्टिकर लगाने की योजना बनाई है ताकि उनकी पहचान हो सके. केंद्र सरकार ने प्रदूषण को लेकर योजना दी थी. पेट्रोल-सीएनजी वाहनों के लिए हल्का नीला स्टिकर प्रयुक्त किया जाएगा.

खास बात ये है कि वाहनों पर लगने वाले यह स्टीकर ‘सेल्फ डेस्ट्रेकेटिव' होंगे. यानी एक निश्चित अवधि के बाद खुद ही खत्म हो जाएंगे. इन कलर कोड वाले स्टीकर से 15 साल पुरानी पेट्रोल की और 10 साल पुरानी डीजल गाड़ियों की पहचान ज़्यादा आसानी से हो सकेगी. पुराने वाहनों के NCR में चलने पर NGT ने रोक लगा रखी है.


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