राहुल गांधी ने गालवान में झड़प को लेकर सरकार पर किया वार - हमारे जवान निहत्थे क्यों भेजे गए

राहुल गांधी ने गुरुवार को एक ट्वीट कर मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए सवाल किया कि भारतीय सैनिक निहत्थे क्यों थे? राहुल गांधी ने अपने ट्वीट में लिखा, 'चीन की हिम्मत कैसे हुई कि उसने हमारे निहत्थे सैनिकों की जान ली? हमारे सैनिक शहीद होने के लिए निहत्थे क्यों भेजे गए थे?' 

राहुल गांधी ने गालवान में झड़प को लेकर सरकार पर किया वार - हमारे जवान निहत्थे क्यों भेजे गए

राहुल गांधी ने ट्वीट कर गालवान घाटी के घटनाक्रम को लेकर सरकार पर किया हमला- फाइल फोटो

खास बातें

  • राहुल गांधी ने सरकार पर बोला तीखा हमला
  • ट्वीट कर पूछा- चीन की इतनी हिम्मत कैसे हो गई?
  • कहा- हमारे सैनिक निहत्थे क्यों भेजे गए?
नई दिल्ली:

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी पूर्वी लद्दाख के गालवान घाटी में भारतीय-चीनी सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प को लेकर केंद्र सरकार पर हमला बोला है. इस झड़प में 20 भारतीय जवानों ने अपनी जान गंवाई है. राहुल गांधी ने गुरुवार को एक ट्वीट कर मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए सवाल किया कि भारतीय सैनिक निहत्थे क्यों थे? राहुल गांधी ने अपने ट्वीट में लिखा, 'चीन की हिम्मत कैसे हुई कि उसने हमारे निहत्थे सैनिकों की जान ली? जान गंवाने वाले हमारे सैनिक निहत्थे क्यों भेजे गए थे?' 

पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष ने बुधवार को रक्षामंत्री राजनाथ सिंह पर भी हमला बोला था. राजनाथ सिंह ने सैनिकों की जान जाने पर संवेदना व्यक्त करते हुए एक ट्वीट किया था, जिसे रीट्वीट करते हुए राहुल गांधी ने उनसे पाचं सवाल पूछे थे. उन्होंने लिखा था, 'अगर आपको इतना दर्द महसूस हो रहा है तो बताइए कि क्यों आपने ट्वीट में चीन का नाम न लेकर भारतीय सेना को अपमानित किया?  क्यों दो दिन बाद सांत्वना व्यक्त कर रहे हैं? क्यों रैली को संबोधित कर रहे थे जब एक ओर जवान शहीद हो रहे थे? क्यों छिपे हुए हैं और मीडिया के जरिए भारतीय सेना को इस घटना के लिए जिम्मेदार ठहरा रहे हैं? क्यों मीडिया के जरिए सरकार की जगह सेना को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है?'

बता दें कि पूर्वी लद्दाख में चीनी सैनिकों के साथ हिंसक झड़प में 20 भारतीय सैनिकों को जान गंवानी पड़ी है जबकि चार सैनिक गंभीर रूप से घायल हुए हैं. यह हिंसक झड़प उस समय शुरू हुई जब भारतीय सैनिक सीमा के भारत की तरफ चीनी सैनिकों द्वारा लगाए गए टेंट को हटाने गए थे. चीन ने 6 जून को दोनों पक्षों के लेफ्टिनेंट जनरल-रैंक के अधिकारियों के बीच बातचीत के बाद इस टेंट को हटाने पर सहमति जताई थी. 

क्या हुआ था 15 जून को?
शाम को 4:00 से 5:00 बजे के बीच बिहार रेजिमेंट के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल संतोष बाबू ने चीन के कमांडिंग ऑफिसर से समझौते का पालन करने को कहा और गलवान नदी के पास जगह को खाली करने को कहा. इस पर चीनी सेना का बर्ताव बहुत ही आक्रामक था. उन्होंने फौरन भारी संख्या में हमला बोल दिया और पत्थरबाजी शुरू कर दी. इसमें 16 बिहार रेजीमेंट के कमांडिंग ऑफिसर गंभीर रूप से घायल हो गए. कमांडिंग ऑफिसर के साथ लोगों ने उन्हें वहां से बचाकर निकाला और इलाज के लिए बेस कैंप ले गए. वहां मौजूद भारतीय जवान चीनी सैनिकों का लगातार मुकाबला करते रहे. कुछ और भारतीय सैनिक अपने लोगों की सहायता के लिए घटना स्थल पर पहुंचे. चीनी सैनिक भी वहां पर बड़ी संख्या में जमा हो गए. दोनों तरफ जबरदस्त धक्का-मुक्की हुई जो आधी रात तक चलती रही.

इस झड़प के दौरान जमकर पत्थरबाजी हुई और धक्का-मुक्की हुई. वहां पर जगह कम  होने के चलते और नुकीले पहाड़ों पर फिसलन के चलते कई जवान नाली में गिर गए और गलवान नदी में भी गिर गए. 


इस झड़प में कई जवान घायल हो गए कुछ जवान पहाड़ के चलते फिसलकर गिर गए जिससे उन्हें चोटें आईं. गलवान नदी में गिरने के कारण कई जवान हाइपोथर्मिया के शिकार हो गए क्योंकि नदी का पानी ठंड से बिल्कुल जमा हुआ था. सेना ने गलवान नदी में तलाशी अभियान चलाकर जवानों को बाहर निकाला और पास के मेडिकल फैसिलिटी तक ले गए. उनमें से कई की वहां लाने से पहले ही मौत हो चुकी थी.

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