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राफेल पर बवाल : एन राम ने NDTV से कहा- सरकार ने अहम जानकारी कोर्ट को नहीं दी

राफेल को लेकर 'द हिंदू' की ताज़ा रिपोर्ट ने पीएमओ को कठघरे में खड़ा कर दिया, संसद से सड़क तक माहौल गर्म रहा

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खास बातें

  1. पीएमओ रक्षा मंत्रालय के समानांतर फ्रांसीसी पक्ष से बातचीत कर रहा था
  2. रक्षा मंत्रालय ने पीएमओ की दखलअंदाज़ी का विरोध भी किया था
  3. तत्कालीन रक्षा सचिव ने कहा था कि इससे मोलतोल की ताकत घटेगी
नई दिल्ली:

राफेल सौदे को लेकर शुक्रवार क 'द हिंदू' में छपी एक खबर को लेकर संसद से सड़क तक माहौल गर्म रहा. ख़बर के मुताबिक राफ़ेल को लेकर पीएमओ अलग से सौदेबाज़ी कर रहा था जिस पर रक्षा मंत्रालय ने कड़ा ऐतराज़ जताया था. इस मामले को लेकर राहुल गांधी ने सीधे पीएम पर निशाना साधा जबकि रक्षा मंत्री संसद और बाहर इस आरोप को गलत बताती रहीं.

राफेल को लेकर द हिंदू की ताज़ा रिपोर्ट ने पीएमओ को कठघरे में खड़ा कर दिया है. रिपोर्ट के मुताबिक राफ़ेल पर पीएमओ रक्षा मंत्रालय के समानांतर फ्रांसीसी पक्ष से बातचीत कर रहा था. रक्षा सचिव ने इस बात पर कड़ा ऐतराज़ जताया था. रक्षा सचिव ने इसे सौदेबाजी की ताकत कम करने वाला बताया. द हिंदू ने रक्षा मंत्रालय का यह नोट भी छापा है. द हिंदू का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के सामने सरकार ने यह बात छुपाई.

एन राम ने NDTV से कहा, "पहले ये ध्यान दें कि इतनी अहम जानकारी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को नहीं दी. जब वो सुप्रीम कोर्ट में आ गई तो ये सूचना उसने उनके सामने नहीं रखी. रक्षा मंत्रालय के लोगों ने विरोध किया. भारत की ओर से बातचीत की टीम के मुखिया जो वायुसेना में बहुत सीनियर हैं, उप प्रमुख से कम नहीं, वे बहुत दो टूक हैं कि चूंकि आप इसे चुपचाप कर रहे हैं तो हमें इसका पता फ्रांस की बातचीत की टीम से चला. उनके जनरल ने हमें एक पत्र लिखा- जो उनको भी रेफ़र किया गया. और उसके बाद उन्होंने इसे पीएमओ के सामने उठाया और उन्होंने पुष्टि की कि वो ये कर रहे हैं. यह बहुत संगीन मसला है, संप्रभु गारंटी का, और सरकारी गारंटी का, बैंक गारंटी का, आर्बिट्रेशन ऐग्रीमेंट का. इसमें पैसे का मामला है, आप बहुत बड़ा एडवांस पेमेंट करते हैं. ये सारे मुद्दे बहुत क़ायदे से उठाए गए. तो वो ये करते हैं- पीठ पीछे बातचीत, और समानांतर बातचीत. और ऊपर ये साफ निर्देश हैं और वो इसको नीचा दिखा रहे हैं. तो तत्कालीन रक्षा सचिव ने कोई कसर नहीं छोड़ी है. ये कहने में कि इससे मोलतोल की ताकत घटेगी. ये कहानी खुद अपनी बात बयान करती है."


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खबर छपते ही राहुल गांधी ने सीधे प्रधानमंत्री पर निशाना साधा. राहुल गांधी ने द हिंदू अख़बार की रिपोर्ट का ज़िक़्र करते हुए कहा कि अख़बार ने पीएम मोदी की पोल खोल दी. ख़ुद रक्षा मंत्रालय ने ये बात कही है कि सौदे को लेकर पीएम की समानांतर बात चल रही थी. रक्षा मंत्रालय ने पीएमओ की दखलअंदाज़ी का विरोध भी किया था.

संसद में भी इस ख़बर की हलचल दिखी. लोकसभा में शोर-शराबे के बीच रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद के भीतर और बाहर कहा कि पीएमओ ने बस निगरानी की, दखल नहीं दिया. निर्मला सीतारमण ने हिंदू पर अधूरी रिपोर्टिंग करने का आरोप भी लगाया. उन्होंने कहा कि द हिंदू ने ये नहीं बताया कि रक्षा मंत्री इस ऐतराज़ को खुद ख़ारिज कर चुके थे.

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राफ़ेल सौदे को लेकर राज्यसभा में भी हंगामा हुआ. हंगामा इतना बढ़ा कि कार्यवाही शुरू होने के थोड़ी ही देर बाद सोमवार तक के लिए स्थगित कर दी गई.

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रक्षा मंत्री की वह टिप्पणी एनडीटीवी के पास भी है. रक्षा मंत्री ने तब लिखा था, "रक्षा सचिव प्रधानमंत्री के प्रमुख सचिव से मिलकर मामला सुलझा सकते हैं. ऐसा लगता है पीएमओ और फ़्रांस के राष्ट्रपति का दफ़्तर मामले की निगरानी कर रहे हैं. पैरा 5 कुछ अतिरिक्त प्रतिक्रिया जान पड़ता है."

उस समय के रक्षा सचिव जी मोहन ने भी द हिंदू अखबार की ख़बर पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि रक्षा मंत्रालय की आपत्ति का क़ीमतों से कोई लेना-देना नहीं था. ये संप्रभु गारंटी और सामान्य शर्तों को लेकर था.
द हिंदू में जो भी छपा है उसका क़ीमतों से लेकर कोई लेना-देना नहीं है.



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