रेलवे ई-टिकटिंग गिरोह का भंडाफोड़, आतंकी फंडिंग से तार जुड़े होने की आशंका

रेलवे में अवैध टिकट रैकेट को लेकर हाल में की गई सबसे बड़ी कार्रवाई में आरपीएफ ने झारखंड से एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है.

रेलवे ई-टिकटिंग गिरोह का भंडाफोड़, आतंकी फंडिंग से तार जुड़े होने की आशंका

RPF अधिकारी ने बताया कि गुलाम मुस्तफा (28) को भुवनेश्वर से गिरफ्तार किया गया

खास बातें

  • पढ़ा-लिखा न होने के बावजूद कंप्यूटर व हैकिंग करने में एक्सपर्ट है मुस्तफा
  • उसके पास से ANMS सॉफ्टवेयर से IRCTC की 563 आईडी मिली है
  • स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में मुस्तफा के 2400 बैंक अकॉउंट हैं
नई दिल्ली:

रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स (RPF) ने रेलवे की E-Ticket की अवैध सॉफ्टवेयर के जरिए दलाली का अब तक सबसे बड़ा खुलासा करते हुए देश भर से 27 लोगों को गिरफ्तार किया है. एक अधिकारी ने बताया कि इस मामले में पहली गिरफ्तारी 10 दिन पहले बंगलुरू से गुलाम मुस्तफा नाम के शख्स की हुई थी. गुलाम मुस्तफा E-Ticket बनाने और कन्फर्म करने वाला सॉफ्टवेयर बेचता था. गिरफ्तारी के बाद जब गुलाम मुस्तफा के लैपटॉप की जांच की गई तो उसमें पाकिस्तान, बांग्लादेश, मीडिल ईस्ट, इंडोनेशिया और नेपाल तक के लिंक का खुलासा हुआ. इसके साथ ही मुस्तफा के पास से इन देशों के कई नम्बर भी मिले हैं. RPF के साथ गुलाम मुस्तफा की जांच IB और NIA भी कर रही है.

बता दें, गुलाम मुस्तफा झारखंड के गिरिडीह का रहने वाला है. इससे पहले वह बंगलुरू में रेलवे के टिकट ब्लैक में बेचा करता था, बाद में E-Ticket का सॉफ्टवेयर बेचने लगा. हालांकि गुलाम मुस्तफा पढ़ा-लिखा नहीं है, लेकिन कंप्यूटर और हैकिंग करने में एक्सपर्ट है. उसके पास से ANMS सॉफ्टवेयर से IRCTC की 563 आईडी मिली है. बताया गया कि मुस्तफा एक विदेशी नम्बर का प्रयोग करता है और उसी के जरिए वॉट्स एप चैट पर बात करता है. इसके अलावा उसके पास से कॉड वर्ड मैसेज भी मिले हैं. जांच एजेंसी को हैरानी हुई जब उसे पता चला कि मुस्तफा के 2400 बैंक अकॉउंट स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में, जबकि 600 अकॉउंट रीजनल बैंकों में हैं. अधिकारी ने बताया कि उसके लैपटॉप और मोबाइल की फोरेंसिक जांच जारी है.

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इसके साथ ही मुस्तफा ने फ़र्ज़ी आधार कार्ड बनाने के लिए एक एप भी बनाया हुआ था. उसके एक वॉट्स एप ग्रुप से कई मोबाइल नंबरों की पहचान हुई. इसी ग्रुप से गैंग से एक जुड़े एक और अहम शख्स की पहचान हुई. इस शख्स का नाम गुरुजी है जो इस गैंग के वित्तीय लेनदेन की व्यवस्था को संभालता है. बताया जा रहा है कि गुरुजी तकनीकी एक्सपर्ट है और यूगोस्लाविया का नंबर इस्तेमाल करता है. उसने हाल ही में मुस्तफा को 13 लाख रुपए दिए थे. उसे भी जल्दी गिरफ्तार किया जाएगा. 

इस मामले में एक और संदिग्ध की पहचान हुई है जो बांग्लादेश से लोगों को लाकर उनका इलाज कराने में मदद करता है. इस रैकेट का मास्टर माइंड हामिद अशरफ़ है. गुलाम मुस्तफा पहले उसके संपर्क में आया और फिर E-Ticket के सॉफ्टवेयर बेचने लगा. गैंग के मास्टरमाइंड हामिद अशरफ को CBI ने 2016 में E-Ticket के सॉफ्टवेयर बेचने के आरोप में गिरफ्तार किया था, लेकिन बेल मिलने के बाद वह दुबई फरार हो गया. बता दें, हामिद अशरफ 2019 में गोंडा में एक स्कूल में बम धमाके के मास्टरमाइंड भी है.  

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अधिकारी ने बताया कि गुलाम मुस्तफ़ा के लैपटॉप से बरामद हुई चीजें इसके आतंकी लिंक होने की ओर इशारा करती है. गुलाम मुस्तफ़ा पाकिस्तान के तब्लीग-ए-जमात को फॉलो करता है. लैपटॉप और मोबाइल फोन से कई पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, और मीडिल ईस्ट के कई नम्बर मिले हैं जिन नम्बरों पे ये लगातार संपर्क में था. E-Ticket की दलाली से उसने 1 महीने में 10 से 15 करोड़ की कमाई. हालांकि बताया जा रहा है कि ANMS सॉफ्टवेयर का डेवलपर हामिद अंसारी नाम का शख्स है. उसके बाद सॉफ्टवेयर से अलग-अलग प्रदेशों में 18 से 20 एडमिन और सुपर एडमिन जुड़े हैं, जो हवाला या क्रिप्टॉकरेंसी के जरिए हामिद को पैसा भेजते हैं.

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एडमिन से पूरे देश में 200-300 पैनल सेलर जुड़े हैं, जो सोफ्टवेयर पैनल खरीदते हैं और इनको आगे एजेंटों को बेचते हैं. एक पैनल में 20 आईडी होती हैं और इसका हर महीने 28 हज़ार रुपये चार्ज होता है. ANMS सॉफ्टवेयर का प्रयोग पूरे देश में करीब 20 हज़ार एजेंट कर रहे हैं. इसी सॉफ्टवेयर के जरिए रेलवे के टिकट बुक होते थे. इसके जरिए हर महीने में करीब 8 से 10 करोड़ काले धन का कारोबार होता है. बताया गया कि ANMS सॉफ्टवेयर का अवैध सॉफ्टवेयर के बाजार में 85 फीसदी कब्ज़ा है. इसमें लोग-इन के लिए कैप्चा, बुकिंग कैप्चा और बैंक ओटीपी की जरूरत नहीं पड़ती है. इसके साथ ही टिकट बुकिंग बहुत तेजी से होती और कन्फर्म टिकट मिलता है. इस सॉफ्टवेयर से 3 टिकट 1.48 मिनट में बुक हो जाते हैं, जबकि अगर कोई शख्स मैन्युअली आईआरसीटीसी के एप से बुक करेगा तो उसे एक टिकट बुक करने में 2.55 मिनट लगेंगे.

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