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CWC बैठक में मोदी सरकार के खिलाफ खोला गया मोर्चा, 'अब शुरू होगा नया स्वतंत्रता संग्राम'

कांग्रेस कार्य समिति (CWC Meeting) ने महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के मौके पर मंगलवार को कहा कि 'बंटवारे, भय और घृणा का वातावरण पैदा करने वाली' मोदी सरकार के खिलाफ 'नया स्वतंत्रता संग्राम' शुरू किया जाएगा.

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CWC बैठक में मोदी सरकार के खिलाफ खोला गया मोर्चा, 'अब शुरू होगा नया स्वतंत्रता संग्राम'

कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक के दौरान पूर्व पीएम मनमोहन सिंह, यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी.

सेवाग्राम (महाराष्ट्र):

कांग्रेस कार्य समिति (CWC Meeting) ने महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के मौके पर मंगलवार को कहा कि 'बंटवारे, भय और घृणा का वातावरण पैदा करने वाली' मोदी सरकार के खिलाफ 'नया स्वतंत्रता संग्राम' शुरू किया जाएगा. मुख्य विपक्षी दल की शीर्ष नीति निर्धारण इकाई सीडब्ल्यूसी ने दिल्ली-उत्तर प्रदेश सीमा पर किसानों पर लाठीचार्ज की निंदा करते हुए कहा कि अन्नदाताओं पर 'बर्बरता एवं अत्याचार' को स्वीकार नहीं किया जा सकता और पार्टी किसानों की लड़ाई पुरजोर ढंग सेलड़ेगी. कार्य समिति की बैठक में दो प्रस्ताव पारित किए गए. पहला प्रस्ताव 'बंटवारे, भय और बंटवारे' के खिलाफ और दूसरा प्रस्ताव किसानों पर 'बर्बरता' की निंदा करते हुए पारित किया गया.

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कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला के मुताबिक कार्य समिति में पारित प्रस्ताव में कहा गया है, 'राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने सदैव बापू की विचारधारा के विरुद्ध निरंतर षड्यंत्र किया है. कांग्रेस कार्यसमिति यह रेखांकित करती है कि आज वही पाखंडी ताकतें, सत्ता की स्वार्थ सिद्धि के लिए बापू की विचारधारा अपनाने का ढ़ोंग रच रही है.' सीडब्ल्यूसी ने कहा, 'सच्चाई यह है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा नफ़रत, बंटवारे और घृणा का वातावरण बनाया गया था और उसी के परिणामस्वरुप राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की दुखद हत्या हुई.'

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लाल बहादुर शास्त्री को श्रद्धांजलित देते हुए कांग्रेस कार्यसमिति ने कहा, 'कांग्रेस कार्यसमिति ने इस बात पर जोर दिया कि 'जय जवान, जय किसान' एक नारा नहीं, बल्कि कांग्रेस पार्टी के लिए जीवन पद्धति का मार्ग है.' उसने कहा, 'समय की मांग है कि एक नए स्वतंत्रता संग्राम की शुरुआत सेवाग्राम से हो. एक ऐसी मोदी सरकार के ख़िलाफ़ जिसने देश में बंटवारे और पूर्वाग्रह का वातावरण पैदा किया है, जिसकी राजनीति का आधार भय व डर है, जिसकी कार्यशैली ध्रुवीकरण पर आधारित है, जिसकी सोच हर आवाज़ को दबाने व हर विरोध का गला घोंटने की है, जिसका चरित्र हिन्दुस्तान के बहुलतावाद को समाप्त कर उन्माद फैलाने का है.'

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा का परोक्ष रूप से हवाला देते हुए उसने कहा, 'आप बापू के चश्मे को राजनीतिक प्रचार पाने के लिए उधार तो ले सकते हैं, मगर उनके सिद्धांतों को अपनाए बिना उनके आदर्शों पर अमल नहीं कर सकते.' प्रस्ताव में कहा गया है, 'कांग्रेस कार्यसमिति यह संकल्प लेती है कि खोखले आदर्शों व दोहरे चरित्र वाले ऐसे सब समूहों और व्यक्तियों को बेनक़ाब करेंगे, जिन्होंने कभी भी गांधी जी के दिखाए सच्चाई, सहिष्णुता, समरसता और अहिंसा के प्रशस्त मार्ग को नहीं अपनाया.'

कार्यसमिति ने कहा, 'महात्मा गांधी ने भारत के साम्प्रदायिक व सामाजिक सौहार्द्र के लिये अपने प्राणों की आहुति दी. जब समूचा  देश बापू की जघन्य ह्त्या से आहत था, उसके छः सप्ताह से भी कम समय में प्रधानमंत्री, पंडित जवाहरलाल नेहरू, कांग्रेस व देश के वरिष्ठ नेता तथा गांधी जी के सहयोगी सेवाग्राम में पुनः एकत्रित हुए और घृणा-बंटवारे के विषैले वातावरण के खिलाफ तथा देश को गांधीवादी विचारधारा पर चल एक सूत्र में बांधने का आह्वान किया.'

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सीडब्ल्यूसी ने कहा, 'पंडित नेहरू ने तब कहा था कि हर प्रकार के खतरों से लड़ना और प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करना ही कांगेस का रास्ता है. मौज़ूदा परिस्थिति में पंडित नेहरू का यह संदेश कांग्रेस संगठन के लिए और अधिक प्रासंगिक है.' कांग्रेस कार्यसमिति ने सभी देशवासियों, विशेषतः युवाओं का आह्ववान किया कि 'वो भय, डर, झूठ और धोख़े की राजनीति का निर्भीकता से मुक़ाबला करें, न झुकें ,न रुकें, जब तक मंज़िल प्राप्त ना हो जाए.' दिल्ली के निकट किसानों पर लाठी चार्ज की घटना का हवाला देते हुए सीडब्ल्यूसी ने कहा, 'महात्मा गांधी की जयंती पर देश के हज़ारों किसान सैकड़ों किलोमीटर की यात्रा कर अपनी मांगों को लेकर, मोदी सरकार के द्वार आए थे. उनकी पीड़ा की हुंकार और व्यथा की चित्कार सुनने की बजाय, अहंकारी व क्रूर मोदी-योगी सरकारों ने उनपर बर्बरतापूर्वक लाठियां भांजी.'



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